चर्चा में क्यों?
अल नीनो घटना (El Niño phenomenon) से जुड़े लंबे समय तक सूखे (prolonged drought) के कारण भोजन की कमी (food shortages) को कम करने में मदद करने के लिए भारत ने मलावी गणराज्य (Republic of Malawi) को 1,000 मीट्रिक टन (metric tonnes) चावल भेजा है। शिपमेंट मानवीय संकटों (humanitarian crises) के दौरान ग्लोबल साउथ (Global South) में साथी देशों की सहायता करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
पृष्ठभूमि
मलावी दक्षिण-पूर्वी अफ्रीका (southeastern Africa) में एक लैंडलॉक देश (landlocked country) है। यह ग्रेट रिफ्ट वैली (Great Rift Valley) के साथ फैला है और इसके उत्तर और उत्तर-पूर्व में तंजानिया (Tanzania), पूर्व और दक्षिण में मोजाम्बिक (Mozambique) और पश्चिम में जाम्बिया (Zambia) है। मलावी झील (Lake Malawi), देश के पांचवें हिस्से पर कब्जा करती है, इसकी पूर्वी सीमा पर हावी है और मछली और मीठे पानी का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। आबादी बड़े पैमाने पर ग्रामीण है और कृषि (agriculture) पर निर्भर है, जिसमें मक्का (maize) प्रमुख फसल है। बार-बार सूखा (droughts) और बाढ़ (floods) देश को खाद्य असुरक्षा (food insecurity) के प्रति संवेदनशील बनाते हैं।
2025-26 के कृषि मौसम के दौरान, गंभीर अल नीनो-प्रेरित सूखे ने पूरे दक्षिणी अफ्रीका (southern Africa) में मक्के (maize) की फसल को नुकसान पहुंचाया। मलावी ने आपदा की स्थिति (state of disaster) घोषित करने के बाद अंतरराष्ट्रीय सहायता का अनुरोध किया। भारत ने चावल भेजकर जवाब दिया, जिसे मलावी के आपदा प्रबंधन मामलों के विभाग (Department of Disaster Management Affairs) के माध्यम से वितरित किया जाएगा। यह इशारा "वसुधैव कुटुम्बकम" (Vasudhaiva Kutumbakam - दुनिया एक परिवार है) के मंत्र के तहत विकासशील देशों के साथ संसाधनों (resources) को साझा करने की भारत की व्यापक नीति पर आधारित है, विशेष रूप से संकटों के दौरान।
मुख्य बिंदु और महत्व
- मानवीय सहायता (Humanitarian aid): चावल का शिपमेंट अगली फसल तक भोजन की कमी का सामना कर रहे घरों को तत्काल राहत प्रदान करता है।
- राजनयिक सद्भावना (Diplomatic goodwill): भारत की सहायता मलावी के साथ द्विपक्षीय संबंधों (bilateral relations) को मजबूत करती है और विकासशील देशों (developing nations) के बीच अपनी नेतृत्व की भूमिका को मजबूत करती है।
- मलावी के भूगोल से सबक: लैंडलॉक होने और वर्षा आधारित कृषि (rain‑fed agriculture) पर निर्भर होने के कारण मलावी विशेष रूप से जलवायु परिवर्तनशीलता (climate variability) के प्रति संवेदनशील है। इसके दीर्घकालिक लचीलेपन के लिए टिकाऊ जल प्रबंधन (Sustainable water management) और फसलों का विविधीकरण (diversification of crops) महत्वपूर्ण है।
- व्यापक संदर्भ: भारत ने अल नीनो से प्रभावित अन्य अफ्रीकी देशों को भी इसी तरह का समर्थन बढ़ाया है, जो ग्लोबल साउथ के साथ एकजुटता को दर्शाता है।
स्रोत: News On Air, Britannica