चर्चा में क्यों?
भारत और मिस्र (Egypt) ने 20-22 अप्रैल 2026 तक काहिरा (Cairo) में अपनी 11वीं संयुक्त रक्षा समिति (Joint Defence Committee) की बैठक आयोजित की। प्रतिनिधिमंडलों (delegations) ने पिछली बैठक के बाद की प्रगति की समीक्षा की और 2026-27 के लिए एक सहयोग योजना (cooperation plan) पर सहमति व्यक्त की। यह बैठक दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी (strategic partnership) को रेखांकित करती है।
पृष्ठभूमि
मिस्र पूर्वोत्तर अफ्रीका (northeast Africa) और दक्षिण-पश्चिम एशिया (southwest Asia) को जोड़ने वाला एक अंतरमहाद्वीपीय (transcontinental) देश है। इसकी सीमा उत्तर में भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) और पूर्व में लाल सागर (Red Sea) से लगती है और यह लीबिया (Libya), सूडान (Sudan), इज़राइल (Israel) और गाजा पट्टी (Gaza Strip) के साथ भूमि सीमाएं साझा करता है। इसकी 100 मिलियन से अधिक आबादी का अधिकांश हिस्सा नील नदी (Nile River) के किनारे रहता है, जो दक्षिण से उत्तर की ओर लगभग 6,650 किलोमीटर तक बहती है। देश का क्षेत्रफल (area) लगभग 1 मिलियन वर्ग किलोमीटर है, जिसमें अधिकांश भूभाग (terrain) में रेगिस्तान (desert) है जो उपजाऊ नील घाटी (fertile Nile Valley) और डेल्टा (Delta) से घिरा हुआ है। मिस्र की जलवायु शुष्क (arid) है जिसमें गर्म ग्रीष्मकाल (hot summers) और हल्की सर्दियाँ (mild winters) होती हैं; बारिश (rainfall) कम होती है, जिससे नील नदी कृषि (agriculture) के लिए आवश्यक हो जाती है। अर्थव्यवस्था विविध (diverse) है, जिसमें कृषि, पर्यटन (tourism), विनिर्माण (manufacturing) और सेवाएं (services) शामिल हैं, और यह स्वेज नहर (Suez Canal) और पेट्रोलियम (petroleum) संसाधनों जैसी रणनीतिक संपत्तियों (strategic assets) से लाभान्वित होती है।
संयुक्त रक्षा समिति की बैठक के मुख्य अंश
- विस्तारित सहयोग योजना: दोनों पक्षों ने 2026-27 के लिए एक रक्षा सहयोग कार्यक्रम (defence cooperation programme) पर सहमति व्यक्त की, जो संयुक्त उत्पादन (joint production) और प्रौद्योगिकी, संरचित सैन्य आदान-प्रदान (structured military exchanges), समुद्री सुरक्षा सहयोग (maritime security cooperation) और अधिक जटिल सैन्य अभ्यासों (complex military exercises) पर केंद्रित है। उन्होंने संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों (joint training programmes) और ज्ञान साझाकरण (knowledge sharing) को मजबूत करने का भी निर्णय लिया।
- औद्योगिक सहयोग (Industrial collaboration): भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भारत के रक्षा विनिर्माण (defence manufacturing) के विकास को प्रस्तुत किया, जिसमें कहा गया कि उत्पादन 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर गया है और 100 से अधिक देशों को निर्यात (exports) लगभग 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। दोनों पक्षों ने सह-विकास (co-development) और सह-उत्पादन (co-production) के अवसरों का पता लगाने के लिए रक्षा उद्योग सहयोग योजना (defence industry cooperation plan) विकसित करने पर चर्चा की।
- नौसेना और वायु सेना की व्यस्तता (Naval and air force engagements): बैठक के मौके पर उद्घाटन नौसेना-से-नौसेना कर्मचारी वार्ता (Navy-to-Navy staff talks) आयोजित की गई। हिंद महासागर (Indian Ocean) में नौवहन की स्वतंत्रता (freedom of navigation) को बढ़ावा देने में भारतीय नौसेना की भूमिका और हिंद महासागर क्षेत्र के लिए भारत के सूचना संलयन केंद्र (Information Fusion Centre) की गतिविधियों पर प्रकाश डाला गया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने चल रहे सहयोग पर चर्चा करने के लिए मिस्र की वायु सेना (Egyptian Air Force) के कमांडर (Commander) से भी मुलाकात की।
- विरासत और कूटनीति (Heritage and diplomacy): प्रतिनिधिमंडल ने प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध (World Wars I and II) में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को सम्मानित करने के लिए हेलियोपोलिस युद्ध स्मारक (Heliopolis War Memorial) पर पुष्पांजलि अर्पित की। दोनों देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता (regional security and stability) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता (commitment) की पुष्टि की। भारत और मिस्र ने 2022 में रक्षा सहयोग (defence cooperation) पर एक समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding) पर हस्ताक्षर किए और 2023 में इस रिश्ते को रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) में अपग्रेड किया गया।
स्रोत: The Hindu