पर्यावरण

Hussain Sagar Lake: हैदराबाद, शैवाल प्रस्फुटन और सुपोषण

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चर्चा में क्यों?

हैदराबाद के निवासियों ने ऐतिहासिक हुसैन सागर झील (Hussain Sagar Lake) के आसपास तेज दुर्गंध (foul odour) की शिकायत की है। बढ़ते तापमान के कारण शैवाल (algae) का तेज़ी से विकास हुआ है, और परिणामी शैवाल प्रस्फुटन (algal bloom) विघटित होकर अप्रिय गंध छोड़ रहा है। नगर निगम अधिकारी शैवाल को तोड़ने के लिए माइक्रोबियल घोल (microbial solutions) का छिड़काव कर रहे हैं और स्पीडबोट का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन यह घटना झील में लंबे समय से चली आ रही प्रदूषण की समस्याओं को उजागर करती है।

पृष्ठभूमि

हुसैन सागर हैदराबाद और सिकंदराबाद के बीच स्थित एक कृत्रिम झील है। इसकी खुदाई 1562 में सुल्तान इब्राहिम कुली कुतुब शाह (Sultan Ibrahim Quli Qutb Shah) द्वारा की गई थी और इसका नाम इसके निर्माण की देखरेख करने वाले संत हुसैन शाह वली (Hussain Shah Wali) के नाम पर रखा गया था। मूल रूप से जुड़वां शहरों को पीने का पानी और सिंचाई की आपूर्ति करने के लिए मूसी नदी (Musi River) की एक सहायक नदी पर निर्मित, यह तब से एक प्रतिष्ठित स्थल बन गया है। यह झील लगभग 5.7 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है और इसके पश्चिमी किनारे से लगी प्रमुख तटबंध सड़क (embankment road) के कारण इसे अक्सर "टैंक बंड" (Tank Bund) कहा जाता है। 1990 के दशक में झील के केंद्र में जिब्राल्टर द्वीप (Gibraltar Island) पर 16 मीटर ऊंची अखंड बुद्ध प्रतिमा (monolith Buddha statue) स्थापित की गई थी, जिसने इस जल निकाय को एक पर्यटक आकर्षण में बदल दिया। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में, तेज़ शहरीकरण के कारण सीवेज (sewage), औद्योगिक अपशिष्ट (industrial effluents) और तूफानी जल निकासी (storm‑water drains) झील में मिल रही है, जिससे इसके पानी की गुणवत्ता ख़राब हो रही है。

मुख्य तथ्य

  • हुसैन सागर दुनिया की सबसे बड़ी दिल के आकार (heart‑shaped) की झीलों में से एक है और हैदराबाद और सिकंदराबाद को जोड़ती है। यह 1930 तक शहर के लिए पीने के पानी के मुख्य स्रोत के रूप में काम करती थी।
  • झील लगभग 5.7 वर्ग किमी क्षेत्र में है और इसकी अधिकतम गहराई लगभग 32 फीट है। जिब्राल्टर द्वीप पर 18 टन वजनी बुद्ध प्रतिमा है, जो पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को आकर्षित करती है।
  • टैंक बंड (Tank Bund) के किनारे पार्क, मनोरंजन सुविधाएं और उल्लेखनीय तेलुगु लोगों की मूर्तियां हैं, जो इस सैरगाह को एक लोकप्रिय शाम का स्थल बनाते हैं।
  • अनुपचारित सीवेज (Untreated sewage), औद्योगिक अपशिष्ट (industrial effluents) और पोषक तत्वों से भरपूर अपवाह (nutrient‑rich runoff) शैवाल (algae) और जलकुंभी (water hyacinth) के विकास को बढ़ावा देते हैं। जब ये पौधे मर जाते हैं और विघटित हो जाते हैं तो वे ऑक्सीजन की कमी कर देते हैं और दुर्गंधयुक्त गैसें छोड़ते हैं।
  • ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (Greater Hyderabad Municipal Corporation) यूट्रोफिकेशन (eutrophication) को नियंत्रित करने के लिए समय-समय पर एरेटर (aerators), वीड-हार्वेस्टिंग मशीन (weed‑harvesting machines) और माइक्रोबियल उपचार (microbial treatments) तैनात करता है, लेकिन लगातार प्रवाह झील को प्रदूषित करता रहता है।

यह गंध क्यों मायने रखती है

  • तेज़ गंध गंभीर यूट्रोफिकेशन (eutrophication) और कम होते ऑक्सीजन के स्तर को इंगित करती है जो मछलियों और अन्य जलीय जीवन को नुकसान पहुंचाती है।
  • झील न केवल एक मनोरंजन क्षेत्र है बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक भी है। अप्रिय गंध पर्यटन को हतोत्साहित करती है और आसपास के निवासियों के जीवन की गुणवत्ता को कम करती है।
  • शैवाल प्रस्फुटन (Algal blooms) ऐसे विषाक्त पदार्थ उत्पन्न कर सकते हैं जो लोगों और जानवरों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करते हैं, जिससे जल उपचार अधिक महंगा हो जाता है।
  • यह घटना तेज़ी से बढ़ते शहरों में अनुपचारित सीवेज (untreated sewage) को रोकने और अपशिष्ट जल उपचार (wastewater treatment) के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

निष्कर्ष

हुसैन सागर से उठने वाली दुर्गंध गहरी पर्यावरणीय उपेक्षा का एक लक्षण है। झील को बहाल करने के लिए सीवेज के प्रवाह को रोकने, निर्वहन से पहले अपशिष्टों (effluents) के उपचार और दीर्घकालिक झील-प्रबंधन योजनाओं (lake‑management plans) में निवेश करने की आवश्यकता होगी। इस ऐतिहासिक जल निकाय को संरक्षित करना न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यटन के लिए बल्कि हैदराबाद की सांस्कृतिक विरासत के लिए भी आवश्यक है।

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