चर्चा में क्यों?
मध्य प्रदेश के देवास (Dewas) वन विभाग ने खिवनी वन्यजीव अभयारण्य (Kheoni Wildlife Sanctuary) में सीसीटीवी (CCTV) कैमरों में एक जोड़े को रिकॉर्ड किए जाने के बाद मायावी हनी बेजर (honey badger) (जिसे रैटल - ratel भी कहा जाता है) की उपस्थिति की पुष्टि की। यह दृश्य अभयारण्य की पारिस्थितिक पुनर्प्राप्ति (ecological recovery) को उजागर करता है और इस शायद ही कभी देखे जाने वाले स्तनधारी (mammal) की संरक्षण स्थिति (conservation status) की ओर ध्यान आकर्षित करता है।
पृष्ठभूमि
हनी बेजर (मेलिवोरा कैपेंसिस - Mellivora capensis) नेवले परिवार (weasel family - Mustelidae) से संबंधित एक गठीला मांसाहारी (stocky carnivore) है। इसके शरीर की लंबाई लगभग 60-70 सेंटीमीटर होती है और इसका वजन 8 से 12 किलोग्राम के बीच होता है। इस प्रजाति की विशेषता एक गहरा काला शरीर है जिसमें सिर से पूंछ के आधार तक एक विपरीत ग्रे या सफेद "मेंटल (mantle)" होता है। इसकी मोटी, ढीली त्वचा (loose skin) और शक्तिशाली मांसपेशियां (powerful musculature) इसे बेहद लचीला (resilient) बनाती हैं; ढीली त्वचा जानवर को एक शिकारी (predator) द्वारा पकड़े जाने पर भी मुड़ने और काटने की अनुमति देती है। हनी बेजर उप-सहारा अफ्रीका (sub-Saharan Africa), अरब प्रायद्वीप (Arabian peninsula), भारत और मध्य एशिया के कुछ हिस्सों में जंगलों और घास के मैदानों (grasslands) से लेकर शुष्क सीढ़ीदार (arid steppes) और चट्टानी पहाड़ियों (rocky hills) तक विस्तृत आवासों में निवास करते हैं। वे सर्वाहारी (omnivorous) हैं, कीड़े, छोटे स्तनधारी (mammals), पक्षी, सरीसृप (reptiles) और फल खाते हैं, और अपने निडर (fearless) और दृढ़ स्वभाव (tenacious nature) के लिए जाने जाते हैं।
खिवनी अभयारण्य में दिखने का विवरण
- निडर प्राणी (Fearless creatures): अभयारण्य के अधिकारियों के अनुसार, हनी बेजर की त्वचा (hide) घनी होती है और उनकी मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जो उन्हें बाघ और तेंदुए जैसे बड़े शिकारियों (larger predators) से अपना बचाव (defend) करने में सक्षम बनाती हैं। स्थानीय नाम 'कब्र बिज्जू (qabar bijju)' इस विश्वास को दर्शाता है कि यह जानवर दुर्जेय विरोधियों (formidable opponents) का सामना करने पर भी निडर रहता है।
- कानूनी संरक्षण (Legal protection): विश्व स्तर पर, हनी बेजर को उनके व्यापक वितरण (wide distribution) के कारण आईयूसीएन रेड लिस्ट (IUCN Red List) में "कम से कम चिंता (Least Concern)" के रूप में वर्गीकृत (classified) किया गया है। भारत में उन्हें वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I (Schedule I of the Wildlife (Protection) Act, 1972) के तहत उच्च स्तर की कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है, जो उन्हें बाघों और हाथियों के बराबर रखती है।
- आवास स्वास्थ्य का संकेतक (Indicator of habitat health): यह दृश्य खिवनी वन्यजीव अभयारण्य की बेहतर स्थिति (improved condition) को रेखांकित करता है। कभी जंगल का एक कम ज्ञात हिस्सा रहा यह अभयारण्य, आवास प्रबंधन (habitat management) और अवैध शिकार विरोधी प्रयासों (anti-poaching efforts) के कारण वन्यजीवों के लिए एक संपन्न गलियारा (thriving corridor) बन गया है। बाघ, तेंदुए, हिरण और जंगली सूअर (wild boar) की बढ़ती संख्या एक मजबूत खाद्य श्रृंखला (robust food chain) का संकेत देती है जो हनी बेजर जैसी दुर्लभ प्रजातियों (rare species) का समर्थन करती है।
संरक्षण महत्व
- जागरूकता और अनुसंधान (Awareness and research): हनी बेजर आम तौर पर एकान्त (solitary) और निशाचर (nocturnal) होते हैं, जिससे उनका अध्ययन करना कठिन हो जाता है। उनकी उपस्थिति का दस्तावेजीकरण (Documenting) वैज्ञानिकों को भारत में उनके वितरण (distribution) और व्यवहार (behaviour) को समझने में मदद करता है।
- आवास संपर्क (Habitat connectivity): खिवनी जैसे वन्यजीव गलियारों (wildlife corridors) की सुरक्षा यह सुनिश्चित करती है कि जानवर पेंच (Pench) और सतपुड़ा (Satpura) जैसे बड़े भंडार (reserves) के बीच आ-जा सकें। आनुवंशिक विविधता (genetic diversity) और प्रजातियों के दीर्घकालिक अस्तित्व (long-term species survival) के लिए ऐसी कनेक्टिविटी (connectivity) आवश्यक है।
- सामुदायिक भागीदारी (Community participation): वन्यजीव संरक्षण (wildlife protection), पर्यावरण-पर्यटन (eco-tourism) और देखे जाने की रिपोर्टिंग में स्थानीय समुदायों को शामिल करने से संरक्षण के लिए समर्थन उत्पन्न हो सकता है। अभयारण्य के पास रहने वाले लोग टिकाऊ आजीविका (sustainable livelihoods) और शिक्षा कार्यक्रमों (education programmes) से लाभान्वित होते हैं जो संरक्षण पहल (conservation initiatives) के साथ होते हैं।
स्रोत: Times of India