अर्थव्यवस्था

Kalai-II Hydroelectric Project: लोहित नदी, अरुणाचल प्रदेश और रन-ऑफ-रिवर

Kalai-II Hydroelectric Project: लोहित नदी, अरुणाचल प्रदेश और रन-ऑफ-रिवर

वॉल में क्यों?

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (Cabinet Committee on Economic Affairs) ने अरुणाचल प्रदेश में लोहित नदी (Lohit river) पर 1,200 मेगावाट की कलाई-II जलविद्युत परियोजना (Kalai-II hydroelectric project) के लिए एक बड़े निवेश को मंजूरी दी है। लगभग ₹14,105 करोड़ की इस परियोजना को राज्य सरकार के साथ साझेदारी में टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (THDC India Ltd) द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा। यह न्यूनतम भंडारण वाली एक रन-ऑफ-रिवर योजना (run-of-river scheme) है और इससे हर साल लगभग 4,852.95 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होने की उम्मीद है, जिससे एक दूरस्थ सीमावर्ती जिले में बहुत जरूरी बिजली और बुनियादी ढांचा उपलब्ध होगा।

पृष्ठभूमि

कलाई-II परियोजना लोहित नदी पर स्थित है, जो ब्रह्मपुत्र की एक प्रमुख सहायक नदी है जो तिब्बती पठार (Tibetan plateau) से निकलती है और भारत में प्रवेश करने से पहले जंगलों वाली मिश्मी पहाड़ियों (Mishmi Hills) से होकर बहती है। इसकी लाल लेटराइट मिट्टी ने इसे "खून की नदी" (river of blood) नाम दिया है। इस परियोजना में एक कंक्रीट गुरुत्वाकर्षण बांध (concrete gravity dam) और सुरंगों और पेनस्टॉक्स (penstocks) की एक श्रृंखला होगी जो पानी को 190 मेगावाट के छह टर्बाइनों और 60 मेगावाट की एक छोटी इकाई की ओर निर्देशित करेगी। पोंडेज के साथ रन-ऑफ-रिवर (run-of-river with pondage) योजना के रूप में, यह एक बड़ा जलाशय बनाए बिना नदी के प्राकृतिक प्रवाह का उपयोग करेगी।

प्रमुख विशेषताएं

  • संयुक्त उद्यम (Joint venture): इस परियोजना को अरुणाचल प्रदेश सरकार की साझेदारी में टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड द्वारा विकसित किया जा रहा है। केंद्र सड़क और पुल निर्माण के वित्तपोषण और इक्विटी सहायता प्रदान करके परियोजना का समर्थन करेगा।
  • पोंडेज और बांध (Pondage and dam): लोहित के आर-पार एक कंक्रीट गुरुत्वाकर्षण बांध दैनिक प्रवाह विनियमन के लिए एक छोटा तालाब बनाएगा। बांध के कॉफ़रडैम (cofferdams) और स्पिलवे (spillways) बाढ़ को नियंत्रित करेंगे और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करेंगे।
  • बिजली उत्पादन (Power generation): सात टर्बाइन 1,200 मेगावाट की संयुक्त क्षमता का उत्पादन करेंगे, जिससे सालाना लगभग 4,853 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होगी। राज्य को 12 प्रतिशत बिजली मुफ्त मिलेगी, जबकि 1 प्रतिशत स्थानीय क्षेत्र के विकास के लिए निर्धारित किया जाएगा।
  • सामाजिक-आर्थिक लाभ (Socio-economic benefits): सड़कों, पुलों और ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण से अंजाव जिले (Anjaw district) में कनेक्टिविटी में सुधार होगा। इस परियोजना से इस दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्र में रोजगार पैदा होने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

लोहित नदी और रन-ऑफ-रिवर योजनाएं

लोहित पूर्वी तिब्बत से निकलती है, जहां ग्लेशियर और अल्पाइन धाराएं मिलकर एक तेज, तलछट से भरपूर नदी बनाती हैं। मिश्मी पहाड़ियों से बहने के बाद, यह असम में ब्रह्मपुत्र से मिल जाती है। कलाई-II जैसी रन-ऑफ-रिवर जलविद्युत योजनाएं टर्बाइनों को घुमाने के लिए सुरंग या नहर के माध्यम से नदी के एक हिस्से को मोड़ती हैं और फिर पानी को वापस नीचे की ओर छोड़ देती हैं। क्योंकि उनमें भंडारण कम होता है, वे सीमित लचीलेपन के साथ बेस-लोड बिजली प्रदान करते हैं लेकिन बड़े पैमाने पर जलमग्नता और विस्थापन से बचते हैं।

महत्व

  • ऊर्जा सुरक्षा (Energy security): यह परियोजना राष्ट्रीय ग्रिड में स्वच्छ नवीकरणीय क्षमता जोड़ेगी और पूर्वोत्तर में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद करेगी।
  • सामरिक महत्व (Strategic importance): एक सीमावर्ती जिले में बुनियादी ढांचे का निर्माण भारत की उपस्थिति को मजबूत करता है और स्थानीय समुदायों की आजीविका का समर्थन करता है।
  • पर्यावरणीय विचार (Environmental considerations): रन-ऑफ-रिवर डिजाइन का उपयोग करके, परियोजना बड़े भंडारण बांधों की तुलना में पर्यावरणीय पदचिह्न को कम करती है, हालांकि स्थानीय पारिस्थितिकी की रक्षा के लिए अभी भी सावधानीपूर्वक प्रबंधन की आवश्यकता होगी।
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