पर्यावरण

भारतीय विशाल उड़न गिलहरी: पैटागियम, ग्लाइडिंग और आवास

भारतीय विशाल उड़न गिलहरी: पैटागियम, ग्लाइडिंग और आवास

चर्चा में क्यों?

वन कर्मचारियों ने उत्तराखंड में रामनगर के पास एक बड़ी उड़ने वाली गिलहरी को बचाया। ग्रामीणों ने इसे टेड़ा गांव में घरों के पास रात में देखा था। अधिकारियों ने इसकी पहचान भारतीय विशाल उड़न गिलहरी (Indian Giant Flying Squirrel) के रूप में की। रिपोर्टों ने इसे लगभग बारह वर्षों में क्षेत्र का पहला दृश्य बताया।

पृष्ठभूमि

भारतीय विशाल उड़न गिलहरी पेड़ों पर रहने वाला एक बड़ा कृंतक (rodent) है, और इसका वैज्ञानिक नाम Petaurista philippensis है।

यह गिलहरी परिवार Sciuridae और कृंतक (Rodentia) क्रम से संबंधित है। प्रजाति को बड़ी भूरी उड़ने वाली गिलहरी भी कहा जाता है।

अपने नाम के बावजूद, यह संचालित उड़ान (powered flight) नहीं कर सकती है, और यह ऊंचाई से छलांग लगाने के बाद पेड़ों के बीच नीचे की ओर ग्लाइड (glide) करती है।

यह ग्लाइड कैसे करती है?

एक चौड़ी त्वचा की झिल्ली इसके अग्रभाग (forelimbs) और पश्चभाग (hind limbs) को जोड़ती है, और इस झिल्ली को पैटागियम (patagium) कहा जाता है।

गिलहरी छलांग लगाने के बाद चारों अंगों को फैलाती है, और फैली हुई झिल्ली फिर लिफ्ट (lift) बनाती है और इसके गिरने को धीमा करती है।

इसकी लंबी पूंछ संतुलन, दिशा और उतरने में मदद करती है, और जब यह दूसरे पेड़ के तने पर पहुंचती है तो पंजे पकड़ प्रदान करते हैं।

स्थानीय रिपोर्ट में साठ से अस्सी मीटर की ग्लाइड का उल्लेख है, और वास्तविक दूरी ऊंचाई, हवा और पेड़ की दूरी के साथ बदलती है।

याद रखें: उड़ने वाली गिलहरियाँ एक पैटागियम का उपयोग करके ग्लाइड करती हैं, और जीवित स्तनधारियों में केवल चमगादड़ ही निरंतर संचालित उड़ान प्राप्त करते हैं।

प्रजाति कहाँ रहती है?

इसकी विस्तृत श्रृंखला दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों को कवर करती है, और दक्षिणी और मध्य चीन में भी आबादी पाई जाती है।

यह शुष्क पर्णपाती वन (dry deciduous forest), सदाबहार वन और कुछ वृक्षारोपणों पर कब्जा करती है, और बड़े पेड़ और जुड़ी हुई छतरी (connected canopy) विशेष रूप से महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

भारतीय रिकॉर्ड कई वन क्षेत्रों से आते हैं, और उत्तराखंड की रिपोर्टों में रानीखेत, लैंसडाउन, पिथौरागढ़, चकराता और मसूरी परिदृश्य शामिल हैं।

एशियाई विशाल उड़न गिलहरियों के भीतर वर्गीकरण जटिल बना हुआ है, और आनुवंशिक अनुसंधान के बाद समान दिखने वाली आबादी को अलग तरह से माना जा सकता है।

यह कैसे रहती है?

  • यह मुख्य रूप से निशाचर (nocturnal) है और सूर्यास्त के बाद सक्रिय हो जाती है।
  • यह अपना अधिकांश समय जंगल की छतरी (forest canopy) में बिताती है।
  • यह पेड़ों के उपयुक्त खोखले हिस्सों के अंदर आराम करती है और प्रजनन करती है।
  • इसके आहार में फल, पत्ते, छाल, अंकुर और रेजिन (resins) शामिल हैं।
  • यह कुछ कीड़े और लार्वा भी खा सकती है।
  • पेड़ों के बीच की खाई को पार करते समय ग्लाइडिंग से ऊर्जा की बचत होती है।

रात की गतिविधि और उच्च छतरी का उपयोग अवलोकन को कठिन बना देता है, और एक प्रजाति लगातार मानव दृश्यों के बिना स्थानीय रूप से मौजूद हो सकती है।

रामनगर के पास वास्तव में क्या हुआ?

निवासियों ने टेड़ा गांव में घरों के पास जानवर को देखा। गांव कार्बेट के पास व्यापक रामनगर वन परिदृश्य के भीतर स्थित है।

वन कर्मी मौके पर पहुंचे और जानवर को बचाया। स्थानीय अधिकारियों ने तब इसकी उपस्थिति और ग्लाइडिंग झिल्ली से इसकी पहचान की।

बारह साल का बयान स्थानीय क्षेत्र से संबंधित है, और इसका मतलब यह नहीं है कि उत्तराखंड में बारह वर्षों तक प्रजाति का अभाव था।

साक्ष्य चेतावनी: पहचान स्थानीय वन अधिकारियों और समाचार रिपोर्टिंग से आई। कोई आनुवंशिक पुष्टि की सूचना नहीं मिली।

क्या यह भारतीय विशाल गिलहरी (Indian Giant Squirrel) के समान है?

भारतीय विशाल गिलहरी एक अलग प्रजाति है, जिसका वैज्ञानिक नाम Ratufa indica है।

उस जानवर को मालाबार विशाल गिलहरी (Malabar Giant Squirrel) भी कहा जाता है, और यह शाखाओं के माध्यम से चलती है लेकिन इसमें ग्लाइडिंग झिल्ली का अभाव होता है।

दोनों जानवर जंगल और बड़े शरीर के आकार को साझा करते हैं, और उनके अलग-अलग वैज्ञानिक नाम और गति के तरीके भ्रम को रोकते हैं।

इसकी संरक्षण स्थिति क्या है?

प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ (International Union for Conservation of Nature) भारतीय विशाल उड़न गिलहरी का आकलन कम से कम चिंता (Least Concern) के रूप में करता है।

यह श्रेणी इसकी व्यापक समग्र सीमा को दर्शाती है, और इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्थानीय आबादी आम है या बढ़ रही है।

जंगल का नुकसान सड़कों और खेतों के बीच समूहों को अलग कर सकता है, और शिकार और पुराने खोखले पेड़ों को हटाने से और दबाव बनता है।

सावधानी से चुने गए सड़क क्रॉसिंग पर छतरी पुल (Canopy bridges) मदद कर सकते हैं। हालाँकि, निरंतर प्राकृतिक जंगल की रक्षा करना एक मजबूत दीर्घकालिक समाधान प्रदान करता है।

देखना क्यों मायने रखता है?

रिकॉर्ड टेड़ा के पास जीवित छतरी आवास का संकेत दे सकता है, और अनुवर्ती कैमरा सर्वेक्षण (follow-up camera surveys) यह परीक्षण कर सकते हैं कि क्या अधिक व्यक्ति आस-पास हैं।

शोधकर्ताओं को पेड़ों के खोखले, भोजन के पेड़ों और आवाजाही के रास्तों की जांच करनी चाहिए, और रात के सर्वेक्षणों में ऐसे तरीकों की आवश्यकता होती है जो गड़बड़ी को कम करें।

जुड़ी हुई छतरी की रक्षा करना इस गिलहरी के साथ-साथ हॉर्नबिल (hornbills), प्राइमेट (primates) और कई अन्य पेड़ों पर रहने वालों को लाभान्वित करता है।

निष्कर्ष

रामनगर रिकॉर्ड स्थानीय रूप से उत्साहजनक है लेकिन इसके लिए अनुवर्ती साक्ष्य की आवश्यकता है। पुराने पेड़ों और छतरी लिंक की रक्षा करना केंद्रीय कार्य बना हुआ है।

स्रोत

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