चर्चा में क्यों?
एक नए अध्ययन ने चेतावनी दी है कि उष्णकटिबंधीय (tropics) क्षेत्रों में मैंग्रोव मुहाने (mangrove estuaries) हाइपरकेपनिक हाइपोक्सिया (hypercapnic hypoxia) नामक रासायनिक अवस्था में खिसक रहे हैं, जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का स्तर अधिक होता है और ऑक्सीजन की सांद्रता (concentrations) बहुत कम होती है। शोधकर्ताओं ने 23 साइटों की जांच की और पाया कि यह समस्या पहले से ही व्यापक है और जलवायु के गर्म होने के साथ इसके और तीव्र होने की उम्मीद है। ये परिस्थितियाँ युवा मछलियों, जो मैंग्रोव नर्सरियों पर निर्भर हैं, और तटीय मत्स्य पालन (coastal fisheries) पर निर्भर लाखों लोगों की आजीविका के लिए खतरा हैं।
पृष्ठभूमि
मैंग्रोव उष्णकटिबंधीय तटों और मुहानों के किनारों पर पाए जाते हैं। वे तलछट (sediment) और जैविक पदार्थों (organic matter) को फँसाते हैं, जिससे सड़ने वाले पदार्थों (decaying material) से भरपूर पानी बनता है। जब यह जैविक पदार्थ टूटता है तो यह पानी में CO2 छोड़ता है। कम ज्वार (low tide) पर समुद्र के साथ मिश्रण कम होता है, इसलिए CO2 का स्तर बढ़ सकता है और ऑक्सीजन का स्तर गिर सकता है। उच्च CO2 (हाइपरकेपनिया) और कम ऑक्सीजन (हाइपोक्सिया) का यह संयोजन मछलियों और अन्य जीवों के लिए साँस लेना मुश्किल बना देता है। हाल तक, इस घटना को दुर्लभ माना जाता था, लेकिन वैज्ञानिकों ने अब दिखाया है कि यह नियमित रूप से होता है और पानी के गर्म होने पर यह अधिक सामान्य हो जाएगा।
प्रमुख निष्कर्ष
- व्यापक तनाव (Widespread stress): सर्वेक्षण में पाया गया कि अधिकांश मैंग्रोव साइटों में 34 - 43 प्रतिशत समय हल्का हाइपरकेपनिक हाइपोक्सिया और 6 - 32 प्रतिशत समय गंभीर घटनाएँ (severe events) पहले से ही अनुभव की जाती हैं।
- जलवायु अनुमान (Climate projections): मॉडल किए गए परिदृश्य बताते हैं कि 2100 तक मैंग्रोव के पानी में ऑक्सीजन का स्तर 5 - 35 प्रतिशत तक गिर सकता है जबकि CO2 की सांद्रता 8 - 60 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। चरम घटनाओं (Extreme events) के 15 गुना अधिक लगातार होने की संभावना है और वे लगातार 12 - 24 घंटे तक रह सकती हैं।
- तापमान से संबंध: वार्मिंग (Warming) इस समस्या को बढ़ा देती है; पानी के तापमान में 10 °C की वृद्धि घुलित ऑक्सीजन (dissolved oxygen) को 30 प्रतिशत तक कम कर सकती है और CO2 को 50 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है। हीटवेव (Heatwaves) उस सुरक्षित समय को कम कर देते हैं जिसके दौरान किशोर मछलियाँ (juvenile fish) भोजन और आश्रय के लिए मैंग्रोव में प्रवेश कर सकती हैं।
- मत्स्य पालन पर प्रभाव: मछलियों की जो प्रजातियाँ कम ऑक्सीजन को सहन कर लेती हैं, वे छोटी और कम मूल्यवान होती हैं। बड़ी रीफ-संबंधित प्रजातियों जैसे सिल्वर-बिडी (silver-biddy), सिल्वर ग्रंट (silver grunt) और पिंक-ईयर एम्परर (pink-ear emperor) को उच्च ऑक्सीजन स्तर की आवश्यकता होती है। यदि मैंग्रोव नर्सरी अधिक बार हाइपोक्सिक हो जाती हैं, तो मूल्यवान प्रजातियों में गिरावट आएगी और पकड़ संरचना (catch composition) में बदलाव आएगा।
- सामाजिक-आर्थिक महत्व: मैंग्रोव हर साल प्रति हेक्टेयर लगभग 20,000 अतिरिक्त मछलियों को सहारा देते हैं, जो लगभग 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर प्रति हेक्टेयर की पारिस्थितिक सेवा (ecological service) है। विश्व स्तर पर अनुमानित 4 मिलियन तटीय मछुआरे (coastal fishers) अपनी आजीविका के लिए मैंग्रोव पारिस्थितिक तंत्र पर निर्भर हैं।
महत्व
- पूर्व चेतावनी (Early warning): शोध से पता चलता है कि हाइपरकेपनिक हाइपोक्सिया कोई दूर का खतरा नहीं है बल्कि कई मुहानों में वर्तमान वास्तविकता है। इसे पहचानने से नीति निर्माताओं को मैंग्रोव संरक्षण और बहाली को प्राथमिकता देने में मदद मिलती है।
- कार्रवाई का आह्वान (Call for action): मीठे पानी के प्रवाह (freshwater inflows) का प्रबंधन, पोषक तत्वों के अपवाह (nutrient run-off) को कम करना और मैंग्रोव का संरक्षण करना पानी की गुणवत्ता में सुधार कर सकता है और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम (buffer) कर सकता है। कम-ऑक्सीजन की घटनाओं का पता लगाने और मछलियों के आवास (fish habitats) की रक्षा के लिए निगरानी कार्यक्रमों (monitoring programmes) की आवश्यकता है।
- आजीविका दांव पर: उष्णकटिबंधीय देशों में लाखों लोग मैंग्रोव मत्स्य पालन पर निर्भर हैं। हस्तक्षेप (intervention) के बिना, मछलियों की नर्सरी के काम में गिरावट से खाद्य सुरक्षा (food security) और स्थानीय अर्थव्यवस्थाएं (local economies) कमजोर हो सकती हैं।
स्रोत: Down To Earth