पर्यावरण

Nauradehi Sanctuary: रानी दुर्गावती और चीता पुनर्वास

Nauradehi Sanctuary: रानी दुर्गावती और चीता पुनर्वास

खबरों में क्यों?

मध्य प्रदेश सरकार ने मार्च 2026 में घोषणा की कि नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य (Nauradehi Wildlife Sanctuary) भारत के पुनर्वास कार्यक्रम (reintroduction programme) के तहत चीतों के लिए तीसरी रिलीज साइट (release site) बन जाएगा। कुनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) में शावकों (cubs) के सफल जन्म के बाद, अधिकारी आने वाले महीनों में कुछ चीतों को नौरादेही में स्थानांतरित (translocate) करने की योजना बना रहे हैं।

पृष्ठभूमि

नौरादेही, जिसका नाम बदलकर रानी दुर्गावती वन्यजीव अभयारण्य (Rani Durgavati Wildlife Sanctuary) कर दिया गया है, मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर, दमोह और सागर जिलों में 1,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक में फैला हुआ है। विंध्यन पठार (Vindhyan plateau) पर स्थित, यह राज्य का सबसे बड़ा अभयारण्य है। यह पन्ना और सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण गलियारा (corridor) बनाता है।

मुख्य विशेषताएं

  • विविध जीव-जंतु (Diverse fauna): कुनो और गांधी सागर (अन्य दो चीता स्थल) के विपरीत, नौरादेही पहले से ही लगभग 25 बाघों, तेंदुओं, भारतीय भेड़ियों, जंगली कुत्तों और भालुओं सहित कई बड़े मांसाहारी जानवरों (carnivores) का समर्थन करता है। इसका मतलब है कि छोड़े गए चीतों को अन्य शिकारियों के साथ सह-अस्तित्व (coexist) में रहना होगा।
  • विविध परिदृश्य (Varied landscapes): अभयारण्य में उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन (tropical dry deciduous forest) शामिल हैं जो घास के मैदानों (grasslands) और झाड़ियों (scrub) से घिरे हुए हैं। पेड़ों की प्रजातियों में सागौन, साज, तेंदू और बांस शामिल हैं। खुले मैदान चीतों के लिए उपयुक्त आवास प्रदान करते हैं।
  • समृद्ध पक्षी जीवन (Rich birdlife): गिद्धों, चील, हॉर्नबिल और रोलर्स सहित यहां पक्षियों की 170 से अधिक प्रजातियां दर्ज की गई हैं। चीतल (chital), सांभर, नीलगाय और ब्लैकबक जैसे स्वस्थ शिकार (prey) की उपस्थिति मांसाहारी जानवरों का समर्थन करती है।
  • हाइड्रोग्राफी और भूविज्ञान (Hydrography and geology): केन की सहायक नदियां जैसे कोपरा, बामनेर और बीयरमा क्षेत्र से बहती हैं। विंध्यन बलुआ पत्थर (Vindhyan sandstone) और डेक्कन ट्रैप बेसाल्ट (Deccan Trap basalt) से मिट्टी (Soils) प्राप्त होती है, जो आवासों का मोज़ेक (mosaic) बनाती है।
  • चीता पुनर्वास योजना (Cheetah reintroduction plan): अधिकारी चीतल को स्थानांतरित करके और घास के मैदानों का प्रबंधन करके शिकार के आधार (prey base) को बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष (human-wildlife conflict) को कम करने के लिए परिधि के गांवों को स्थानांतरित किया जा रहा है। प्रीडेटर-प्रूफ बाड़े (predator-proof enclosures) और रेडियो-कॉलर निगरानी (radio-collar monitoring) जैसे बुनियादी ढांचे (Infrastructure) स्थापित किए जाएंगे।

एक और साइट की आवश्यकता क्यों है?

भारत ने 2022 में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से कुनो नेशनल पार्क में जानवरों को लाकर चीतों को फिर से पेश किया। मध्य प्रदेश के गांधी सागर (Gandhi Sagar) में एक दूसरा स्थल विकसित किया जा रहा है। आबादी फैलाने और जीन (genes) का आदान-प्रदान कर सकने वाली मेटा-आबादी (meta-populations) बनाने के लिए एक तीसरा स्थान आवश्यक है। नौरादेही का बड़ा आकार और घास के मैदान इसे एक आशाजनक आवास (promising habitat) बनाते हैं, भले ही इसमें निवासी शिकारी (resident predators) हों।

स्रोत: Deccan Chronicle.

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