चर्चा में क्यों?
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को 2019 में कप्पटागुड्डा वन्यजीव अभयारण्य (Kappatagudda Wildlife Sanctuary) घोषित किए जाने पर छोड़े गए अनुमानित 55 वर्ग किलोमीटर आरक्षित वन को जोड़ने के लिए एक नई अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि अभयारण्य के क्षेत्र को राज्य वन्यजीव बोर्ड द्वारा अनुमोदित 300 वर्ग किलोमीटर से घटाकर 244 वर्ग किलोमीटर करने से पर्यावरण प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन हुआ है।
पृष्ठभूमि
कप्पटागुड्डा वन्यजीव अभयारण्य कर्नाटक के गडग जिले (Gadag district) में स्थित है। कभी-कभी "उत्तरी कर्नाटक के पश्चिमी घाट (Western Ghats of North Karnataka)" कहा जाता है, इसमें शुष्क पर्णपाती (dry deciduous) जंगलों, घास के मैदानों, झाड़ियों (scrublands) और नदी के किनारों का एक मोज़ेक (mosaic) है। पहाड़ियों में चालुक्य (Chalukyas) और राष्ट्रकूट (Rashtrakutas) जैसे राजवंशों के प्राचीन मंदिर और खंडहर हैं, जिनमें जैन बसदी (Jain Basadi), ब्रह्मा जिनालय (Brahma Jinalaya) और त्रिकुटेश्वर (Trikuteshwara) मंदिर शामिल हैं। कप्पटागुड्डा तुंगभद्रा नदी के लिए एक प्रमुख जलग्रहण (catchment) क्षेत्र बनाता है और विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधों का समर्थन करता है।
अभयारण्य को आधिकारिक तौर पर मई 2019 में लगभग 244 वर्ग किमी को कवर करते हुए अधिसूचित किया गया था, भले ही राज्य वन्यजीव बोर्ड ने पहले रिजर्व वन के लगभग 300 वर्ग किमी को शामिल करने का संकल्प लिया था। खनन हितों ने बड़े क्षेत्र का विरोध किया था। स्टोन-क्रशिंग ऑपरेटरों ने 2019 की अधिसूचना को चुनौती दी, लेकिन उच्च न्यायालय ने उनकी याचिकाओं को खारिज कर दिया और सरकार को शेष 55 वर्ग किमी को शामिल करने का आदेश दिया। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी बहिष्कार को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत उचित प्रक्रिया (due process) का पालन करना चाहिए और मनमाना नहीं हो सकता।
पारिस्थितिक महत्व
- जैव विविधता: इस अभयारण्य में तेंदुए, लकड़बग्घे (hyenas), भेड़िये, लोमड़ी, चार सींग वाले मृग (four-horned antelopes), काले हिरण (blackbucks) और कई सरीसृप (reptile) और पक्षी प्रजातियां हैं। औषधीय पौधों की लगभग 400 प्रजातियां दर्ज की गई हैं।
- पर्यावास विविधता: इसके शुष्क जंगलों और घास के मैदानों का मिश्रण खुली झाड़ियों के साथ-साथ जंगली क्षेत्रों (wooded areas) के लिए अनुकूल प्रजातियों के लिए निवास स्थान प्रदान करता है।
- जल ग्रहण: पहाड़ियां तुंगभद्रा नदी (Tungabhadra River) को पोषित करने, नीचे की ओर कृषि और समुदायों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- सांस्कृतिक विरासत: अभयारण्य के भीतर प्राचीन मंदिर और खंडहर क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं।
स्रोत: The Hindu, Wikipedia – Kappatagudda Wildlife Sanctuary