चर्चा में क्यों?
भारत की मौसम एजेंसी चरम मौसमी घटनाओं (extreme weather events) के प्रति तैयारियों (preparedness) को बेहतर बनाने के लिए मल्टी-हैजार्ड अर्ली वार्निंग डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (Multi‑Hazard Early Warning Decision Support System - MHEW-DSS) नामक एक नया डिजिटल पूर्वानुमान प्लेटफॉर्म लागू कर रही है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) के 'मिशन मौसम (Mission Mausam)' कार्यक्रम के तहत विकसित इस प्लेटफॉर्म को हाल ही में आए प्रमुख चक्रवातों और बाढ़ के दौरान लोगों की जान बचाने का श्रेय दिया गया है। 3 अप्रैल 2026 को इस बात पर प्रकाश डाला गया कि इस सिस्टम की मदद से अधिकारी समय पर अलर्ट जारी कर सके और विभिन्न स्रोतों से प्राप्त डेटा को एकीकृत (integrating data) करके अधिक समय रहते (longer lead times) चेतावनी दे सके।
पृष्ठभूमि
इस सिस्टम के बनने से पहले, भारत में बारिश, चक्रवात, लू (heat waves) और कोहरे जैसे अलग-अलग खतरों के लिए मौसम के पूर्वानुमान अलग-अलग जारी किए जाते थे। इसके लिए मैनुअल प्रक्रियाओं और सीमित डेटा एसिमिलेशन (data assimilation) का उपयोग किया जाता था। एकीकरण (integration) की कमी का मतलब था कि चेतावनियों में कभी-कभी देरी होती थी या वे असंगत (inconsistent) होती थीं, और स्थानीय अधिकारियों को बिना पर्याप्त उपकरणों के जटिल मौसम संबंधी डेटा की व्याख्या करनी पड़ती थी। नवंबर 2022 में, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने वायुमंडलीय अवलोकनों (atmospheric observations), उपग्रह और रडार छवियों, और संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल (numerical weather prediction models) को एक साथ लाने के लिए एक एकीकृत निर्णय-समर्थन प्रणाली (unified decision‑support system) विकसित करना शुरू किया। यह प्लेटफॉर्म जनवरी 2024 में लॉन्च किया गया था और अगस्त 2023 से पूरी तरह से चालू है। यह सरकार की डिजिटल गवर्नेंस (digital governance) पहलों के अनुरूप है और इसे देश भर के 70 पूर्वानुमान कार्यालयों (forecasting offices) का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
विशेषताएं और संचालन (Features and operation)
- एकीकृत डेटा एकत्रीकरण (Integrated data assimilation): यह सिस्टम स्वचालित रूप से उपग्रहों, रडारों, ओशन बुआ (ocean buoys) और स्वचालित मौसम स्टेशनों (automatic weather stations) के माध्यम से लगभग 90 प्रतिशत अवलोकन संबंधी डेटा एकत्र करता है। यह इस जानकारी को एक एकीकृत डेटाबेस में मिलाता है और आम सहमति (consensus) वाले पूर्वानुमान उत्पन्न करने के लिए कई संख्यात्मक मॉडल (numerical models) चलाता है।
- अधिक लीड टाइम (Longer lead times): विभिन्न मॉडलों के आउटपुट में सामंजस्य स्थापित करके, पूर्वानुमानकर्ताओं ने सार्वजनिक चेतावनियों के लिए लीड टाइम को पांच दिन से बढ़ाकर लगभग सात दिन कर दिया है। तेजी से होने वाली प्रोसेसिंग, डेटा एकत्र करने और पूर्वानुमान प्रसारित (dissemination) करने के बीच के समय को भी कम करती है।
- खतरे-विशिष्ट मॉड्यूल (Hazard‑specific modules): अलग-अलग मॉड्यूल उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (tropical cyclones), भारी बारिश, लू, आंधी और कोहरे का विश्लेषण करते हैं। प्रत्येक मॉड्यूल स्थान-विशिष्ट जोखिम मूल्यांकन (location‑specific risk assessments) प्रदान करने के लिए मॉडल आउटपुट के साथ वास्तविक समय (real‑time) के अवलोकनों को जोड़ता है।
- उपयोगकर्ता के अनुकूल इंटरफेस (User‑friendly interface): एक ऑनलाइन डैशबोर्ड जिला अधिकारियों, आपदा प्रबंधकों (disaster managers) और किसानों को जोखिम के नक्शे (risk maps), बारिश की संभावनाएं और हवा के पूर्वानुमान देखने की अनुमति देता है। यह सिस्टम स्वचालित रूप से कलर-कोडेड चेतावनियां (colour‑coded warnings) और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने (evacuation) या स्कूल बंद करने जैसी सिफारिशें उत्पन्न करता है।
- मल्टी-चैनल प्रसार (Multi‑channel dissemination): अलर्ट और एडवाइजरी टेक्स्ट संदेश, टेलीविजन, रेडियो, सोशल मीडिया और IMD के मोबाइल ऐप के माध्यम से दिए जाते हैं। एक ऑडिट ट्रेल निर्णय लेने में पारदर्शिता (transparency) सुनिश्चित करता है।
प्रभाव और महत्व (Impact and significance)
- जान बचाना (Saving lives): 2023 में बिपरजॉय और दाना चक्रवातों और 2024-25 में आए अन्य तूफानों के दौरान, इस सिस्टम के माध्यम से जारी की गई प्रारंभिक चेतावनियों (early warnings) ने राज्य सरकारों को कमजोर समुदायों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद की। अधिकारियों ने इन घटनाओं के दौरान हताहतों (casualties) की संख्या को लगभग शून्य करने का श्रेय इसी प्लेटफॉर्म को दिया।
- आर्थिक लाभ (Economic benefits): बेहतर पूर्वानुमान किसानों को फसल के काम की योजना बनाने, मछुआरों को खतरनाक समुद्र से बचने और बिजली कंपनियों को आपूर्ति और मांग के प्रबंधन में मदद करते हैं। प्रारंभिक चेतावनियां बुनियादी ढांचे (infrastructure) को सुरक्षित करने के लिए अधिक समय देकर संपत्ति के नुकसान को भी कम करती हैं।
- स्केलेबल और रिप्लिकेबल (Scalable and replicable): इसका आर्किटेक्चर मॉड्यूलर है, जिससे राज्य और पड़ोसी देश इसे स्थानीय उपयोग के लिए अपना सकते हैं। इसका विस्तार नदी-बाढ़ पूर्वानुमान, भूस्खलन (landslides) और अन्य खतरों को शामिल करने के लिए किया जा सकता है।
- पारदर्शिता और जवाबदेही (Transparency and accountability): स्वचालित डेटा संग्रह और डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग मैनुअल त्रुटियों (manual errors) को कम करते हैं और आपदा के बाद की समीक्षाओं के लिए स्पष्ट सबूत प्रदान करते हैं। यह सिस्टम डेटा-संचालित शासन (data‑driven governance) के लिए भारत के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है।
निष्कर्ष
मल्टी-हैजार्ड अर्ली वार्निंग डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (MHEW-DSS) भारत की आपदा तैयारियों में एक महत्वपूर्ण कदम है। डेटा स्ट्रीम (data streams) को एकीकृत करके और वर्कफ़्लो (workflows) को स्वचालित करके, यह पूर्वानुमानकर्ताओं और अधिकारियों को समय पर और कार्रवाई योग्य (actionable) जानकारी से लैस करता है। जैसे-जैसे चरम मौसमी घटनाएं अधिक लगातार होती जा रही हैं, ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म में निरंतर निवेश से भारत को जलवायु लचीलापन (climate resilience) बनाने और जीवन और आजीविका की रक्षा करने में मदद मिलेगी।
स्रोत: पीआईबी (PIB)