History

Kalinjar Fort: भू-विरासत स्थल, बुंदेलखंड और चंदेल वंश

Kalinjar Fort: भू-विरासत स्थल, बुंदेलखंड और चंदेल वंश

चर्चा में क्यों?

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India - GSI) ने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश के बांदा जिले (Banda district) में कालिंजर किले (Kalinjar Fort) के आसपास के पहाड़ी क्षेत्र को राष्ट्रीय भू-विरासत स्थल (National Geo‑Heritage Site) नामित किया गया है। यह दर्जा क्षेत्र के अद्वितीय भूविज्ञान को मान्यता देता है और इससे संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

पृष्ठभूमि

कालिंजर किला केन नदी (Ken River) के पास विंध्य पर्वतमाला (Vindhya range) की एक अलग पहाड़ी पर स्थित है। माना जाता है कि यह 1,500 साल से अधिक पुराना है, इसने कई लड़ाइयाँ और राजवंश परिवर्तन देखे हैं। इस किले की स्थापना गुप्त काल में हुई थी और बाद में यह चंदेल राजवंश (9वीं-13वीं शताब्दी) की राजधानी बन गया। महमूद गजनवी और शेरशाह सूरी जैसे शासकों ने सफलता के बिना इस पर कब्जा करने का प्रयास किया जब तक कि अकबर ने अंततः 1569 में इस पर अधिकार नहीं कर लिया और इसे अपने मंत्री बीरबल को सौंप दिया। किले में मंदिर, महल और बावड़ियां हैं, जिनमें नीलकंठ मंदिर भी शामिल है, जहाँ पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने समुद्र मंथन (churning of the cosmic ocean) से निकला जहर पिया था।

यह स्थल विशेष क्यों है?

  • एपारचियन अनकन्फर्मिटी (Eparchaean unconformity): यह क्षेत्र एक दुर्लभ भूवैज्ञानिक घटना (rare geological phenomenon) को प्रदर्शित करता है जहां 2.5 अरब साल पुराने बुंदेलखंड ग्रेनाइट के ऊपर 1.2 अरब साल पुराना कैमूर बलुआ पत्थर (sandstone) मौजूद है, जो पृथ्वी के प्राचीन इतिहास के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
  • भू-सांस्कृतिक विरासत (Geo‑cultural heritage): किले की विशाल दीवारों के निर्माण के लिए स्थानीय रूप से खोदे गए पत्थरों का उपयोग किया गया था। क्षेत्र के विशिष्ट भूविज्ञान ने किले की रणनीतिक ताकत (strategic strength) और इसकी स्थापत्य सुंदरता (architectural beauty) में योगदान दिया।
  • पर्यटन क्षमता: अधिकारी कालिंजर को खजुराहो और चित्रकूट जैसे अन्य विरासत स्थलों से जोड़ने वाले एक पर्यटन सर्किट (tourism circuit) के हिस्से के रूप में विकसित करने की योजना बना रहे हैं। GSI द्वारा स्थापित एक सूचना बोर्ड क्षेत्र के भूवैज्ञानिक और ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालता है।

महत्व

  • संरक्षण: राष्ट्रीय भू-विरासत का दर्जा स्थल के लिए कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करता है और इसके भूवैज्ञानिक महत्व के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देता है।
  • सांस्कृतिक संरक्षण: किले के लंबे इतिहास को मान्यता देना भारत की विरासत को दर्शाने वाले मंदिरों, महलों और कलाकृतियों के संरक्षण को प्रोत्साहित करता है।
  • आर्थिक लाभ: पर्यटन में वृद्धि से स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका (livelihood) के अवसर मिल सकते हैं और आगंतुकों को भूविज्ञान और इतिहास के बारे में शिक्षित किया जा सकता है।

निष्कर्ष

कालिंजर किला क्षेत्र को राष्ट्रीय भू-विरासत स्थल के रूप में नामित करना भूविज्ञान को इतिहास के साथ जोड़ता है। ऐसे स्थलों की रक्षा करना और उन्हें बढ़ावा देना भविष्य की पीढ़ियों के लिए भारत की विविध प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में मदद करता है।

स्रोत: The Times of India

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