Defence (रक्षा)

INS Aridhaman SSBN: भारतीय नौसेना, परमाणु त्रय और बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी

INS Aridhaman SSBN: भारतीय नौसेना, परमाणु त्रय और बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी

समाचारों में क्यों?

3 अप्रैल 2026 को भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने विशाखापत्तनम में अपनी दूसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (nuclear-powered ballistic missile submarine - SSBN), आईएनएस अरिधमन (INS Aridhaman) को कमीशन (commissioned) किया。 यह शामिल होना एक विश्वसनीय समुद्र-आधारित परमाणु निवारक (sea-based nuclear deterrent) के लिए भारत की खोज में एक प्रमुख मील का पत्थर है।

पृष्ठभूमि

भारत की परमाणु रणनीति विश्वसनीय न्यूनतम निवारक (credible minimum deterrence) और पहले उपयोग न करने की नीति (no-first-use policy) पर जोर देती है。 समुद्र-आधारित निवारक एक उत्तरजीवी दूसरी-स्ट्राइक क्षमता (survivable second-strike capability) सुनिश्चित करता है, जो भूमि-, हवा- और समुद्र-प्रक्षेपित हथियारों (sea-launched weapons) के परमाणु त्रय (nuclear triad) को पूरा करता है。 पहली SSBN, INS अरिहंत (Arihant), 2009 में लॉन्च की गई थी और 2016 में कमीशन की गई थी。 INS अरिधमन (जिसे S4 के रूप में भी जाना जाता है) 'उन्नत प्रौद्योगिकी पोत (Advanced Technology Vessel)' परियोजना के तहत कम से कम चार नियोजित नावों में से दूसरी है।

विशेषताएं और क्षमताएं (Features and capabilities)

  • इसका विस्थापन (Displacement) लगभग 7,000 टन है, जो इसे अरिहंत से थोड़ा बड़ा बनाता है।
  • यह 83 मेगावाट के दबाव वाले जल रिएक्टर (pressurised water reactor) द्वारा संचालित है जो इसे महीनों तक जलमग्न (submerged) रहने की अनुमति देता है।
  • यह आठ ऊर्ध्वाधर लॉन्च ट्यूबों (vertical launch tubes) से लैस है जो 24 K-15 (कम दूरी की) या आठ K-4 (मध्यम दूरी की) पनडुब्बी-प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइलों (submarine-launched ballistic missiles) को ले जाने में सक्षम है।
  • उन्नत सोनार (sonar), संचार प्रणाली (communication systems) और ध्वनि-अवशोषित टाइलें (sound-damping tiles) इसकी स्टील्थ (stealth) और उत्तरजीविता (survivability) में सुधार करती हैं।
  • स्वदेशी (Indigenously) रूप से डिजाइन और निर्मित, यह परमाणु पनडुब्बी निर्माण में भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

महत्व

  • दो परिचालन SSBN (operational SSBNs) होने से यह सुनिश्चित होता है कि कम से कम एक पनडुब्बी हमेशा निवारक गश्त (deterrent patrol) पर रह सकती है, जो परमाणु त्रय को मजबूत करती है।
  • यह कार्यक्रम आगामी S4* और S5 श्रेणी की पनडुब्बियों के लिए तकनीकी विशेषज्ञता का निर्माण करता है, जिससे भारत रणनीतिक प्लेटफार्मों में आत्मनिर्भरता (self-sufficiency) की ओर बढ़ता है।

स्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स (Economic Times) · इंडिया टुडे (India Today)

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