चर्चा में क्यों?
व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग (Trade, Economic, Scientific and Technical Cooperation) पर भारत-ताजिकिस्तान संयुक्त आयोग (India–Tajikistan Joint Commission) की 12वीं बैठक 10 जून 2026 को आयोजित की गई थी। दोनों देशों के अधिकारियों ने व्यापार, निवेश और बाजार पहुंच (market access) बढ़ाकर राजनीतिक सद्भावना को ठोस आर्थिक परिणामों में बदलने के तरीकों पर चर्चा की। फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, सेवाओं, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने के लिए एक प्रोटोकॉल (protocol) पर हस्ताक्षर किए गए।
पृष्ठभूमि
ताजिकिस्तान मध्य एशिया (Central Asia) में एक लैंडलॉक (landlocked) देश है। पामीर और अलौ पर्वतमाला (Pamir and Alay mountain ranges) के वर्चस्व वाले इस देश की आबादी लगभग 10 मिलियन है और इसकी एक छोटी, विकासशील अर्थव्यवस्था है। 1991 में सोवियत संघ (Soviet Union) से स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद से, देश ने क्षेत्रीय पड़ोसियों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखते हुए सुधार किए हैं। इसके प्रमुख उद्योगों में एल्यूमीनियम उत्पादन, सीमेंट, जल विद्युत (hydropower) और कृषि शामिल हैं।
भारत और ताजिकिस्तान ऐतिहासिक और सांस्कृतिक बंधन साझा करते हैं और उन्होंने सुरक्षा, जल प्रबंधन और विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया है। 1995 में स्थापित संयुक्त आयोग द्विपक्षीय सहयोग के लिए प्रगति की समीक्षा करने और नए लक्ष्य निर्धारित करने के लिए समय-समय पर बैठक करता है।
12वीं बैठक की मुख्य बातें
- व्यापार विस्तार (Trade expansion): 2025-26 में ताजिकिस्तान को भारत का निर्यात 27% से अधिक बढ़ गया, जिसमें प्रमुख वस्तुएं दवा निर्माण (drug formulations), दालें, मशीनरी और बिजली के उपकरण थे। आयोग नियामक बाधाओं (regulatory hurdles) को कम करने और कपड़ा, आईटी सेवाओं और पर्यटन जैसे व्यापार के लिए नए क्षेत्रों का पता लगाने पर सहमत हुआ।
- फार्मास्यूटिकल्स और कृषि (Pharmaceuticals and agriculture): ताजिकिस्तान ने अधिक भारतीय फार्मास्यूटिकल्स और कृषि उत्पाद खरीदने में रुचि व्यक्त की। बीज उत्पादन (seed production), सिंचाई और खाद्य प्रसंस्करण में संयुक्त पहलों पर चर्चा की गई।
- ऊर्जा और खनन (Energy and mining): दोनों पक्षों ने जलविद्युत परियोजनाओं, नवीकरणीय ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों (critical minerals) के खनन में सहयोग का प्रस्ताव रखा। भारत ने ताजिकिस्तान के समृद्ध जल संसाधनों को विकसित करने के लिए तकनीकी सहायता और निवेश की पेशकश की।
- कनेक्टिविटी और डिजिटल अर्थव्यवस्था (Connectivity and digital economy): इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (International North–South Transport Corridor) और ईरान के चाबहार बंदरगाह (Chabahar port) तक पहुंच सहित क्षेत्रीय गलियारों के माध्यम से कनेक्टिविटी बढ़ाना वार्ता में शामिल था। शिक्षा, आईटी और डिजिटल सेवाओं में सहयोग पर भी प्रकाश डाला गया।
महत्व
भारत के लिए, ताजिकिस्तान के साथ गहरे संबंध मध्य एशियाई बाजारों (Central Asian markets) के लिए रास्ते खोलते हैं और ऊर्जा सुरक्षा (energy security) को मजबूत करते हैं। ताजिकिस्तान के लिए, भारतीय निवेश और विशेषज्ञता इसकी अर्थव्यवस्था में विविधता लाने और बुनियादी ढांचे में सुधार करने में मदद कर सकती है। बैठक के परिणाम लंबे समय से चली आ रही दोस्ती को ठोस आर्थिक लाभ में बदलने की दोनों देशों की इच्छा को दर्शाते हैं।
निष्कर्ष
फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करके, संयुक्त आयोग ने व्यापक आधारित सहयोग (broad-based cooperation) की नींव रखी है। सतत संवाद और सहमत परियोजनाओं का कार्यान्वयन प्रगति की गति निर्धारित करेगा।