समाचार में क्यों?
वन्यजीव विशेषज्ञों ने अलार्म उठाया है कि कोल्लूर में तीर्थयात्रियों को सेवा देने वाले होटलों और लॉज से बिना उपचारित (untreated) सीवेज सौपर्णिका नदी (Souparnika river) में बह रहा है और मूकांबिका वन्यजीव अभयारण्य (Mookambika Wildlife Sanctuary) के मुख्य क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है। यह प्रदूषण इस पश्चिमी घाट रिज़र्व के जलीय जीवन और नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा है।
पृष्ठभूमि
मूकांबिका वन्यजीव अभयारण्य (Mookambika Wildlife Sanctuary) कर्नाटक के उडुपी जिले में स्थित है और लगभग 370 वर्ग किलोमीटर में फैला है। जैव विविधता से समृद्ध पश्चिमी घाट (Western Ghats) में स्थित, यह दक्षिण में सोमेश्वर वन्यजीव अभयारण्य (Someshwara Wildlife Sanctuary) और उत्तर में शरावती वन्यजीव अभयारण्य (Sharavathi Wildlife Sanctuary) के बीच एक गलियारा (corridor) बनाता है। इस अभयारण्य का नाम इसकी परिधि पर स्थित एक प्रमुख तीर्थस्थल कोल्लूर के मूकांबिका मंदिर से लिया गया है। इसके मध्य में कोडाचाद्री शिखर (Kodachadri peak) उगता है, जिसे अक्सर "वानस्पतिक स्वर्ग (botanical paradise)" कहा जाता है। चक्र और सौपर्णिका नदियाँ रिज़र्व से होकर बहती हैं, जो सदाबहार, अर्ध-सदाबहार और नम पर्णपाती (moist deciduous) वनों को पोषण देती हैं।
पारिस्थितिक विशेषताएं
- वनस्पति: वनों में डिप्तेरोकार्पस इंडिकस (Dipterocarpus indicus), कैलोफिलम टोमेंटोसम (Calophyllum tomentosum) और होपिया पार्विफ्लोरा (Hopea parviflora) जैसे पेड़ होते हैं। एक दुर्लभ चढ़ाई वाला पौधा, कोस्किनियम फेनेस्ट्रेटम (Coscinium fenestratum), भी यहाँ उगता है। प्राकृतिक वनस्पति के साथ सागौन (teak) के बागानों के छोटे-छोटे हिस्से भी मौजूद हैं।
- जीव-जंतु: यह अभयारण्य स्लेंडर लोरिस (slender loris) और शेर-पूंछ वाले मैकाक (lion-tailed macaque) जैसी मायावी प्रजातियों का घर है। बड़े स्तनधारियों में बाघ, तेंदुआ, भालू (sloth bears), सांभर और चीतल हिरण, गौर और जंगली सूअर शामिल हैं। ऊदबिलाव (Otters) और अन्य जलीय जीवन साफ नदियों पर निर्भर करते हैं।
प्रदूषण की चिंता
- सीवेज निर्वहन: तीर्थयात्रियों को सेवा देने वाले वाणिज्यिक प्रतिष्ठान सौपर्णिका नदी में सीवेज और कीचड़ (sludge) छोड़ रहे हैं। शुष्क गर्मी के महीनों के दौरान नदी का प्रवाह कम हो जाता है, इसलिए बिना उपचारित अपशिष्ट सीधे अभयारण्य के मुख्य क्षेत्र में चला जाता है।
- कानूनी कार्रवाई: एक कार्यकर्ता ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (National Green Tribunal - NGT) के समक्ष एक याचिका दायर की। जनवरी 2026 में NGT ने उडुपी के उपायुक्त और कर्नाटक शहरी जल आपूर्ति और जल निकासी बोर्ड को प्रदूषण को रोकने के लिए एक योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसमें अपशिष्ट मात्रा, उपचार क्षमता और समयसीमा का विवरण शामिल है।
- स्वच्छ नदियों का महत्व: सौपर्णिका और चक्र नदियाँ अभयारण्य के जंगलों और वन्यजीवों को बनाए रखती हैं। प्रदूषण मछलियों, उभयचरों (amphibians) और अन्य जलीय जीवों को नुकसान पहुंचा सकता है और नदियों से पानी पीने वाले या भोजन करने वाले जानवरों में जैव-संचय (bioaccumulate) हो सकता है।
महत्व
मूकांबिका वन्यजीव अभयारण्य पश्चिमी घाट (Western Ghats) के भीतर स्थित है, जो एक यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल और दुनिया के जैव विविधता हॉटस्पॉट में से एक है। दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण और पारिस्थितिक संपर्क (ecological connectivity) बनाए रखने के लिए इसकी नदियों को सीवेज से बचाना आवश्यक है। यह मुद्दा धार्मिक पर्यटन को पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है।
स्रोत: Deccan Herald