अंतर्राष्ट्रीय संबंध

IAEA: परमाणु ऊर्जा सुरक्षा और अप्रसार

IAEA: परमाणु ऊर्जा सुरक्षा और अप्रसार
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ख़बरों में क्यों?

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (International Atomic Energy Agency - IAEA) ने यूक्रेन (Ukraine) में परमाणु सुरक्षा जोखिमों (nuclear safety risks) को दूर करने के लिए 30 जनवरी 2026 को अपने बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (Board of Governors) की एक विशेष बैठक बुलाई। सदस्य राज्यों (Member states) ने चिंता व्यक्त की कि ऊर्जा बुनियादी ढांचे (energy infrastructure) पर रूसी हमले परमाणु सुविधाओं (nuclear facilities) की सुरक्षा को खतरे में डाल सकते हैं। नीदरलैंड (Netherlands) ने बैठक का अनुरोध किया था, और कई प्रतिनिधिमंडलों ने संघर्ष क्षेत्रों (conflict zones) में मजबूत सुरक्षा उपायों (stronger safeguards) का आह्वान किया।

पृष्ठभूमि

1957 में स्थापित, IAEA वियना, ऑस्ट्रिया में मुख्यालय (headquartered) वाला एक स्वतंत्र संयुक्त राष्ट्र-संबंधित (UN-related) संगठन है। यह राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर (President Dwight Eisenhower) के 1953 के "शांति के लिए परमाणु (Atoms for Peace)" भाषण के जवाब में बनाया गया था, जिसमें परमाणु ऊर्जा पर अंतर्राष्ट्रीय नियंत्रण (international control) का प्रस्ताव था। एजेंसी का मिशन परमाणु प्रौद्योगिकी के सुरक्षित और शांतिपूर्ण उपयोग (peaceful uses) को बढ़ावा देना है, जबकि सैन्य उद्देश्यों (military purposes) के लिए इसके विचलन (diversion) को रोकना है।

जनादेश और कार्य (Mandate and functions)

  • शांतिपूर्ण उपयोग (Peaceful uses): IAEA बिजली उत्पादन, चिकित्सा, कृषि और उद्योग के लिए परमाणु विज्ञान (nuclear science) लागू करने में सदस्य देशों की सहायता करता है। यह तकनीकी सहयोग (technical cooperation), प्रशिक्षण और उपकरण प्रदान करता है।
  • सुरक्षा उपाय और अप्रसार (Safeguards and non-proliferation): निरीक्षण (inspections), ऑडिट और निगरानी के माध्यम से, एजेंसी यह सत्यापित करती है कि परमाणु हथियारों का उत्पादन करने के लिए परमाणु सामग्री और सुविधाओं का उपयोग नहीं किया जाता है। राज्यों के साथ सुरक्षा समझौते (Safeguard agreements) IAEA को अघोषित परमाणु गतिविधियों (undeclared nuclear activities) का पता लगाने में सक्षम बनाते हैं।
  • परमाणु सुरक्षा (Nuclear safety and security): एजेंसी सुरक्षा मानकों (safety standards) को विकसित करती है और लोगों और पर्यावरण को विकिरण के खतरों (radiation hazards) से बचाने के उपाय लागू करने में देशों का समर्थन करती है। यह आपात स्थिति (emergencies) का जवाब भी देती है और चेरनोबिल (Chernobyl) और फुकुशिमा (Fukushima) जैसी दुर्घटनाओं के बाद सूचना साझाकरण (information sharing) की सुविधा प्रदान करती है।

हाल के घटनाक्रम

  • यूक्रेन संकट (Ukraine crisis): जनवरी 2026 की बैठक में, IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी (Rafael Grossi) ने परमाणु संयंत्रों में ऑफ-साइट बिजली (off-site power) बनाए रखने और बैकअप जल आपूर्ति (backup water supply) सुरक्षित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रतिनिधियों ने एजेंसी के निर्णय लेने वाले निकायों (decision-making bodies) के भीतर आक्रामक राज्यों (aggressor states) के अधिकारों को प्रतिबंधित करने के प्रस्तावों पर बहस की।
  • ईरान का परमाणु कार्यक्रम (Iran’s nuclear programme): "E3" (फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम) के सदस्यों ने सुरक्षा दायित्वों (safeguards obligations) के साथ ईरान के गैर-अनुपालन (non-compliance) के बारे में चिंताओं को दोहराया और राजनयिक समाधान (diplomatic solutions) का आग्रह किया। उन्होंने ईरान से निरीक्षकों (inspectors) के साथ सहयोग करने और उन कदमों को उलटने का आह्वान किया जो सुविधाओं तक पहुंच को सीमित करते हैं।
  • सुरक्षा उपायों को मजबूत करना: संकट की स्थितियों से परे, IAEA अपनी सत्यापन प्रौद्योगिकियों (verification technologies) को आधुनिक बनाने और नए रिएक्टर प्रकारों (new reactor types) और उभरते परमाणु अनुप्रयोगों (emerging nuclear applications) को कवर करने के लिए अपने सुरक्षा मानकों (safety standards) के दायरे को चौड़ा करने के लिए काम कर रहा है।

महत्व

  • अप्रसार (Non-proliferation): राष्ट्रों के बीच पारदर्शिता (transparency) और विश्वास सुनिश्चित करके परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने में IAEA एक केंद्रीय भूमिका निभाता है।
  • सुरक्षित परमाणु विस्तार (Safe nuclear expansion): चूंकि अधिक देश परमाणु ऊर्जा (nuclear power) और चिकित्सा समस्थानिकों (medical isotopes) को अपनाते हैं, एजेंसी का मार्गदर्शन और निरीक्षण दुर्घटनाओं और पर्यावरणीय नुकसान को कम करने में मदद करता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग (International cooperation): IAEA सदस्य देशों के बीच बातचीत (dialogue) की सुविधा प्रदान करता है, संकट के दौरान सामूहिक कार्रवाई (collective action) को बढ़ावा देता है और शांतिपूर्ण वैज्ञानिक आदान-प्रदान (peaceful scientific exchange) को प्रोत्साहित करता है।

स्रोत: DEVD

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