समाचार में क्यों?
पर्यावरणविदों ने महाराष्ट्र के बुलढाणा (Buldhana) जिले में स्थित Lonar Lake के जल स्तर में भारी वृद्धि की सूचना दी है। September 2025 से जल स्तर लगभग 15-20 फीट बढ़ गया है, जिससे प्राचीन मंदिरों के कुछ हिस्से जलमग्न हो गए हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) की नागपुर बेंच ने कारण की जांच करने और झील के अनूठे पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए एक जनहित याचिका (Public Interest Litigation) का आदेश दिया है।
पृष्ठभूमि
Lonar Lake लगभग 50,000 साल पहले बनी थी जब एक उल्कापिंड दक्कन के पठार (Deccan plateau) से टकराया था। यह दुनिया के एकमात्र ज्ञात बेसाल्टिक प्रभाव क्रेटर (basaltic impact craters) में से एक है और इसमें खारा और क्षारीय पानी (alkaline water) होता है। यह झील एक राष्ट्रीय भू-विरासत स्थल (geo-heritage site) मानी जाती है और कमलजा देवी (Kamalja Devi) मंदिर जैसे प्राचीन मंदिरों से घिरी हुई है। 2020 में, नमक से प्यार करने वाले रोगाणुओं (microbes) के कारण झील कुछ समय के लिए गुलाबी हो गई थी, जो इसकी नाजुक पारिस्थितिकी को उजागर करती है।
प्रमुख बिंदु
- पानी का प्रवाह: क्रेटर के चारों ओर चार बारहमासी झरनों (perennial springs) से लगातार पानी के निर्वहन ने झील का स्तर लगभग 15-20 फीट बढ़ा दिया है।
- जलमग्न विरासत: कई शिव मंदिर और कमलजा देवी मंदिर आंशिक रूप से जलमग्न हो गए हैं। दीपस्तंभ (lamp tower) अब आधा पानी के नीचे खड़ा है।
- पारिस्थितिक खतरा: Lonar एक खारे पानी का पारिस्थितिकी तंत्र है, लेकिन मीठे पानी की आमद (influx) इसके खारेपन को कम कर रही है। झील में पहली बार मछलियाँ दिखाई दी हैं, जो इसके सूक्ष्म संतुलन (microbial balance) को बिगाड़ सकती हैं।
- कानूनी कार्रवाई: Justices Anil Kilor और Raj Wakode ने न्याय मित्र (amicus curiae) से विस्तृत जनहित याचिका दायर करने को कहा है। राज्य के जल विभाग के विशेषज्ञ जांच कर रहे हैं, लेकिन पानी के स्तर में वृद्धि का सटीक कारण अभी भी अज्ञात है।
- वैज्ञानिक महत्व: Lonar Lake दुनिया भर के शोधकर्ताओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है। विज्ञान और विरासत के लिए इसकी अनूठी विशेषताओं का संरक्षण आवश्यक है।
निष्कर्ष
Lonar Lake के जल स्तर में रहस्यमयी वृद्धि के लिए वैज्ञानिक अध्ययन और सावधानीपूर्वक संरक्षण की आवश्यकता है। इस अलौकिक (otherworldly) स्थल को संरक्षित करने के लिए पर्यटन, विरासत और पारिस्थितिकी (ecology) के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण होगा।