खबरों में क्यों?
बांग्लादेश में खसरे (measles) के प्रकोप (outbreak) से 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई है, जिनमें ज्यादातर बच्चे हैं, और इसने बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान (immunisation campaign) को प्रेरित किया है। यह संकट भारत सहित पूरे क्षेत्र में खसरे के पुनरुत्थान (resurgence) की ओर ध्यान आकर्षित करता है, जहां विलंबित टीकाकरण (delayed vaccination) और कवरेज में अंतराल के कारण हाल के महीनों में हजारों मामले सामने आए हैं।
पृष्ठभूमि
खसरा एक अत्यधिक संक्रामक (contagious) वायरल बीमारी है जो मॉर्बिलिवायरस (Morbillivirus) के कारण होती है। यह श्वसन बूंदों (respiratory droplets) के माध्यम से फैलता है और हवा में दो घंटे तक सक्रिय रह सकता है। लक्षण बुखार, खांसी, बहती नाक और लाल आँखों से शुरू होते हैं, जिसके बाद एक विशिष्ट लाल दाने (red rash) होते हैं जो चेहरे से नीचे की ओर फैलते हैं। जटिलताओं में निमोनिया (pneumonia), दस्त (diarrhoea), कान के संक्रमण, एन्सेफलाइटिस (encephalitis - मस्तिष्क की सूजन) और दुर्लभ मामलों में, सबस्यूट स्क्लेरोज़िंग पैनेन्सेफलाइटिस (subacute sclerosing panencephalitis) नामक एक घातक न्यूरोलॉजिकल विकार (neurological disorder) शामिल हैं। इसका कोई विशिष्ट एंटीवायरल उपचार नहीं है; देखभाल सहायक होती है और बच्चों को विटामिन ए (vitamin A) का सप्लीमेंट दिया जाता है।
प्रकोप (Outbreak) का विवरण
- बांग्लादेश: कम वैक्सीन कवरेज और कुपोषण (malnutrition) के कारण खसरे में वृद्धि से 100 से अधिक मौतों की सूचना मिली है। अधिकारियों ने आपातकालीन टीकाकरण अभियान (emergency vaccination drives) शुरू किए हैं और अंतर्राष्ट्रीय सहायता की अपील की है। यूनिसेफ (UNICEF) ने चेतावनी दी है कि बिना टीकाकरण वाले बच्चों को उच्च जोखिम है।
- भारत: अगस्त 2025 से जनवरी 2026 तक भारत में खसरे के 12,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए, जो उस अवधि के दौरान दुनिया भर में सबसे अधिक थे। अनुसंधान से पता चलता है कि कई बच्चों को पहली खुराक देर से मिलती है और सामाजिक-आर्थिक बाधाओं के कारण दूसरी खुराक अक्सर छूट जाती है।
- वैश्विक रुझान (Global trend): COVID-19 महामारी के दौरान दुनिया भर में खसरे के टीकाकरण की दर (immunisation rates) में गिरावट आई। 2024 में केवल 84 प्रतिशत बच्चों को खसरे के टीके की पहली खुराक मिली और 76 प्रतिशत को दूसरी खुराक मिली, जो हर्ड इम्युनिटी (herd immunity) के लिए आवश्यक 95 प्रतिशत सीमा से काफी नीचे है।
खसरे को रोकना
- टीकाकरण (Vaccination): खसरा-कण्ठमाला-रूबेला (measles-mumps-rubella - MMR) वैक्सीन की दो खुराकें दीर्घकालिक सुरक्षा (long-term protection) प्रदान करती हैं। पहली खुराक आमतौर पर 9 महीने में और दूसरी 15 से 18 महीने के बीच दी जाती है। बड़े बच्चों और वयस्कों के लिए कैच-अप अभियानों (Catch-up campaigns) की आवश्यकता हो सकती है जो अपने शॉट्स से चूक गए हैं।
- समयबद्धता (Timeliness): विलंबित टीकाकरण शिशुओं और छोटे बच्चों को कमजोर (vulnerable) छोड़ देता है। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (Health workers) और माता-पिता को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि खुराक समय पर दी जाए।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय: निगरानी प्रणालियों (Surveillance systems) को प्रकोपों का तुरंत पता लगाना चाहिए। टीकाकरण सेवाओं को मजबूत करना, गलत सूचनाओं को दूर करना और पोषण में सुधार करने से खसरे से होने वाली मौतों को कम किया जा सकता है।
महत्व
- बच्चों की रक्षा करना: खसरा मुख्य रूप से पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है, और जटिलताएं गंभीर हो सकती हैं। उच्च टीकाकरण कवरेज टालने योग्य (avoidable) मौतों को रोकता है।
- वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा (Global health security): एक देश में प्रकोप सीमाओं के पार तेजी से फैल सकता है। उन्मूलन लक्ष्यों (elimination targets) को प्राप्त करने के लिए समन्वित टीकाकरण प्रयास (Coordinated vaccination efforts) आवश्यक हैं।
निष्कर्ष
दक्षिण एशिया (South Asia) में खसरे का पुनरुत्थान टीकाकरण दरों में गिरावट के खतरों को रेखांकित करता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि बच्चे इस रोके जा सकने वाली बीमारी (preventable disease) से सुरक्षित हैं, सरकारों और समुदायों को समय पर टीकाकरण को प्राथमिकता देनी चाहिए, स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करना चाहिए और गलत सूचना (misinformation) से लड़ना चाहिए।
स्रोत: The Week, Cleveland Clinic