भूगोल

हिमायत सागर झील: इतिहास, बाढ़ प्रबंधन और संरक्षण

हिमायत सागर झील: इतिहास, बाढ़ प्रबंधन और संरक्षण

समाचार में क्यों?

जून 2026 के अंत में Hyderabad Metropolitan Water Supply and Sewerage Board ने Himayat Sagar जलाशय के कई फ्लडगेट खोल दिए। Catchment area में भारी बारिश के कारण जल स्तर बढ़ गया, जिसके चलते पानी को ऊपर से बहने से रोकने के लिए लगभग 1,000 cusecs पानी छोड़ा गया। अधिकारियों ने निचले इलाकों (downstream) के लिए अलर्ट जारी किया और झील में आने और जाने वाले पानी की निरंतर निगरानी शुरू की।

पृष्ठभूमि

Himayat Sagar एक कृत्रिम झील है जो Hyderabad के दक्षिण-पश्चिम में लगभग 20 km दूर स्थित है। इसका निर्माण 1920 और 1927 के बीच हैदराबाद के सातवें निज़ाम मीर उस्मान अली खान द्वारा 1908 में मूसी (Musi) नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद किया गया था। इंजीनियरों ने मूसी की एक सहायक नदी, ईसी (Esi) नदी पर 2.255-km लंबा चिनाई वाला बांध (masonry dam) बनाया। इस परियोजना का उद्देश्य Hyderabad और Secunderabad को पीने का पानी उपलब्ध कराना और शहरों को भविष्य की बाढ़ से बचाना था। जलाशय का नाम निज़ाम के बेटे हिमायत अली खान के नाम पर रखा गया था। अपनी बड़ी जुड़वां झील, उस्मान सागर (Osman Sagar / Gandipet) के साथ, यह झील लगभग एक सदी से जुड़वां शहरों के लिए जीवन रेखा के रूप में काम कर रही है।

विशेषताएं और इतिहास

  • इंजीनियरिंग: बांध लगभग 33.8 m ऊंचा है और इसमें 17 गेट हैं। मूल भंडारण क्षमता लगभग 4.25 Tmc ft थी, हालांकि गाद (siltation) के कारण यह अब घटकर लगभग 2.97 Tmc ft रह गई है।
  • सतह क्षेत्र: जलाशय लगभग 4,900 एकड़ (लगभग 20 sq km) में फैला है और Osman Sagar के समानांतर स्थित है। दोनों झीलें सामूहिक रूप से Hyderabad को बाढ़ से बचाती हैं और लाखों निवासियों को पानी की आपूर्ति करती हैं।
  • ऐतिहासिक संदर्भ: झीलों का निर्माण 1908 की बाढ़ के जवाब में किया गया था जिसने Hyderabad को जलमग्न कर दिया था और हजारों लोगों की जान ले ली थी। निर्माण 1920 में शुरू हुआ और 1927 में समाप्त हुआ। बांधों को इंजीनियर ख्वाजा मोइनुद्दीन (Khaja Mohinuddin) के तहत डिज़ाइन किया गया था।
  • पारिस्थितिक और मनोरंजक मूल्य: झील और इसके आसपास की पहाड़ियां पक्षियों और वन्यजीवों के लिए आवास प्रदान करती हैं। दर्शनीय दृश्य इसे नौका विहार, पिकनिक और पक्षी-निहारने (bird‑watching) के लिए एक लोकप्रिय स्थान बनाते हैं। संरक्षणवादियों (Conservationists) ने जलाशय को अतिक्रमण और प्रदूषण से बचाने के लिए अभियान चलाया है।

हालिया पानी छोड़े जाने का महत्व

  • बाढ़ प्रबंधन: गेट खोलने से सुरक्षित जल स्तर बनाए रखने में मदद मिलती है और बांध पर दबाव रुकता है। यह निचले इलाकों (downstream) में अचानक, अनियंत्रित बाढ़ के जोखिम को भी कम करता है।
  • जल आपूर्ति: Himayat Sagar, Hyderabad के लिए पीने के पानी के मुख्य स्रोतों में से एक बना हुआ है। मानसून के मौसम के दौरान आने और जाने वाले पानी का प्रबंधन विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
  • विरासत संरक्षण: भारत की सबसे पुरानी बाढ़ नियंत्रण संरचनाओं में से एक के रूप में, यह झील Hyderabad की इंजीनियरिंग विरासत का हिस्सा है। हालिया घटना नियमित रखरखाव, गाद निकालने (desiltation) और शहरी अतिक्रमण से सुरक्षा की आवश्यकता को उजागर करती है।

निष्कर्ष

Himayat Sagar, Hyderabad के लचीलेपन (resilience) का प्रमाण है। एक विनाशकारी बाढ़ के बाद निर्मित, इसने लगभग एक सदी तक शहर को पानी की आपूर्ति की है और इसकी रक्षा की है। जून 2026 में पानी का नियंत्रित तरीके से छोड़ा जाना यह दर्शाता है कि शहरी सुरक्षा के लिए विचारशील इंजीनियरिंग और सक्रिय प्रबंधन आवश्यक बने हुए हैं। गाद निकालने के माध्यम से झील की क्षमता को बनाए रखना और अतिक्रमण को रोकना यह सुनिश्चित करेगा कि यह ऐतिहासिक जलाशय आने वाली पीढ़ियों के लिए कार्यात्मक (functional) बना रहे।

स्रोत: The New Indian Express

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