Social (सामाजिक मुद्दे)

Namo Drone Didi Scheme: महिला स्वयं सहायता समूह, सटीक कृषि और ग्रामीण उद्यमिता

Namo Drone Didi Scheme: महिला स्वयं सहायता समूह, सटीक कृषि और ग्रामीण उद्यमिता

समाचारों में क्यों?

29 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2023-24 से 2025-26 के लिए ₹1,261 करोड़ के परिव्यय (outlay) के साथ नमो ड्रोन दीदी (Namo Drone Didi) योजना को मंजूरी दी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों (self-help groups - SHGs) को 15,000 ड्रोन प्रदान करना है, जिससे वे कृषि सेवाएं प्रदान कर सकें और ग्रामीण उद्यमिता (rural entrepreneurship) को बढ़ावा मिल सके।

पृष्ठभूमि

भारत दक्षता (efficiency) में सुधार करने और रसायनों (chemicals) के प्रति किसानों के संपर्क (exposure) को कम करने के लिए उर्वरक छिड़काव (fertiliser spraying), बीज प्रसारण (seed broadcasting) और फसल निगरानी (crop monitoring) जैसे कार्यों के लिए कृषि में ड्रोन के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है। नमो ड्रोन दीदी योजना पहले की पहलों जैसे 'ड्रोन प्रेरणा (Drone Prerana)' परियोजना और 'ड्रोन शक्ति (Drone Shakti)' कार्यक्रम पर आधारित है。 यह आजीविका समर्थन (livelihood support) के साथ प्रौद्योगिकी के संयोजन (combining) द्वारा एसएचजी—विशेषकर महिलाओं—को सशक्त बनाने (empower) का प्रयास करती है।

मुख्य विशेषताएं (Key features)

  • वित्तीय सहायता (Financial assistance): सरकार ड्रोन की लागत का 80 प्रतिशत (प्रति ड्रोन ₹8 लाख तक) वित्तपोषित करेगी, शेष राशि बैंक ऋण (bank loans) या एसएचजी योगदान के माध्यम से वित्तपोषित की जाएगी।
  • प्रशिक्षण और सहायता (Training and support): प्रत्येक लाभार्थी (beneficiary) एसएचजी ड्रोन संचालन, रखरखाव और बुनियादी उद्यमिता में प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए एक पायलट और एक सहायक को नामित करेगा。 इस पैकेज में ड्रोन, अतिरिक्त बैटरी (spare batteries), स्प्रेयर उपकरण और रखरखाव अनुबंध (maintenance contracts) शामिल हैं।
  • पैमाना (Scale): पायलट जिलों (pilot districts) में लगभग 500 ड्रोन पहले ही आपूर्ति किए जा चुके हैं。 अनुमोदित योजना 2025-26 तक पूरे भारत में 15,000 ड्रोन वितरित करने की परिकल्पना (envisages) करती है, जिसमें उच्च कृषि गतिविधि वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।

अपेक्षित लाभ (Expected benefits)

  • समान रूप से इनपुट (inputs) लागू करके सटीक कृषि (precision agriculture) को बढ़ाता है और मैनुअल छिड़काव से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को कम करता है।
  • महिलाओं के लिए आय-सृजन (income-generating) के अवसर पैदा करता है, ग्रामीण उद्यमिता और वित्तीय स्वतंत्रता (financial independence) को बढ़ावा देता है।
  • आधुनिक प्रौद्योगिकी (modern technology) को अपनाने की सुविधा प्रदान करता है और उत्पादकता (productivity) में सुधार करता है, संभावित रूप से फसल की पैदावार (crop yields) बढ़ाता है और इनपुट लागत को कम करता है।

स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) · इंडियन केमिकल न्यूज़ (Indian Chemical News) · ग्लोबल एग्रीकल्चर (Global Agriculture)

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