पर्यावरण

Himalayan Brown Bear: रक्षम-छितकुल अभयारण्य में देखा जाना

Himalayan Brown Bear: रक्षम-छितकुल अभयारण्य में देखा जाना

चर्चा में क्यों?

9 मई 2026 को एक जैव विविधता सर्वेक्षण (biodiversity survey) के दौरान, शोधकर्ताओं (researchers) ने हिमाचल प्रदेश के रक्षम-छितकुल वन्यजीव अभयारण्य (Rakchham-Chitkul Wildlife Sanctuary) में एक हिमालयन ब्राउन भालू (Himalayan brown bear) को दो शावकों (cubs) के साथ कैमरे में कैद किया। यह 2016-17 के बाद से अभयारण्य में प्रजातियों का केवल दूसरा पुष्ट फोटोग्राफिक साक्ष्य (confirmed photographic evidence) है, जो इसे एक महत्वपूर्ण संरक्षण मील का पत्थर (conservation milestone) बनाता है।

पृष्ठभूमि

रक्षम-छितकुल वन्यजीव अभयारण्य तिब्बत की सीमा से लगे हिमाचल प्रदेश के किन्नौर (Kinnaur) जिले में स्थित है। 3,200 और 5,489 मीटर के बीच ऊंचाई पर लगभग 34 वर्ग किलोमीटर में फैले इसमें अल्पाइन घास के मैदान (alpine meadows), उप-अल्पाइन वन (sub-alpine forests) और ठंडे रेगिस्तान (cold deserts) शामिल हैं। यह अभयारण्य बर्च (birch), विलो (willow) और औषधीय जड़ी-बूटियों जैसी विविध वनस्पतियों (flora) और आईबेक्स (ibex), हिम तेंदुआ (snow leopard) और लाल लोमड़ी (red fox) जैसे जीवों का घर है। हिमालयन भूरा भालू (Himalayan brown bear - Ursus arctos isabellinus) हिमालय के लिए स्थानिक एक गंभीर रूप से संकटग्रस्त (critically endangered) उप-प्रजाति है। यह एक सर्वाहारी (omnivore) और बीज फैलाने वाले (seed disperser) के रूप में एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक भूमिका (ecological role) निभाता है लेकिन निवास स्थान के नुकसान, जलवायु परिवर्तन और अवैध शिकार (poaching) से खतरों का सामना करता है।

देखे जाने का महत्व

  • जनसंख्या निगरानी (Population monitoring): भालू का दिखना इंगित करता है कि कुछ रिकॉर्ड के बावजूद भूरा भालू अभयारण्य में बना हुआ है, जो चल रही निगरानी और निवास स्थान की सुरक्षा (habitat protection) की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
  • पारिस्थितिक स्वास्थ्य (Ecological health): भूरे भालू जैसे शीर्ष शिकारियों (top predators) की उपस्थिति से पता चलता है कि पारिस्थितिकी तंत्र अपनी ट्रॉफिक जटिलता (trophic complexity) को बरकरार रखता है और बड़े स्तनधारियों (large mammals) का समर्थन कर सकता है।
  • संरक्षण जागरूकता (Conservation awareness): उच्च-ऊंचाई वाले आवासों में संरक्षण प्रयासों के लिए जागरूकता बढ़ाने और धन (funding) सुरक्षित करने के लिए फोटोग्राफिक साक्ष्य का उपयोग किया जा सकता है।
  • सामुदायिक जुड़ाव (Community engagement): स्थानीय समुदायों और अधिकारियों को प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष (human-wildlife conflict) को कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, खासकर भालुओं के चारा खोजने के मौसम (foraging season) के दौरान।

निष्कर्ष

हिमालयन भूरे भालू परिवार का दुर्लभ (rare) रूप से देखा जाना रक्षम-छितकुल अभयारण्य के पारिस्थितिक महत्व (ecological significance) को रेखांकित करता है। ऐसे आवासों की रक्षा करना उच्च ऊंचाई वाली प्रजातियों के अस्तित्व को सुनिश्चित करता है और नाजुक हिमालय में जैव विविधता (biodiversity) को बनाए रखता है।

स्रोत

Indian Express

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