सामाजिक

Leprosy Eradication Programme: NLEP, Sparsh और सार्वजनिक स्वास्थ्य

Leprosy Eradication Programme: NLEP, Sparsh और सार्वजनिक स्वास्थ्य

चर्चा में क्यों?

हाल ही में राज्यसभा के एक सत्र के दौरान, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री (Minister of State for Health and Family Welfare) ने कुष्ठ रोग (leprosy) को खत्म करने के भारत के प्रयासों पर एक अपडेट प्रदान किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (National Leprosy Eradication Programme - NLEP) देश भर में मुफ्त निदान (free diagnosis) और उपचार प्रदान करना जारी रखता है और डिजिटल निगरानी (digital surveillance) उपकरण अपना रहा है। इस घोषणा ने नए संक्रमणों और इस लंबे समय से चली आ रही बीमारी से जुड़े कलंक (stigma) को कम करने के सरकार के दृढ़ संकल्प को रेखांकित किया।

पृष्ठभूमि

कुष्ठ रोग, या हैनसेन रोग (Hansen’s disease), माइकोबैक्टीरियम लेप्रे (Mycobacterium leprae) नामक जीवाणु के कारण होने वाली एक पुरानी संक्रामक बीमारी है। यह मुख्य रूप से त्वचा और परिधीय तंत्रिकाओं (peripheral nerves) को प्रभावित करता है और, यदि अनुपचारित छोड़ दिया जाए, तो यह विकलांगता (disability) और सामाजिक बहिष्कार (social ostracism) का कारण बन सकता है। 1980 के दशक में दुनिया के कुष्ठ रोग के बोझ का एक बड़ा हिस्सा भारत में था, जिसने सरकार को 1983 में एनएलईपी (NLEP) शुरू करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) द्वारा अनुशंसित मल्टीड्रग थेरेपी (multidrug therapy) को अपनाया और तब से प्रसार को नाटकीय रूप से कम कर दिया है।

NLEP अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (National Health Mission) के तहत केंद्र प्रायोजित योजना (centrally sponsored scheme) है। कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के लिए प्रारंभिक पहचान (early detection), पूर्ण उपचार और देखभाल सुनिश्चित करके संचरण (transmission) को बाधित करना इसका उद्देश्य है। सेवाएं - निदान, दवा चिकित्सा (drug therapy) और पुनर्वास (rehabilitation) सहित - सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं (public health facilities) के माध्यम से निःशुल्क प्रदान की जाती हैं। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य कर्मचारियों, जागरूकता अभियानों (awareness campaigns) और अनुसंधान के लिए प्रशिक्षण को भी वित्तपोषित करता है, और राज्यों को सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं के साथ कुष्ठ नियंत्रण (leprosy control) को एकीकृत करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

रणनीतियाँ और उद्देश्य

  • प्रारंभिक मामले का पता लगाना (Early case detection): स्वास्थ्य कार्यकर्ता (Health workers) अज्ञात मामलों की पहचान करने के लिए उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में कुष्ठ रोग मामले का पता लगाने के अभियान (Leprosy Case Detection Campaigns) और केंद्रित कुष्ठ रोग अभियान (Focused Leprosy Campaigns) चलाते हैं।
  • सामुदायिक निगरानी (Community surveillance): मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (ASHAs) और स्वयंसेवक (volunteers) संदिग्ध त्वचा के घावों (suspicious skin lesions) के लिए समुदायों की निगरानी करते हैं और व्यक्तियों को निदान के लिए संदर्भित करते हैं।
  • उपचार और अनुवर्ती कार्रवाई (Treatment and follow-up): मल्टी-ड्रग थेरेपी बिना किसी कीमत के प्रदान की जाती है। जटिलताओं (complications) को कम करने के लिए विकलांगता की रोकथाम (Disability prevention) और उपचार के बाद की देखभाल की पेशकश की जाती है।
  • डिजिटल उपकरण (Digital tools): निक्षय 2.0 (Nikusth 2.0) जैसे प्लेटफॉर्म मामले का डेटा रिकॉर्ड करते हैं, उपचार की प्रगति को ट्रैक करते हैं और समय पर रिपोर्टिंग की सुविधा प्रदान करते हैं।
  • जागरूकता और कलंक कम करना: स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान (Sparsh Leprosy Awareness Campaign) और सामुदायिक बैठकें लोगों को लक्षणों (symptoms) के बारे में शिक्षित करती हैं और इस बात पर जोर देती हैं कि प्रारंभिक उपचार विकलांगता को रोकता है।
  • उद्देश्य: कार्यक्रम जिला स्तर पर 10,000 की आबादी पर 1 मामले से नीचे प्रसार दर (prevalence rate) को कम करने, दृश्यमान विकृतियों (visible deformities) वाले नए मामलों के अनुपात में कटौती करने, बाल मामलों में शून्य विकलांगता (zero disability) सुनिश्चित करने और कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के खिलाफ भेदभाव (discrimination) को समाप्त करने का प्रयास करता है।

महत्व

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभाव (Public health impact): भारत ने निरंतर कार्रवाई (sustained action) के कारण कुष्ठ रोग के प्रसार में भारी गिरावट देखी है, हालांकि बीमारी की लंबी ऊष्मायन अवधि (incubation period) के कारण निरंतर सतर्कता (continued vigilance) की आवश्यकता है।
  • समान पहुंच (Equitable access): मुफ्त निदान (Free diagnosis) और उपचार यह सुनिश्चित करते हैं कि सबसे गरीब मरीजों को भी देखभाल मिले, जिससे रोकी जा सकने वाली विकलांगता को कम किया जा सके।
  • अन्य कार्यक्रमों के साथ एकीकरण: सामान्य स्वास्थ्य प्रणालियों (general health systems) के साथ कुष्ठ सेवाओं को जोड़ने से संसाधनों के कुशल उपयोग की अनुमति मिलती है और देखभाल अधिक सुलभ हो जाती है।
  • कलंक कम करना (Stigma reduction): जागरूकता अभियान (Awareness campaigns) प्रारंभिक रिपोर्टिंग (early reporting) को प्रोत्साहित करते हैं और उन गलत धारणाओं (misconceptions) का मुकाबला करते हैं जो अभी भी कई समुदायों में कुष्ठ रोग को घेरते हैं।

निष्कर्ष

राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (National Leprosy Eradication Programme) ने एक समय की व्यापक बीमारी के प्रति भारत की प्रतिक्रिया को बदल दिया है। प्रारंभिक पहचान (early detection), मुफ्त उपचार (free treatment) और सामाजिक समावेश (social inclusion) पर ध्यान केंद्रित करके, कार्यक्रम देश को शून्य कुष्ठ (zero leprosy) के अपने लक्ष्य के करीब ले जाता है। संक्रमण (infection) और कलंक (stigma) की शेष जेबों को खत्म करने के लिए निरंतर धन (Continued funding), डिजिटल नवाचार (digital innovation) और सामुदायिक जुड़ाव (community engagement) आवश्यक होगा।

स्रोत: PIB

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