चर्चा में क्यों?
जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) ने तमिलनाडु के मेघमलाई वन्यजीव अभयारण्य में जीवों के सर्वेक्षण (faunal surveys) के दौरान नौ पहले से अज्ञात प्रजातियों की खोज की सूचना दी है। ये निष्कर्ष पश्चिमी घाट की समृद्ध जैव विविधता को रेखांकित करते हैं।
पृष्ठभूमि
मेघमलाई वन्यजीव अभयारण्य तमिलनाडु और केरल की सीमा के साथ स्थित है और पेरियार टाइगर रिजर्व (Periyar Tiger Reserve) के लिए एक बफर (buffer) के रूप में कार्य करता है। अभयारण्य की तलहटी में झाड़ीदार जंगल (scrub forests), घने सदाबहार जंगल (evergreen forests) और ऊंची ढलानों पर शोला घास के मैदान (shola grasslands) शामिल हैं। 2021 में इस क्षेत्र को पड़ोसी वन ब्लॉकों (forest blocks) के साथ मिलाकर श्रीविल्लीपुथुर-मेघमलाई टाइगर रिजर्व (Srivilliputhur–Megamalai Tiger Reserve) बनाया गया था। 2018 और 2022 के बीच ZSI वैज्ञानिकों ने 21 जीव समूहों (faunal groups) में व्यापक सर्वेक्षण (extensive surveys) किए।
सर्वेक्षण के निष्कर्ष
- सर्वेक्षणों में 977 प्रजातियां दर्ज की गईं, जिनमें 511 कशेरुक (vertebrates) (स्तनधारी, पक्षी, सरीसृप, उभयचर और मछलियां) और 466 अकशेरुकी (invertebrates) (कीड़े, मोलस्क और अन्य) शामिल हैं।
- विज्ञान के लिए नई नौ प्रजातियों का वर्णन किया गया: एक जंपिंग स्पाइडर (jumping spider), दो मेफ्लाइ (mayfly) प्रजातियां, एक डैमसेलफ्लाइ (damselfly), दो बार्क-लाइस (bark-lice) और तीन कॉकरोच (cockroaches)। इनमें से कई जीव छोटे हैं और सदाबहार जंगलों के पत्तों के कचरे (leaf litter) या धाराओं (streams) में रहते हैं।
- यह अभयारण्य स्थानिक प्रजातियों (endemic species) के एक उच्च अनुपात (high proportion) को आश्रय देता है। उदाहरण के लिए, दर्ज की गई 69 घोंघा प्रजातियों (snail species) में से लगभग 82 प्रतिशत केवल पश्चिमी घाट में पाई जाती हैं।
मेघमलाई का महत्व
- मेघमलाई के जंगलों और घास के मैदानों का मोज़ेक (mosaic) हाथियों, बाघों, तेंदुओं, नीलगिरि तहर (Nilgiri tahr), गौर, लायन-टेल्ड मकाक (lion-tailed macaques) और कई पक्षियों तथा तितलियों (butterfly) की प्रजातियों का समर्थन करता है। अतिरिक्त अकशेरुकी जीवों (invertebrates) की खोज से पता चलता है कि कई छोटे जीव बिना दस्तावेजीकरण (undocumented) के रह गए हैं।
- पेरियार टाइगर रिजर्व और पश्चिमी घाट के अन्य संरक्षित क्षेत्रों के बीच एक गलियारे (corridor) के रूप में कार्य करके, यह अभयारण्य वन्यजीव आबादी के बीच आनुवंशिक प्रवाह (genetic flow) को बनाए रखने में मदद करता है।
- नए निष्कर्ष आवास संरक्षण (habitat conservation), अतिक्रमण (encroachment) के कड़े नियंत्रण और विनियमित पर्यटन (regulated tourism) की आवश्यकता पर ध्यान आकर्षित करते हैं।
निष्कर्ष
ZSI के सर्वेक्षण एक जैव विविधता आश्रय (biodiversity haven) के रूप में मेघमलाई की भूमिका को उजागर करते हैं। इस अभयारण्य की रक्षा करने से न केवल करिश्माई मेगाफौना (charismatic megafauna) की रक्षा होगी बल्कि अनगिनत कम-ज्ञात प्रजातियों की भी रक्षा होगी जो पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य में योगदान करती हैं।
स्रोत: The Times of India