खबरों में क्यों?
खान मंत्रालय (Ministry of Mines) की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में कहा गया है कि भारत ने उस वर्ष लगभग 1,302 किलोग्राम प्राथमिक सोने (primary gold) का उत्पादन किया, जो 2024-25 की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत कम है। इसमें से लगभग सारा सोना कर्नाटक में राज्य के स्वामित्व वाली हट्टी गोल्ड माइन्स कंपनी लिमिटेड (Hutti Gold Mines Company Ltd - HGML) से आया, जो खदान के महत्व और अयस्क ग्रेड (ore grades) में गिरावट की चुनौतियों दोनों को उजागर करता है।
पृष्ठभूमि और इतिहास
हट्टी (Hutti) भंडार दुनिया की सबसे पुरानी ज्ञात सोने की खदानों में से हैं। पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि खनिकों ने 2,000 साल से भी अधिक समय पहले "फायर-सेटिंग (fire‑setting)" तकनीक का इस्तेमाल किया था, जिसमें चट्टान को आग से गर्म किया जाता था और फिर उसे तोड़ने के लिए पानी डाला जाता था। पुरानी खदानों की लकड़ी की कार्बन डेटिंग (Carbon dating) लगभग 2 सहस्राब्दी पहले खनन गतिविधि का संकेत देती है। 1902 और 1919 के बीच, आधुनिक संचालन ने 19 ग्राम प्रति टन के औसत ग्रेड पर लगभग 7,400 किलोग्राम सोना निकाला। तकनीकी और वित्तीय कठिनाइयों के कारण यह उद्यम 1920 में बंद हो गया।
हैदराबाद की निज़ाम सरकार ने 1937 में अन्वेषण फिर से शुरू किया, और 1947 में राज्य की भागीदारी के साथ हैदराबाद गोल्ड माइन्स कंपनी लिमिटेड का गठन किया गया। उत्पादन 1948 में लगभग 130 टन अयस्क प्रति दिन पर फिर से शुरू हुआ और 1972 तक बढ़कर 600 टन प्रति दिन हो गया। 1956 में राज्यों के पुनर्गठन के बाद, नियंत्रण मैसूर (अब कर्नाटक) को दे दिया गया और कंपनी का नाम बदलकर हट्टी गोल्ड माइन्स लिमिटेड कर दिया गया। दशकों से खदानों ने लगभग 3.86 मिलियन टन अयस्क से 26,000 किलोग्राम से अधिक सोने का उत्पादन किया है। मुख्य भूमिगत खदान अंततः जलभराव (water‑logged) का शिकार हो गई और उसे बंद कर दिया गया, लेकिन अन्य भंडार (lodes) पर काम जारी है।
वर्तमान संचालन
- प्रमुख उत्पादक: HGML प्राथमिक सोने का भारत का एकमात्र प्रमुख उत्पादक है। खान मंत्रालय के अनुसार, 2025-26 में देश के सोने के उत्पादन में कर्नाटक का हिस्सा 92.40 प्रतिशत था, जबकि शेष आंध्र प्रदेश और झारखंड में छोटे संचालनों से आया था।
- एकीकृत प्रक्रियाएं: कंपनी हट्टी में एक ही परिसर में भूमिगत खनन, मिलिंग और रिफाइनिंग का काम करती है। यह पुरानी टेलिंग (tailings) से सोना भी निकालती है।
- चुनौतियां और संभावनाएं: समय के साथ अयस्क ग्रेड में गिरावट आई है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है। केंद्र सरकार ने कर्नाटक में किल्लारहट्टी (Killarhatti) और चिन्नीकट्टी (Chinnikatti) जैसी नई संभावनाओं की खोज को मंजूरी दे दी है। सोने की बढ़ती कीमतों ने राजस्व में सुधार किया है लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता नए भंडारों की खोज पर निर्भर करती है।
महत्व
HGML हजारों लोगों को रोजगार प्रदान करता है और आयातित बुलियन (bullion) पर भारत की निर्भरता को कम करता है। इसका लंबा इतिहास प्राचीन फायर-सेटिंग से लेकर आधुनिक यंत्रीकृत निष्कर्षण (mechanised extraction) तक खनन प्रौद्योगिकी के विकास को दर्शाता है। उत्पादन में हालिया गिरावट टिकाऊ संसाधन प्रबंधन और स्वर्ण क्षेत्र के विविधीकरण (diversification) की आवश्यकता को रेखांकित करती है।