खबरों में क्यों?
तमिलनाडु में नीलगिरि जिले (Nilgiris district) के प्रशासन ने हाल ही में 2026 के लोकसभा (Lok Sabha) चुनावों से पहले दूरदराज के आदिवासी बस्तियों का जायजा लेने के लिए Mudumalai Tiger Reserve के घने जंगलों का दौरा किया। अधिकारियों ने मोयार नदी (Moyar River) को कोराकल (coracle) द्वारा पार करके थेंगुमारहाडा (Thengumarahada) गांव तक पहुँच प्राप्त की और आकलन किया कि निवासियों की मतदान केंद्रों पर बिजली, पानी, शौचालय और रैंप तक पहुँच है या नहीं। यह दौरा भारत के सबसे पुराने वन्यजीव अभयारण्यों (wildlife sanctuaries) में से एक में वनवासियों के लिए मतदान को सुलभ बनाने के प्रयासों पर प्रकाश डालता है।
पृष्ठभूमि
मुदुमलाई (Mudumalai) तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के त्रि-जंक्शन (tri-junction) पर स्थित एक संरक्षित क्षेत्र (protected area) है। 1940 में एक वन्यजीव अभयारण्य के रूप में स्थापित, यह 850 से 1,250 मीटर की ऊंचाई पर घने जंगल और खुले घास के मैदान के लगभग 321 वर्ग किलोमीटर को कवर करता है। 1986 में यह Nilgiri Biosphere Reserve का हिस्सा बन गया, और 2007 में इसे टाइगर रिजर्व के रूप में अधिसूचित किया गया। मोयार नदी (Moyar River) रिजर्व से होकर बहती है और राज्य की सीमा बनाती है। 400 से अधिक पौधों की प्रजातियों, हाथियों, गौर (gaurs) और तेंदुओं (leopards) का घर, मुदुमलाई लुप्तप्राय बंगाल टाइगर (Bengal tigers) की आबादी का भी घर है। इसमें भारी मानसून वर्षा होती है और इसका नाम तमिल शब्दों से लिया गया है जिसका अर्थ है "पहली पहाड़ी" (first hill) या "प्राचीन वन" (ancient forest)।
मतदाता संपर्क (Voter outreach) क्यों मायने रखता है
- दूरदराज की बस्तियाँ: कई आदिवासी समुदाय रिजर्व के बफर जोन (buffer zones) के अंदर रहते हैं। कुछ बस्तियों तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता छोटी नावों में नदी पार करना है, जिससे मतदान सामग्री का परिवहन करना और नागरिक सुविधाएँ प्रदान करना मुश्किल हो जाता है।
- समावेशन (Inclusiveness): मतदान केंद्रों पर पानी, बिजली और शौचालय सुनिश्चित करने से आदिवासी मतदाताओं के बीच अधिक मतदान को बढ़ावा मिलता है, जो अन्यथा उपेक्षित महसूस कर सकते हैं। यह सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (universal adult suffrage) के प्रति भारत की संवैधानिक प्रतिबद्धता को पूरा करता है।
- संरक्षण और आजीविका: कई निवासी आय के लिए वनोपज (forest produce) और इको-टूरिज्म (eco-tourism) पर निर्भर हैं। उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में शामिल करने से विश्वास मजबूत होता है और दीर्घकालिक संरक्षण प्रयासों का समर्थन होता है।
महत्व
- लोकतंत्र को सक्षम करते हुए वन्यजीवों की रक्षा करना: मुदुमलाई से पता चलता है कि जंगल को संरक्षित करने से मानवाधिकारों (human rights) में बाधा नहीं आती है। सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था करके और सुविधाओं में सुधार करके, अधिकारी यह सुनिश्चित करते हैं कि संरक्षण लक्ष्य और चुनावी भागीदारी एक साथ मौजूद हों।
- पहुँच (Accessibility) पर ध्यान: यह सक्रिय निरीक्षण विकलांग मतदाताओं के लिए रैंप (ramps) और उचित स्वच्छता जैसे बाधा-मुक्त बुनियादी ढांचे (barrier-free infrastructure) पर जोर देता है, जो अन्य दूरस्थ क्षेत्रों के लिए एक मिसाल कायम करता है।
- अन्य रिजर्वों के लिए मॉडल: आदिवासी बस्तियों वाले कई टाइगर रिजर्वों के साथ, नीलगिरि की पहल सुंदरबन (Sundarbans) और सिमलिपाल (Simlipal) जैसे क्षेत्रों में इसी तरह के आउटरीच को प्रेरित कर सकती है जहां ग्रामीणों को मतदान के दिन रसद संबंधी चुनौतियों (logistical challenges) का सामना करना पड़ता है।
निष्कर्ष
नीलगिरि जिले के प्रयास दर्शाते हैं कि जैव विविधता की रक्षा करने और लोकतांत्रिक अधिकारों को बनाए रखने के बीच एक संवेदनशील संतुलन कैसे प्राप्त किया जा सकता है। दूरस्थ वन समुदायों के करीब आवश्यक सेवाओं को लाकर, अधिकारी मतदान प्रतिशत को बढ़ावा देने और यह पुष्टि करने की उम्मीद करते हैं कि प्रत्येक वोट मायने रखता है - यहां तक कि एक टाइगर रिजर्व के भीतर भी।
स्रोत: The New Indian Express, Mudumalai National Park – Wikipedia