विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

Morchella Mushroom: गुच्छी मोरेल, SKUAST खेती और कवक

Morchella Mushroom: गुच्छी मोरेल, SKUAST खेती और कवक

चर्चा में क्यों?

श्रीनगर में शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST) के वैज्ञानिकों ने पहली बार नियंत्रित परिस्थितियों में मोर्चेला मशरूम - जिसे लोकप्रिय रूप से मोरेल (morel) या गुच्ची (gucchi) के रूप में जाना जाता है - की सफलतापूर्वक खेती की है। यह सफलता एक कवक (fungus) के वाणिज्यिक उत्पादन (commercial production) की उम्मीद जगाती है जो बाजारों में ₹15,000 और ₹40,000 प्रति किलोग्राम के बीच बिकता है और पहले केवल जंगल से ही इकट्ठा किया जाता था।

पृष्ठभूमि

मोर्चेला एस्कोमाइकोटा डिवीजन (Ascomycota division) के मोर्चेलेसी परिवार (Morchellaceae family) में खाद्य कवक (edible fungi) का एक जीनस (genus) है। असली मोरेल्स की विशेषता एक विशिष्ट हनीकॉम्ब-जैसे टोपी (honeycomb-like cap) है जो एक खोखले, सफेद तने पर उठी लकीरों (ridges) और गड्ढों (pits) से बनी होती है। भारत में वे प्राकृतिक रूप से जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में ऊंचाई वाले शंकुधारी वनों (coniferous forests) में वसंत ऋतु में एक संक्षिप्त बरसात की अवधि के दौरान उगते हैं। क्योंकि वे हर साल एक ही स्थान पर मज़बूती से नहीं दिखाई देते हैं और उनके विकास के लिए विशिष्ट माइक्रॉक्लाइमेट (microclimates) और सहजीवी पौधे संघों (symbiotic plant associations) की आवश्यकता होती है, इसलिए जंगली संग्रह श्रम-गहन (labour-intensive) और अप्रत्याशित (unpredictable) है।

गुण और उपयोग (Properties and uses)

  • गॉरमेट स्वादिष्टता (Gourmet delicacy): मोरेल्स उनके मिट्टी (earthy), पौष्टिक स्वाद (nutty flavour) और मांसल बनावट के लिए मूल्यवान हैं। शेफ इन्हें बिरयानी, करी, सूप और सॉस में मिलाते हैं।
  • पोषण मूल्य (Nutritional value): वे वसा में कम होने के साथ-साथ प्रोटीन, फाइबर, विटामिन डी और आयरन, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे खनिजों से भरपूर होते हैं।
  • औषधीय लाभ (Medicinal benefits): अध्ययन बताते हैं कि मोरेल्स में एंटीऑक्सिडेंट और सूजन-रोधी (anti-inflammatory) यौगिक होते हैं जो प्रतिरक्षा कार्य (immune function) को बढ़ावा दे सकते हैं और यकृत के स्वास्थ्य (liver health) का समर्थन कर सकते हैं।
  • उपस्थिति (Appearance): मोरेल्स हल्के पीले (pale yellow) से लेकर गहरे भूरे (dark brown) रंग के होते हैं। टोपी की हनीकॉम्ब संरचना सतह क्षेत्र (surface area) को अधिकतम करती है, स्वाद अवशोषण (flavour absorption) को बढ़ाती है। खोखले तने और टोपी मूल रूप से जुड़े हुए हैं, जो उन्हें झूठे मोरेल्स (false morels) (गाइरोमिट्रा - Gyromitra प्रजाति) जैसे जहरीले लुक-अलाइक से अलग करते हैं।

खेती की सफलता (Cultivation breakthrough)

SKUAST टीम ने 1,000 से अधिक साइटों से जंगली मोरेल्स एकत्र किए, मिट्टी, माइक्रॉक्लाइमेट और वनस्पति संघों का विश्लेषण किया, और खेती के लिए उपयुक्त उपभेदों (strains) का चयन किया। पॉलीहाउस और खुले भूखंडों (open plots) में इन स्थितियों की प्रतिकृति (replicating) करके, उन्होंने कई उपभेदों में फलने (fruiting) को प्राप्त किया। नियंत्रित खेती घटती जंगली आबादी पर निर्भरता को कम करती है और किसानों, युवाओं और उद्यमियों (entrepreneurs) के लिए फसल को व्यावसायिक रूप से उगाने के रास्ते खोलती है। विश्वविद्यालय ने प्रौद्योगिकी का पेटेंट कराने और स्थानीय समुदायों को उच्च मूल्य वाले मशरूम की खेती (high-value mushroom farming) में प्रशिक्षित करने की योजना बनाई है।

महत्व

  • आर्थिक अवसर (Economic opportunity): खेती किए गए मोरेल्स हिमालयी किसानों के लिए एक आकर्षक नकदी फसल (cash crop) बन सकते हैं, जिससे आय में विविधता (diversifying incomes) आएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा मिलेगा।
  • संरक्षण (Conservation): पालतू बनाना (Domestication) प्राकृतिक जंगलों पर दबाव को कम करता है, जहां गहन चारा खोजने से अक्सर मिट्टी और वनस्पति को नुकसान पहुंचता है।
  • वैज्ञानिक मील का पत्थर (Scientific milestone): मोरेल्स के जटिल जीवन चक्र पर काबू पाना कवक जीव विज्ञान (fungal biology) में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है और अन्य कठिन-से-खेती वाली प्रजातियों में आगे के शोध को प्रेरित कर सकता है।

निष्कर्ष

मोर्चेला मशरूम की सफल खेती अनिश्चित जंगली फसल (wild harvests) से नियंत्रित उत्पादन की ओर एक आदर्श बदलाव (paradigm shift) का प्रतीक है। इस तकनीक के उचित प्रसार के साथ, पहाड़ी क्षेत्रों के समुदाय एक टिकाऊ और लाभदायक फसल (profitable crop) से लाभान्वित हो सकते हैं।

स्रोत: आईई (IE)

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