पर्यावरण

Indian Softshell Turtle: निल्सोनिया गैंगेटिका, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और वन्यजीव व्यापार

Indian Softshell Turtle: निल्सोनिया गैंगेटिका, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और वन्यजीव व्यापार

खबरों में क्यों?

उत्तर प्रदेश के वन्यजीव अधिकारियों (Wildlife officers) ने ग्रेटर नोएडा (Greater Noida) में एक वाहन को रोका और 16 Indian softshell turtles को बचाया, जिन्हें काले बाजार (black market) में बिक्री के लिए तस्करी (smuggle) किया जा रहा था। सरीसृपों (reptiles) को जब्त कर लिया गया और बाद में जंगल में छोड़ दिया गया, जबकि तस्कर को गिरफ्तार कर लिया गया और भारत के वन्यजीव कानूनों के तहत आरोप लगाए गए।

पृष्ठभूमि

Indian softshell turtle (Nilssonia gangetica) भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और अफगानिस्तान में गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, नर्मदा और महानदी जैसी प्रमुख नदी प्रणालियों में पाया जाने वाला एक बड़ा मीठे पानी का कछुआ है। इसका एक चमड़े जैसा कारपेस (leathery carapace) होता है जो 94 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है और एक लंबी गर्दन तथा स्नोर्कल (snorkel) की तरह थूथन (snout) होता है। प्रकृति से मांसाहारी (Carnivorous), यह मछलियों, मोलस्क (molluscs) और सड़े-गले मांस (carrion) को खाता है। इस प्रजाति को IUCN Red List में Endangered (लुप्तप्राय) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है और इसे भारत के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I (Schedule I) के तहत संरक्षित किया गया है, जो कानूनी सुरक्षा का उच्चतम स्तर प्रदान करता है।

खतरे और व्यापार

  • अवैध व्यापार (Illegal trade): सॉफ्टशेल कछुओं को उनके मांस और कथित औषधीय गुणों (medicinal properties) के लिए महत्व दिया जाता है। शिकारी इन्हें नदियों और आर्द्रभूमियों (wetlands) से इकट्ठा करते हैं और पड़ोसी राज्यों और विदेशों के बाजारों में ले जाते हैं, जहां इनकी भारी कीमत मिलती है। संगठित तस्करी नेटवर्क अक्सर एक बार में दर्जनों कछुओं का परिवहन करते हैं।
  • आवास का नुकसान (Habitat loss): प्रदूषण, बांध निर्माण, रेत खनन और नदी तट अतिक्रमण कछुओं के प्रजनन और धूप सेंकने (basking) के आवासों को कम करते हैं। नदियों में पानी के कम होने से उनकी आबादी पर और अधिक दबाव पड़ता है।
  • आबादी में गिरावट: धीमी परिपक्वता (Slow maturation) और लंबे जीवनकाल का अर्थ है कि वयस्क कछुओं का शिकार उनके प्रजनन उत्पादन (reproductive output) को काफी कम कर देता है। प्रभावी प्रवर्तन (effective enforcement) और आवास संरक्षण (habitat conservation) के बिना, आबादी में गिरावट जारी रह सकती है।

बचाव अभियान का महत्व

  • वन्यजीव कानूनों को लागू करना: यह अभियान अवैध वन्यजीव व्यापार (illegal wildlife trade) पर अंकुश लगाने में पुलिस और वन अधिकारियों की सतर्कता को प्रदर्शित करता है। तस्करों की गिरफ्तारी और संरक्षित प्रजातियों की जब्ती एक निवारक (deterrent) का काम करती है।
  • लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाना: कछुओं को उपयुक्त आवासों (suitable habitats) में वापस छोड़कर, अधिकारी उन्हें जीवित रहने और प्रजनन करने का अवसर देते हैं, जो प्रजातियों के संरक्षण में योगदान देता है।
  • जन जागरूकता: ऐसे बचावों का मीडिया कवरेज नदी तटीय जैव विविधता (riverine biodiversity) के महत्व के बारे में जनता को शिक्षित करता है और लोगों को अवैध शिकार की घटनाओं (poaching incidents) की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

निष्कर्ष

ग्रेटर नोएडा में Indian softshell turtles की बरामदगी मीठे पानी के जीवों के सामने आने वाले खतरों की याद दिलाती है। इस प्राचीन प्रजाति की रक्षा करने और भारत की संरक्षण प्रतिबद्धताओं को बनाए रखने के लिए मजबूत प्रवर्तन (enforcement), सामुदायिक सतर्कता (community vigilance) और आवास सुरक्षा (habitat protection) आवश्यक है।

स्रोत: The Indian Express, Indian softshell turtle – Wikipedia

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