समाचार में क्यों?
जनवरी 2026 में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान खादी और ग्रामोद्योग आयोग (Khadi and Village Industries Commission) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने राष्ट्र निर्माण, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता में संगठन की भूमिका पर प्रकाश डाला। 2025-26 में KVIC का टर्नओवर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो खादी उत्पादों की बढ़ती मांग को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
KVIC Khadi and Village Industries Commission Act, 1956 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय (statutory body) है। यह सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises) के अंतर्गत आता है। आयोग को आजीविका प्रदान करने और ग्रामीण भारत में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के साधन के रूप में हाथ से काते गए और हाथ से बुने गए कपड़े (खादी) और ग्रामोद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था। महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान स्वतंत्रता और गरिमा के प्रतीक के रूप में खादी का समर्थन किया। आज यह क्षेत्र लाखों कारीगरों और छोटे उद्यमियों का समर्थन करता है।
KVIC के कार्य
- योजना और संवर्धन: KVIC खादी और ग्रामोद्योगों के विकास के लिए कार्यक्रमों की योजना बनाता है, बढ़ावा देता है और आयोजित करता है, अन्य ग्रामीण विकास एजेंसियों के साथ समन्वय करता है।
- प्रशिक्षण और कच्चा माल: यह कारीगरों के लिए प्रशिक्षण आयोजित करता है और कच्चे माल और उपकरणों का भंडार बनाता है, उन्हें उत्पादकों को सस्ती दरों पर आपूर्ति करता है।
- सामान्य सुविधाएं और विपणन (Common facilities and marketing): आयोग प्रसंस्करण और विपणन के लिए साझा सुविधाओं के निर्माण को प्रोत्साहित करता है, और यह उत्पादकों को अपने उत्पाद बेचने के लिए स्थापित विपणन एजेंसियों से जोड़ता है।
- अनुसंधान और नवाचार: KVIC उत्पादन तकनीक में अनुसंधान को बढ़ावा देता है, जिसमें उत्पादकता में सुधार और कड़ी मेहनत को कम करने के लिए गैर-पारंपरिक ऊर्जा और उपकरणों का उपयोग शामिल है।
- वित्तीय सहायता: यह खादी और ग्रामोद्योगों में लगे संस्थानों और व्यक्तियों को ऋण और अनुदान प्रदान करता है और डिज़ाइन, प्रोटोटाइप और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करता है।
- गुणवत्ता मानक: आयोग गुणवत्ता मानक निर्धारित करता है और खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की वास्तविकता सुनिश्चित करने के लिए प्रमाण पत्र जारी करता है।
हाल के घटनाक्रम
CEO ने उल्लेख किया कि KVIC से जुड़े लगभग 90 प्रतिशत कारीगर महिलाएं हैं, जो लैंगिक सशक्तिकरण में इसकी भूमिका को रेखांकित करता है। Prime Minister’s Employment Generation Programme (PMEGP), हनी मिशन (Honey Mission), सौर चरखा योजनाओं और डिजिटल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म जैसी पहलों ने ग्रामीण उद्यमियों के लिए अवसरों का विस्तार किया है। "नवयुग खादी" (Navyug Khadi) की अवधारणा पारंपरिक कताई को आधुनिक डिजाइन के साथ मिलाती है, जिससे उत्पाद की गुणवत्ता और वैश्विक अपील में सुधार होता है। KVIC का रिकॉर्ड टर्नओवर टिकाऊ, स्थानीय रूप से बने उत्पादों में बढ़ती उपभोक्ता रुचि को दर्शाता है।
निष्कर्ष
KVIC ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और भारत की हथकरघा विरासत को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रशिक्षण, वित्त, विपणन सहायता और गुणवत्ता आश्वासन प्रदान करके, यह कारीगरों - विशेष रूप से महिलाओं - को सशक्त बनाता है और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है। भविष्य की सफलता परंपरा को नवाचार के साथ संतुलित करने और ग्रामीण उत्पादकों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों से जोड़ने पर निर्भर करेगी।