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National Maritime Day: SS Loyalty, सागरमाला परियोजना और समुद्री अर्थव्यवस्था

National Maritime Day: SS Loyalty, सागरमाला परियोजना और समुद्री अर्थव्यवस्था

खबरों में क्यों?

5 अप्रैल 2026 को भारत ने "Maritime India – Empowering Progress" थीम के साथ National Maritime Day (राष्ट्रीय समुद्री दिवस) मनाया। प्रधानमंत्री और शिपिंग नेताओं ने भारत की लंबी तटरेखा (coastline), नाविकों (seafarers) और बंदरगाह कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका, और देश की बढ़ती समुद्री अर्थव्यवस्था (maritime economy) का समर्थन करने के लिए बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए इस दिन को मनाया।

पृष्ठभूमि

SS Loyalty की ऐतिहासिक यात्रा को चिह्नित करने के लिए 1964 से हर साल National Maritime Day मनाया जाता है। 5 अप्रैल 1919 को यह जहाज भारतीय ध्वज (Indian flag) के तहत मुंबई से लंदन जाने वाला पहला भारतीय व्यापारिक जहाज (merchant ship) बन गया था। यह दिन राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में भारत के समुद्री क्षेत्र (maritime sector) के योगदान का सम्मान करता है। आज भारत का लगभग 90 प्रतिशत व्यापार मात्रा (volume) के हिसाब से समुद्र के रास्ते होता है, जिससे कुशल बंदरगाह और शिपिंग विकास के लिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं। यह दिन उन नाविकों को भी याद करता है जो सुचारू संचालन सुनिश्चित करते हैं और समुद्र में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का बहादुरी से सामना करते हैं।

2026 में मुख्य संदेश

  • विषय (Theme): 2026 की थीम "Maritime India – Empowering Progress" ने भारत के विकास में शिपिंग और रसद (logistics) के महत्व को रेखांकित किया। इसने बंदरगाहों को उन्नत करने और तटीय तथा अंतर्देशीय जलमार्गों (inland waterways) को बढ़ावा देने के लिए सरकार, निजी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के बीच सहयोग का आह्वान किया।
  • बुनियादी ढांचे पर फोकस: वक्ताओं ने भारत के 12 प्रमुख बंदरगाहों के आधुनिकीकरण, विश्व स्तरीय शिपयार्ड विकसित करने और Sagarmala तथा PM Gati Shakti कार्यक्रमों के माध्यम से रसद (logistics) को एकीकृत करने पर जोर दिया। उन्नत बंदरगाह दक्षता (port efficiency) निर्यातकों और आयातकों के लिए लागत कम कर सकती है।
  • नाविकों की मान्यता: इस दिन नाविकों, गोदी कर्मचारियों (dock workers) और समुद्री प्रशिक्षण संस्थानों (maritime training institutes) के योगदान का जश्न मनाया गया। सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रदर्शन के लिए उत्कृष्ट नाविकों और कंपनियों को पुरस्कार दिए गए।
  • सतत विकास (Sustainable growth): अधिकारियों ने ग्रीन पोर्ट, नवीकरणीय ऊर्जा और कम कार्बन शिपिंग (low-carbon shipping) की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। भारत का लक्ष्य समुद्री क्षेत्र में हरित हाइड्रोजन (green hydrogen) और वैकल्पिक ईंधन (alternative fuels) का वैश्विक केंद्र बनना है।

महत्व

  • भारत को दुनिया से जोड़ना: 7,500 किलोमीटर से अधिक की तटरेखा और रणनीतिक रूप से स्थित बंदरगाहों के साथ, भारत वैश्विक व्यापार में एक प्रमुख खिलाड़ी है। National Maritime Day मनाकर, देश समुद्री शक्ति बनने की अपनी महत्वाकांक्षा को रेखांकित करता है।
  • इतिहास का सम्मान: SS Loyalty की 1919 की यात्रा को याद करना, वर्तमान समय की पहलों को पिछले नाविकों के बलिदान और उपलब्धियों से जोड़ता है।
  • जागरूकता बढ़ाना: यह दिन छात्रों और युवा पेशेवरों को शिपिंग, नौसेना वास्तुकला (naval architecture), समुद्री इंजीनियरिंग (marine engineering) और कानून में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है, जो राष्ट्रीय समृद्धि सुनिश्चित करने वाले उद्योग का समर्थन करता है।

निष्कर्ष

National Maritime Day एक अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है कि भारत की प्रगति उसके महासागरों से जुड़ी हुई है। बंदरगाहों, जहाज निर्माण, प्रशिक्षण और पर्यावरणीय प्रबंधन में निरंतर निवेश देश को स्थायी समृद्धि के लिए अपनी समुद्री विरासत का दोहन करने में सक्षम करेगा।

स्रोत: Press Information Bureau, India Today, Free Press Journal

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