समाचार में क्यों?
27 May 2026 को भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग जहाज INS Sudarshini केप वर्डे (Cape Verde) से अपनी ट्रांस-अटलांटिक यात्रा (trans‑Atlantic voyage) का सबसे लंबा चरण पूरा करने के बाद कैरिबियन में एंटीगुआ (Antigua) पहुंचा। यह पड़ाव Lokayan 26 में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जो दस महीने का अभियान है जिसमें 22,000 समुद्री मील (nautical miles) की दूरी तय की गई और 13 देशों के 18 बंदरगाहों का दौरा किया गया।
पृष्ठभूमि
भारतीय नौसेना कैडेटों को सीमैनशिप (seamanship) में प्रशिक्षित करने और भारत की समुद्री विरासत (maritime heritage) को प्रदर्शित करने के लिए टॉल शिप्स (tall ships) का उपयोग करती है। INS Sudarshini, जिसे 1997 में कमीशन किया गया था, एक थ्री-मास्टेड बारक्वेंटाइन (three‑masted barquentine) है और नौसेना का दूसरा पाल प्रशिक्षण जहाज (sail training ship) है। इसने पहले ही 1.40 लाख से अधिक समुद्री मील (nautical miles) की यात्रा कर ली है। Lokayan 26 यात्रा, जो 20 जनवरी 2026 को कोच्चि से शुरू हुई, Vasudhaiva Kutumbakam ("दुनिया एक परिवार है") के दृष्टिकोण का सम्मान करती है और बंदरगाह यात्राओं के माध्यम से सद्भावना और मित्रता को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखती है।
उद्देश्य और गतिविधियाँ
- सेल प्रशिक्षण (Sail training): भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल (Coast Guard) के 200 से अधिक प्रशिक्षुओं (trainees) को लंबी दूरी के नेविगेशन (long‑range navigation), पारंपरिक सीमैनशिप और टीम वर्क (teamwork) में व्यावहारिक प्रशिक्षण (hands‑on training) प्राप्त होगा। टॉल शिप्स (tall ships) पर प्राप्त अनुभव कैडेटों में नेतृत्व और लचीलापन (resilience) विकसित करने में मदद करता है।
- कूटनीति और आउटरीच (Diplomacy and outreach): जहाज अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका में 18 विदेशी बंदरगाहों का दौरा कर रहा है। यह फ्रांस में Escale à Sète और न्यूयॉर्क में SAIL 250 जैसे अंतरराष्ट्रीय टॉल-शिप त्योहारों में भाग लेगा, जो भारत की समुद्री यात्रा परंपराओं (seafaring traditions) को प्रदर्शित करेगा और समुद्री साझेदारी (maritime partnerships) का निर्माण करेगा।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान: प्रत्येक बंदरगाह पर चालक दल (crew) खुले जहाजों (open ships), सांस्कृतिक प्रदर्शनों (cultural performances) और संयुक्त प्रशिक्षण गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय समुदायों के साथ जुड़ता है, संबंधों को मजबूत करता है और आपसी समझ को बढ़ावा देता है।
- ऐतिहासिक क्रॉसिंग (Historical crossing): केप वर्डे से एंटीगुआ तक का चरण भारतीय नौसेना के टॉल शिप द्वारा की गई अब तक की सबसे लंबी अटलांटिक क्रॉसिंग (Atlantic crossing) थी। कोच्चि से प्रस्थान करने के बाद से यह जहाज 10,000 से अधिक समुद्री मील की यात्रा कर चुका है और कैरिबियन में पुनःपूर्ति (replenishment) के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर बढ़ेगा।
निष्कर्ष
Lokayan 26 प्रशिक्षण, कूटनीति (diplomacy) और सांस्कृतिक आउटरीच (cultural outreach) के प्रति भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। पाल (sail) के तहत महासागरों को पार करके, INS Sudarshini भारत की समुद्री विरासत का प्रतीक है और महाद्वीपों के पार दोस्ती के पुल बनाता है।