समाचार में क्यों?
Assam के वन और पर्यावरण मंत्री ने घोषणा की कि Nameri Tiger Reserve में बाघों की संख्या 2022 में 3 से बढ़कर 2025 के अंत तक 12 हो गई है। Wildlife Institute of India ने इस चार गुना वृद्धि की पुष्टि की, और इसे संरक्षण का एक बड़ा मील का पत्थर बताया। मंत्री ने दशकों बाद रिज़र्व के सैटेलाइट कोर में दो बाघों की वापसी की भी सूचना दी।
पृष्ठभूमि
Nameri Tiger Reserve, Assam के सोनितपुर जिले में Arunachal Pradesh की तलहटी में स्थित है। यह रिज़र्व Nameri National Park को आस-पास के आरक्षित वनों के साथ मिलाकर Project Tiger के तहत मार्च 2000 में बनाया गया था। इसके कोर क्षेत्र में लगभग 200 वर्ग किलोमीटर शामिल है, जबकि नादुआर और बालीपारा वनों के बफर क्षेत्र से इसका कुल क्षेत्रफल 344 वर्ग किलोमीटर हो जाता है। 2015 में 120 वर्ग किलोमीटर के सोनई-रूपई वन्यजीव अभयारण्य (Sonai-Rupai Wildlife Sanctuary) को सैटेलाइट कोर घोषित किया गया था। यह परिदृश्य पूर्वोत्तर Brahmaputra घाटी का हिस्सा है और यहां हाथियों, जंगली कुत्तों और पक्षियों की 300 से अधिक प्रजातियों का घर है।
प्रमुख बिंदु
- 2022 और 2025 के बीच बाघों की संख्या 3 से बढ़कर 12 हो गई, जो शिकार के आधार (prey base) और आवास संरक्षण में सुधार का संकेत देती है।
- एंटी-पोचिंग गश्त, गांवों के पुनर्वास और नियंत्रित चराई ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया है, जिससे इन बड़ी बिल्लियों (big cats) के लिए सुरक्षित स्थितियां पैदा हुई हैं।
- दशकों बाद सोनई-रूपई सैटेलाइट कोर में 2 बाघ दर्ज किए गए, जो दर्शाता है कि गलियारे (corridors) काम कर रहे हैं और जानवर अपने पूर्व क्षेत्रों को पुनः प्राप्त कर रहे हैं।
- यह रिज़र्व Arunachal Pradesh में Pakke Tiger Reserve के साथ सटा हुआ है, जो बाघों की आबादी के बीच आनुवंशिक आदान-प्रदान की अनुमति देता है।
- Nameri सफेद पंख वाले वुड डक (white-winged wood duck) और अन्य लुप्तप्राय प्रजातियों का भी घर है; संरक्षण उपायों से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को लाभ होता है।
निष्कर्ष
Nameri की सफलता यह दर्शाती है कि निरंतर संरक्षण निवेश से ठोस परिणाम मिलते हैं। बढ़ती आबादी को बनाए रखने और शिकार एवं अतिक्रमण जैसे खतरों की वापसी को रोकने के लिए निरंतर निगरानी, सामुदायिक जुड़ाव और आवास कनेक्टिविटी आवश्यक होगी।