Defence (रक्षा)

Malwan ASW SWC: भारतीय नौसेना, कोचीन शिपयार्ड और तटीय रक्षा

Malwan ASW SWC: भारतीय नौसेना, कोचीन शिपयार्ड और तटीय रक्षा

चर्चा में क्यों?

भारतीय नौसेना को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (Cochin Shipyard Limited) द्वारा निर्मित आठ एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (Anti‑Submarine Warfare Shallow Water Craft - ASW SWC) में से दूसरा मालवण (Malwan) प्राप्त हुआ है। यह जहाज 31 मार्च 2026 को सौंपा गया और तटीय जल में पनडुब्बियों को ट्रैक करने और उन्हें निष्क्रिय करने की भारत की क्षमता को मजबूत करेगा।

पृष्ठभूमि (Background)

पुराने तटीय गश्ती जहाजों (coastal patrol craft) को बदलने और उथले पानी की रक्षा (shallow‑water defence) में सुधार करने के लिए, रक्षा मंत्रालय ने 2019 में आठ ASW SWC के लिए कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। ये जहाज नौसेना के वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो (Warship Design Bureau) द्वारा डिज़ाइन किए गए हैं और आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत उच्च स्वदेशी सामग्री की सुविधा देते हैं। भारत की समुद्री विरासत का सम्मान करने के लिए इस श्रेणी का नाम तटीय शहरों के नाम पर रखा गया है। मालवण पहले जहाज माहे (Mahe) के बाद आता है, और शेष छह जहाजों को आने वाले वर्षों में वितरित किया जाएगा।

प्रमुख विशेषताएं (Key features)

  • आकार और प्रणोदन (Size and propulsion): मालवण लगभग 80 मीटर लंबा है और इसका विस्थापन लगभग 1,100 टन है। वाटरजेट प्रणोदन (Waterjet propulsion) इसे लगभग 25 समुद्री मील (knots) की गति तक पहुँचने और उथले पानी में पैंतरेबाज़ी (manoeuvre) करने की अनुमति देता है।
  • सेंसर और हथियार (Sensors and weapons): क्राफ्ट पनडुब्बियों और सतह के लक्ष्यों (surface targets) का पता लगाने के लिए हल-माउंटेड सोनार (hull‑mounted sonar), कम आवृत्ति वाले चर गहराई वाले सोनार (low‑frequency variable depth sonar) और उन्नत रडार से सुसज्जित है। आत्मरक्षा के लिए यह हल्के टॉरपीडो (lightweight torpedoes), पनडुब्बी रोधी रॉकेट और छोटे-कैलिबर (small‑calibre) हथियार ले जाता है।
  • कमान और नियंत्रण (Command and control): एकीकृत नेविगेशन और संचार प्रणाली (Integrated navigation and communication systems) अन्य नौसेना इकाइयों और तट स्टेशनों (shore stations) के साथ निर्बाध डेटा साझा करने (seamless data sharing) में सक्षम बनाती है, जिससे समन्वित संचालन की अनुमति मिलती है।
  • स्वदेशी डिजाइन (Indigenous design): जहाज के 80 प्रतिशत से अधिक घटक, जिसमें स्टील, प्रणोदन प्रणाली (propulsion systems) और सेंसर शामिल हैं, भारतीय आपूर्तिकर्ताओं से प्राप्त किए गए हैं, जो घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देते हैं।

महत्व (Significance)

  • तटीय रक्षा को मजबूत करना (Strengthening coastal defence): ASW SWC तटवर्ती क्षेत्रों (littoral areas) और चोक पॉइंट (choke points) पर गश्त करते हैं जहां बड़े युद्धपोत प्रभावी ढंग से काम नहीं कर सकते हैं। उनका उथला ड्राफ्ट (shallow draft) और विशेष सेंसर भारत की तटरेखा (coastline) के पास शत्रुतापूर्ण पनडुब्बियों (hostile submarines) को रोकने में मदद करते हैं।
  • आत्मनिर्भरता का समर्थन (Supporting self‑reliance): भारत में इन जहाजों का निर्माण स्थानीय जहाज निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (local shipbuilding ecosystem) को बढ़ावा देता है और विदेशी प्रौद्योगिकी पर निर्भरता कम करता है।
  • बहु-भूमिका क्षमता (Multi‑role capability): पनडुब्बी रोधी युद्ध (anti‑submarine warfare) से परे, ये जहाज खोज-और-बचाव (search‑and‑rescue), निगरानी (surveillance) और माइन-लेइंग ऑपरेशन्स (mine‑laying operations) कर सकते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

मालवण की डिलीवरी नौसेना के तटीय बेड़े के आधुनिकीकरण (modernising) में एक और कदम है। जैसे-जैसे इस श्रृंखला में अधिक जहाज जुड़ेंगे, भारत अपनी बढ़ती जहाज निर्माण क्षमताओं का प्रदर्शन करते हुए अपनी समुद्र तटीय सतर्कता (undersea vigilance) बढ़ाएगा।

स्रोत: Press Information Bureau

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