पर्यावरण (Environment)

Mesalina bishnoi: थार रेगिस्तान की छिपकली, राजस्थान और बिश्नोई समुदाय

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चर्चा में क्यों?

शोधकर्ताओं (Researchers) ने हाल ही में मेसालिना बिश्नोई (Mesalina bishnoi) का वर्णन किया, जो राजस्थान के बीकानेर (Bikaner) जिले के गजनेर (Gajner) के पास खोजी गई एक रेत छिपकली (sand lizard) की प्रजाति है। यह भारत में जीनस मेसालिना (Mesalina) का पहला पुष्ट रिकॉर्ड (confirmed record) है और इसका नाम बिश्नोई समुदाय (Bishnoi community) के लंबे समय से चले आ रहे वन्यजीव संरक्षण प्रयासों (wildlife conservation efforts) के सम्मान में रखा गया है। यह खोज थार रेगिस्तान (Thar Desert) की अनूठी जैव विविधता (biodiversity) पर प्रकाश डालती है。

पृष्ठभूमि

जीनस मेसालिना (Mesalina) में उत्तरी अफ्रीका (North Africa) और मध्य पूर्व (Middle East) में शुष्क वातावरण (arid environments) के अनुकूल छोटी, तेज छिपकलियां (swift lizards) शामिल हैं। बीसवीं सदी की शुरुआत के यात्रियों (Early twentieth‑century travellers) ने भारतीय रेगिस्तान से एक समान छिपकली का उल्लेख किया था, लेकिन कोई नमूना (specimen) एकत्र नहीं किया गया था। अगस्त 2025 में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (Zoological Survey of India) और क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों (regional universities) के वैज्ञानिकों ने गजनेर के पास चट्टानी, झाड़ियों से ढके टीलों (dunes) का सर्वेक्षण किया। उन्होंने एक जैतून-भूरे रंग की पीठ (olive‑brown back) और पीले रंग के निचले हिस्से वाली एक छोटी छिपकली को पकड़ा और उसकी जांच की। विस्तृत रूपात्मक विश्लेषण (Detailed morphological analysis) और आनुवंशिक अनुक्रमण (genetic sequencing) ने पुष्टि की कि यह मेसालिना की पहले से अज्ञात प्रजाति (unknown species) थी。

विवरण और आवास

  • आकार और रंग (Size and colour): छिपकली के थूथन-से-वेंट की लंबाई (snout‑to‑vent length) लगभग 39 मिमी होती है। इसकी पीठ भूरे से जैतून-भूरे रंग (greyish to olive‑brown) की होती है जिसमें फीकी पृष्ठीय धारियां (faint dorsolateral stripes) और सफेद धब्बों (white spots) वाले अनियमित गहरे धब्बे (irregular dark blotches) होते हैं। प्रत्येक आंख के पीछे काले निशान (black markings) की एक श्रृंखला एक अर्धवृत्ताकार बैंड (semicircular band) बनाती है।
  • व्यवहार (Behaviour): मेसालिना (Mesalina) की अन्य प्रजातियों की तरह, यह दिनचरी (diurnal) और बेहद चुस्त (agile) होती है, जो शिकारियों (predators) से बचने के लिए चट्टानों और विरल झाड़ियों के बीच भागती है। यह कीड़ों (insects) को खाती है और ठंडी सुबह और शाम के समय सक्रिय (active) रहती है।
  • आवास (Habitat): यह प्रजाति थार रेगिस्तान (Thar Desert) की विशिष्ट बिखरी हुई झाड़ियों और घासों वाले बंजर, पथरीले परिदृश्य (stony landscape) में पाई गई थी। इस तरह के सूक्ष्म आवासों (microhabitats) में अधिक अनदेखे सरीसृप (reptiles) और आर्थ्रोपोड (arthropods) हो सकते हैं।
  • नामकरण (Naming): विशिष्ट उपकथा (specific epithet) "बिश्नोई (bishnoi)" राजस्थान के बिश्नोई समुदाय (Bishnoi community) को स्वीकार करती है, जिन्होंने सदियों से वन्यजीवों और पेड़ों की रक्षा की है। छिपकली का नाम उनके नाम पर रखकर, शोधकर्ताओं को रेगिस्तान संरक्षण (desert conservation) के बारे में जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है।

महत्व

  • जैव विविधता संकेतक (Biodiversity indicator): यह खोज दर्शाती है कि थार रेगिस्तान (Thar Desert) अद्वितीय कशेरुक जीवों (vertebrate fauna) को आश्रय देता है जो कम ज्ञात हैं। अधिक सर्वेक्षण (More surveys) अतिरिक्त प्रजातियों (additional species) को प्रकट कर सकते हैं और नाजुक पारिस्थितिक तंत्र (fragile ecosystems) को चित्रित करने में मदद कर सकते हैं।
  • संरक्षण संदेश (Conservation message): संरक्षण योजना (conservation planning) में रेगिस्तानी आवासों (Desert habitats) को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। नई प्रजातियों को मान्यता देना अतिवृष्टि (overgrazing), खनन (mining) और जलवायु परिवर्तन (climate change) से शुष्क परिदृश्यों को बचाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
  • सांस्कृतिक संबंध (Cultural connection): नई प्रजातियों को बिश्नोई समुदाय (Bishnoi community) से जोड़ना पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान (traditional ecological knowledge) को श्रद्धांजलि देता है और इस विचार को पुष्ट करता है कि स्थानीय समुदाय वन्यजीव संरक्षण में प्रमुख भागीदार (key partners) हैं।

निष्कर्ष

मेसालिना बिश्नोई (Mesalina bishnoi) हमें याद दिलाती है कि भारत के रेगिस्तान अत्यधिक गर्मी और सूखे के अनुकूल प्राणियों के साथ जीवित प्रयोगशालाएं (living laboratories) हैं। इस तरह की प्रजातियों का दस्तावेजीकरण न केवल विकास (evolution) के बारे में हमारी समझ को समृद्ध करता है बल्कि नाजुक पारिस्थितिक तंत्र (fragile ecosystems) के प्रबंधन को भी प्रोत्साहित करता है。

स्रोत

TOI

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