समाचार में क्यों?
एक सप्ताह के शुष्क (dry) मौसम ने ऊपरी Krishna प्रणाली (system) में प्रवाह (inflows) को कम कर दिया। प्रभावित हेडलवाटर (headwaters) कर्नाटक और महाराष्ट्र में स्थित हैं। उपलब्ध पानी का आकलन करते समय अधिकारियों ने सिंचाई रिलीज (irrigation releases) रोक दी। स्थिति दर्शाती है कि वर्षा कैसे जलाशय के फैसलों को जल्दी प्रभावित करती है।
पृष्ठभूमि
Krishna एक प्रमुख पूर्व-बहने वाली प्रायद्वीपीय नदी (east-flowing peninsular river) है, और यह महाराष्ट्र के Western Ghats में महाबलेश्वर (Mahabaleshwar) के पास शुरू होती है।
स्रोत समुद्र तल से लगभग 1,337 मीटर ऊपर स्थित है, और नदी लगभग 1,400 किलोमीटर की यात्रा करती है।
यह महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से होकर बहती है, और यह हमसलादीवी (Hamsaladeevi) के पास Bay of Bengal में प्रवेश करती है।
ड्रेनेज बेसिन (drainage basin) लगभग 258,948 वर्ग किलोमीटर को कवर करता है, और यह क्षेत्र भारत का लगभग आठ प्रतिशत है।
रैंकिंग सावधानी: चुने गए माप के साथ नदी रैंकिंग (River rankings) बदल जाती है। आधिकारिक बेसिन क्षेत्र (basin area) और लंबाई का उपयोग करना अधिक सुरक्षित है।
नदी बेसिन (river basin) क्या है?
नदी बेसिन (river basin) एक नदी और उसकी सहायक नदियों (tributaries) द्वारा सिंचित (drained) भूमि है। ऊंची लकीरें (High ridges) इसकी बाहरी वाटरशेड सीमा (outer watershed boundary) बनाती हैं।
उस सीमा के अंदर गिरने वाली बारिश अंततः साझा नदी प्रणाली तक पहुंचती है, और कुछ पानी पहले मिट्टी या भूमिगत जलभृत (underground aquifers) में प्रवेश करता है।
Krishna बेसिन महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश द्वारा साझा किया जाता है।
महत्वपूर्ण सहायक नदियाँ कौन सी हैं?
- Koyna महाराष्ट्र के भारी-वर्षा वाले क्षेत्रों में बहती है।
- Panchganga महाराष्ट्र में ऊपरी Krishna में मिलती है।
- Ghataprabha और Malaprabha कर्नाटक से होकर बहती हैं।
- Bhima सबसे लंबी सहायक नदियों में से एक है।
- Tungabhadra Tunga और Bhadra के मिलने के बाद बनती है।
- Dindi, Musi और Munneru आगे नीचे की ओर मिलती हैं।
सहायक नदियाँ बड़े बेसिन में वर्षा के प्रभावों को फैलाती हैं, और एक उप-बेसिन (sub-basin) में कम बारिश हर जलाशय को समान रूप से प्रभावित नहीं कर सकती है।
कौन सी प्रमुख परियोजनाएं Krishna के पानी का उपयोग करती हैं?
बड़े जलाशय (reservoirs) बाद में उपयोग के लिए मानसूनी पानी जमा करते हैं, और वे बिजली उत्पादन, पेयजल आपूर्ति और बाढ़ प्रबंधन का भी समर्थन करते हैं।
- Almatti और Narayanpur महत्वपूर्ण ऊपरी-बेसिन (upper-basin) परियोजनाएं हैं।
- Srisailam आगे नीचे की ओर एक प्रमुख बहुउद्देशीय (multipurpose) जलाशय है।
- Nagarjuna Sagar सिंचाई और बिजली उत्पादन का समर्थन करता है।
- Prakasam Barrage डेल्टा (delta) भर में पानी वितरित करता है।
- प्रमुख सहायक नदियों में भी कई बड़े बांध हैं।
कमी के दौरान एक बांध का स्थान मायने रखता है। एक अपस्ट्रीम (upstream) रिलीज डाउनस्ट्रीम उपयोगकर्ताओं (downstream users) का समर्थन कर सकती है लेकिन पहले जलाशय में संग्रहीत पानी को कम कर सकती है।
एक छोटा शुष्क दौर (dry spell) क्यों मायने रखता है?
Western Ghats नमी से भरी (moisture-laden) मानसूनी हवाओं को ऊपर की ओर धकेलते हैं, और यह प्रक्रिया ऊपरी जलग्रहण (catchment) के आसपास भारी वर्षा पैदा करती है।
खड़ी ढलान (Steep slopes) जल्दी से उस वर्षा का एक हिस्सा धाराओं (streams) में भेजती है, और बारिश के कमजोर होने के तुरंत बाद जलाशय का प्रवाह (inflow) गिर सकता है।
एक शुष्क दौर एक छोटी बारिश मुक्त या कम बारिश की अवधि है, लेकिन यह स्वचालित रूप से मौसम संबंधी सूखा (meteorological drought) नहीं है।
सूखा (Drought) लंबी और व्यापक कमी का वर्णन करता है, और इसे अपेक्षित वर्षा, पानी या मिट्टी की नमी की स्थिति के खिलाफ मापा जाता है।
भ्रमित न हों: इनफ्लो (Inflow) जलाशय में प्रवेश करने वाला पानी है। भंडारण (Storage) पहले से ही रखा पानी है, जबकि रिलीज (release) पानी का छोड़ना है।
अधिकारी सिंचाई रिलीज (irrigation release) कैसे तय करते हैं?
- वर्तमान जलाशय भंडारण (storage) प्रारंभिक स्थिति प्रदान करता है।
- हाल का प्रवाह (inflow) दर्शाता है कि भंडारण कितनी तेजी से बदल रहा है।
- मौसम के पूर्वानुमान संभावित भविष्य की पुनःपूर्ति (replenishment) का संकेत देते हैं।
- पीने के पानी को सामान्यतः उच्च प्राथमिकता मिलती है।
- फसल की अवस्था सिंचाई की मांग की तात्कालिकता (urgency) निर्धारित करती है।
- जलविद्युत (Hydropower) और पारिस्थितिक (ecological) आवश्यकताओं पर भी विचार करने की आवश्यकता है।
- बाढ़ के मौसम में आने वाले पानी के लिए खाली जगह की आवश्यकता हो सकती है।
पानी को अस्थायी रूप से रोकने से सीमित रिजर्व (reserve) को संरक्षित किया जा सकता है, और लंबे समय तक देरी अभी भी संवेदनशील विकास चरणों (growth stages) में फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है।
इसलिए प्रबंधकों को बारिश और प्रवाह (inflow) में बदलाव के रूप में निर्णयों को संशोधित करना चाहिए, और एक सप्ताह का निर्णय पूरे मौसम को तय नहीं करता है।
जल-बंटवारा विवाद (water-sharing dispute) कैसे विकसित हुआ?
- पहले Krishna Water Disputes Tribunal का गठन 1969 में किया गया था।
- इसके पुरस्कार (award) को आधिकारिक तौर पर 31 May 1976 को अधिसूचित (notified) किया गया था।
- दूसरा न्यायाधिकरण (tribunal) April 2004 में गठित किया गया था।
- इसने 2010 और 2013 के दौरान निर्णय जारी किए।
- Telangana June 2014 में एक अलग राज्य बना।
- पुनर्गठन (Reorganisation) ने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच नए सवाल खड़े कर दिए।
- Krishna River Management Board अब निर्दिष्ट (specified) अंतरराज्यीय परियोजनाओं (interstate projects) का प्रबंधन करता है।
बोर्ड (Board) Andhra Pradesh Reorganisation Act, 2014 के तहत बनाया गया था। ट्रिब्यूनल और अदालती कार्यवाही जल प्रशासन (water administration) को आकार देना जारी रखती है।
कम-प्रवाह (low-flow) वाले वर्षों के दौरान पानी के विवाद तेज हो जाते हैं, और अपस्ट्रीम (upstream) भंडारण, डाउनस्ट्रीम ज़रूरतें और बदलते फसल पैटर्न प्रतिस्पर्धात्मक (competing) दावों को पैदा कर सकते हैं।
बेसिन प्रबंधन (basin management) में क्या सुधार हो सकता है?
- जलाशय (Reservoir) डेटा समय पर और सार्वजनिक रूप से सुलभ होना चाहिए।
- राज्यों को साझा वर्षा और प्रवाह (inflow) पूर्वानुमानों की आवश्यकता है।
- फसल योजना (Crop planning) को भरोसेमंद पानी की उपलब्धता को दर्शाना चाहिए।
- कुशल सिंचाई टालने योग्य (avoidable) नुकसान को कम कर सकती है।
- भूजल (Groundwater) का उपयोग रिचार्ज सीमा (recharge limits) के भीतर रहना चाहिए।
- पर्यावरणीय प्रवाह (Environmental flows) को नदी पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करना चाहिए।
निष्कर्ष
Krishna प्रबंधन बदलते मानसूनी प्रवाह (inflows) और अंतरराज्यीय सहयोग पर निर्भर करता है, और पारदर्शी डेटा बेहतर और तेज़ रिलीज़ (release) निर्णयों का समर्थन कर सकता है।