Defence

INS Taragiri: प्रोजेक्ट 17A स्टेल्थ फ्रिगेट, भारतीय नौसेना और मझगांव डॉक

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चर्चा में क्यों?

भारतीय नौसेना (Indian Navy) 3 अप्रैल 2026 को विशाखापत्तनम में अपना नवीनतम स्टील्थ फ्रिगेट, आईएनएस तारागिरी (INS Taragiri - F41) कमीशन करेगी। यह जहाज प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित नीलगिरि श्रेणी (Nilgiri‑class) का चौथा पोत है और स्वदेशी युद्धपोत निर्माण के लिए भारत के अभियान में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

प्रोजेक्ट 17A का उद्देश्य पहले के शिवालिक श्रेणी के डिज़ाइनों के आधार पर सात अत्याधुनिक फ्रिगेट बनाना है, लेकिन बेहतर स्टील्थ, मारक क्षमता और स्वचालन के साथ। तारागिरी का निर्माण मुंबई में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा किया गया है और इसे नौसेना के वारशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया है। इसका पुनर्जन्म लिएंडर-श्रेणी (Leander-class) के फ्रिगेट INS Taragiri को श्रद्धांजलि देता है, जिसने 1980 से 2013 तक सेवा की थी।

विशेषताएं और क्षमताएं

  • स्टील्थ डिजाइन: 6,670 टन के जहाज में एक चिकना पतवार (sleek hull) और कम रडार क्रॉस-सेक्शन है, जिससे यह न्यूनतम पहचान के साथ लक्ष्य तक पहुंच सकता है। इसके 75% से अधिक घटकों का उत्पादन घरेलू स्तर पर किया जाता है, जो भारत की आत्मनिर्भरता को रेखांकित करता है।
  • प्रणोदन (Propulsion): तारागिरी एक संयुक्त डीजल या गैस (CODOG) प्रणोदन संयंत्र का उपयोग करता है। प्रत्येक शाफ्ट में एक डीजल इंजन और एक गैस टर्बाइन होता है जो एक नियंत्रणीय-पिच प्रोपेलर को चलाता है, जो उच्च गति और सहनशक्ति को सक्षम करता है। एक आधुनिक एकीकृत प्लेटफार्म प्रबंधन प्रणाली (Integrated Platform Management System - IPMS) मशीनरी की निगरानी और नियंत्रण करती है।
  • हथियार और सेंसर: फ्रिगेट सुपरसोनिक ब्रह्मोस सतह-से-सतह (surface‑to‑surface) मिसाइलों को ले जाता है; MFSTAR रडार द्वारा निर्देशित एक मध्यम दूरी की सतह-से-हवा (MRSAM) मिसाइल प्रणाली; 76 मिमी सुपर रैपिड गन माउंट; क्लोज-इन हथियार प्रणाली; और रॉकेट और टॉरपीडो के साथ एक विशेष पनडुब्बी रोधी युद्ध (anti‑submarine warfare) सूट। एक उन्नत लड़ाकू प्रबंधन प्रणाली त्वरित प्रतिक्रिया के लिए सभी सेंसर और हथियारों को एकीकृत करती है।
  • मिशन बहुमुखी प्रतिभा: एंटी-सरफेस, एंटी-एयर और एंटी-सबमरीन ऑपरेशंस के लिए डिज़ाइन किया गया, तारागिरी मानवीय सहायता और आपदा राहत मिशन भी कर सकता है। इसका मॉड्यूलर निर्माण तेजी से निर्माण और आसान रखरखाव की अनुमति देता है।

निष्कर्ष

आईएनएस तारागिरी भारत की बढ़ती स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता और समुद्री सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण है। इसका कमीशनिंग हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean region) और उससे आगे राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की नौसेना की क्षमता को मजबूत करेगा।

स्रोत: PIB

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