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हिमालयी याक: ICAR की IoT स्वास्थ्य और जियो-फेंसिंग प्रणाली

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चर्चा में क्यों?

भारतीय वैज्ञानिकों ने याक (yaks) के लिए एक इंटरनेट ऑफ थिंग्स (Internet of Things) प्रणाली विकसित की। यह स्वास्थ्य की निगरानी करता है, तनाव की भविष्यवाणी करता है और जानवरों की आवाजाही को ट्रैक करता है, और यह प्रणाली जियो-फेंसिंग (geo-fencing) के माध्यम से आभासी सीमाएँ भी बनाती है। ICAR ने 7 जुलाई 2026 को इस तकनीक की घोषणा की।

पृष्ठभूमि

याक ठंडे उच्चभूमि के अनुकूल एक लंबे बालों वाला गोजातीय (bovine) जानवर है, और घरेलू याक का वैज्ञानिक नाम बोस ग्रुनियन्स (Bos grunniens) है। इसका जंगली पूर्वज बोस म्यूटस (Bos mutus) है।

याक बहुत अधिक ऊंचाई पर रहते हैं और चरते हैं। भारतीय याक के आवास आमतौर पर 3,000 और 6,000 मीटर के बीच होते हैं। महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं।

उच्च ऊंचाई वाले समुदाय दूध, मांस और फाइबर के लिए याक का उपयोग करते हैं, और याक कठिन इलाकों में भार भी ढोते हैं। उनका गोबर वहां ईंधन प्रदान करता है जहां पेड़ों की कमी होती है।

उच्च ऊंचाई के अनुकूलन

  • घना कोट: लंबे बाहरी बाल और एक महीन अंडरकोट (undercoat) गर्मी के नुकसान को कम करते हैं।
  • बड़ी श्वसन क्षमता: हृदय और फेफड़े पतली हवा में जीवन का समर्थन करते हैं।
  • शीत सहिष्णुता (Cold tolerance): गठीला शरीर और सीमित पसीना गर्मी के नुकसान को कम करते हैं।
  • चरने की क्षमता: याक विरल अल्पाइन घास और सेज (sedges) का उपयोग कर सकते हैं।
  • सुरक्षित चाल (Sure-footed movement): मजबूत पैर और खुर (hooves) खड़ी पहाड़ी ढलानों के अनुकूल होते हैं।

हाइपोक्सिया (Hypoxia) का अर्थ है शरीर के ऊतकों में अपर्याप्त ऑक्सीजन, और ऊंचे पहाड़ों में वायुमंडलीय ऑक्सीजन कम होती है। याक शरीर विज्ञान इस दीर्घकालिक चुनौती के अनुकूल है।

नई प्रणाली किसने विकसित की?

प्रौद्योगिकी दो संस्थानों से आई है, और पहला दिरांग (Dirang) में ICAR-राष्ट्रीय याक अनुसंधान केंद्र (National Research Centre on Yak) है। दूसरा गुवाहाटी में असम डॉन बॉस्को विश्वविद्यालय (Assam Don Bosco University) है।

ICAR का अर्थ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research) है, और यह केंद्रीय कृषि प्रणाली के तहत काम करता है। दिरांग केंद्र याक अनुसंधान और पशुपालन में माहिर है।

टीम ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (artificial intelligence) और एम्बेडेड सिस्टम के साथ पशु विज्ञान को जोड़ा, और इसने इंटरनेट ऑफ थिंग्स तकनीक का भी उपयोग किया। ICAR ने सार्वजनिक रूप से हर सेंसर विनिर्देश को सूचीबद्ध नहीं किया है।

प्रणाली कैसे काम करती है?

  • कनेक्टेड निगरानी (Connected monitoring): फ़ील्ड डिवाइस व्यक्तिगत जानवरों के बारे में जानकारी एकत्र और प्रसारित करते हैं।
  • स्वास्थ्य अलर्ट: किसानों को बीमारी या असामान्य तनाव के बारे में प्रारंभिक चेतावनी मिल सकती है।
  • मूवमेंट ट्रैकिंग: स्थान की जानकारी मुक्त रूप से घूमने वाले जानवरों को खोजने में मदद करती है; जियो-फेंसिंग (Geo-fencing): एक आभासी सीमा सुरक्षित चराई क्षेत्र को चिह्नित करती है।
  • सीमा अलर्ट (Boundary alert): जब कोई जानवर उस आभासी रेखा को पार करता है तो सिस्टम चेतावनी दे सकता है।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) का अर्थ जुड़े हुए भौतिक उपकरण हैं, और एक स्मार्ट कॉलर एक परिचित पशुधन उदाहरण है। यह एक जानवर, एक नेटवर्क और एक निगरानी एप्लिकेशन को जोड़ सकता है।

जियो-फेंसिंग एक भौतिक बाड़ नहीं बनाता है, और सॉफ्टवेयर स्थान निर्देशांक (location coordinates) का उपयोग करके एक सीमा खींचता है। रेखा पार करने से अलर्ट ट्रिगर हो सकता है।

यह हिमालय में क्यों उपयोगी है?

पारंपरिक झुंड अक्सर व्यापक पहाड़ी परिदृश्यों में स्वतंत्र रूप से चरते हैं, और चरवाहे हर जानवर पर लगातार नज़र नहीं रख सकते। बर्फ, कोहरा और खड़ी ढलान मैन्युअल ट्रैकिंग को मुश्किल बना देते हैं।

प्रारंभिक स्वास्थ्य अलर्ट तेज़ पशु चिकित्सा देखभाल का समर्थन कर सकते हैं, और स्थान अलर्ट पशु हानि को कम कर सकते हैं। वे अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पास आकस्मिक आवाजाही को भी रोक सकते हैं।

सिस्टम पशुधन को ट्रैक करता है, लोगों या अंतरराष्ट्रीय सीमा को नहीं, और इसका घोषित उद्देश्य बेहतर झुंड प्रबंधन है। यह खतरनाक इलाके के माध्यम से बार-बार यात्रा को कम कर सकता है।

जंगली याक और घरेलू याक: उन्हें भ्रमित न करें

घरेलू याक: बोस ग्रुनियन्स (Bos grunniens) एक पशुधन जानवर है, और सामान्य घरेलू झुंडों का मूल्यांकन IUCN द्वारा "कमजोर (Vulnerable)" के रूप में नहीं किया जाता है।

जंगली याक: बोस म्यूटस (Bos mutus) को IUCN द्वारा कमजोर (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, और इसे CITES परिशिष्ट I में शामिल किया गया है। पालतू रूप को उस CITES सूची से स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है।

भारतीय कानून: जंगली याक वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध है। यह सुरक्षा घरेलू याक पालन को वन्यजीव अपराध में नहीं बदलती है।

व्यापक चुनौतियाँ

गर्म होती परिस्थितियाँ ठंडे अल्पाइन चरागाहों को कम कर सकती हैं, और नई बीमारियाँ भी अधिक ऊंचाई पर दिखाई दे सकती हैं। युवा लोग कुछ क्षेत्रों में पारंपरिक देहाती काम छोड़ रहे हैं।

प्रौद्योगिकी हर समस्या का समाधान नहीं कर सकती है, और उपकरणों को बिजली, नेटवर्क एक्सेस और रखरखाव की आवश्यकता होती है। अलर्ट भी समय पर पशु चिकित्सा सेवाओं तक पहुंचने चाहिए।

निष्कर्ष

नई प्रणाली डिजिटल निगरानी के साथ पारंपरिक याक चरवाहे को जोड़ती है। यह स्वास्थ्य देखभाल में सुधार कर सकता है और पशु हानि को कम कर सकता है। जंगली-घरेलू भेद सबसे महत्वपूर्ण प्रीलिम्स ट्रैप बना हुआ है।

Sources

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