कला और संस्कृति

इचाक: मंदिरों का शहर, झारखंड की विरासत

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समाचार में क्यों?

झारखंड में हजारीबाग के पास एक ऐतिहासिक शहर इचाक (Ichak), विरासत संरक्षण (heritage conservation) की मांग के कारण सुर्खियों में आया है। कभी दर्जनों मंदिरों और शाही संरचनाओं का घर रहा यह शहर, उपेक्षा और अतिक्रमण (encroachment) के कारण अपनी इमारतों को खोता जा रहा है।

पृष्ठभूमि

हजारीबाग से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित इचाक, 18वीं और 19वीं शताब्दी में रामगढ़ राज (सिंह) राजवंश (Ramgarh Raj (Singh) dynasty) की राजधानी था। शासकों ने कई मंदिरों, तालाबों और उद्यानों का निर्माण किया। स्थानीय वृत्तांतों से पता चलता है कि शहर में कभी विभिन्न देवताओं को समर्पित लगभग 174 मंदिर थे। सिंह द्वार (Singh Dwar) के नाम से जाने जाने वाले महल परिसर का प्रवेश द्वार आज भी इसके पूर्व भव्यता (grandeur) के प्रमाण के रूप में खड़ा है।

वर्तमान स्थिति

  • बाबा बंशीधर (Baba Banshidhar), भैरवनाथ (Bhairavnath) और बुढ़िया माता (Budhiya Mata) जैसे कई मंदिर संरचनात्मक क्षति (structural damage), मूर्तियों की कमी और बर्बरता (vandalism) से पीड़ित हैं।
  • राजाओं द्वारा बनाए गए तालाबों और उद्यानों पर अतिक्रमण कर लिया गया है या कचरे से भर दिया गया है। विरासत संरचनाओं में रखरखाव और साइनेज (signage) का अभाव है।
  • स्थानीय लोग और संरक्षणवादी (conservationists) मांग करते हैं कि इचाक को संरक्षित विरासत क्षेत्र (protected heritage zone) घोषित किया जाए और व्यवस्थित जीर्णोद्धार (systematic restoration) किया जाए। प्रमुख मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए कुछ धन स्वीकृत किया गया है।
  • उपेक्षा के बावजूद, यह शहर अभी भी धार्मिक त्योहारों और मेलों के दौरान आगंतुकों को आकर्षित करता है। इसकी विरासत को पुनर्जीवित करने के प्रयासों से पर्यटन और आजीविका को बढ़ावा मिल सकता है।

महत्व

इचाक सिंह शासकों की स्थापत्य शैली (architectural style) और सांस्कृतिक प्रथाओं को दर्शाता है। इसके मंदिरों और जल निकायों को संरक्षित करने से क्षेत्रीय इतिहास की रक्षा होगी और झारखंड में हेरिटेज पर्यटन (heritage tourism) के अवसर मिलेंगे।

स्रोत: TOI
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