Environment

भीमगढ़ वन्यजीव अभयारण्य (Bhimgad Wildlife Sanctuary) के नए नियम

भीमगढ़ वन्यजीव अभयारण्य (Bhimgad Wildlife Sanctuary) के नए नियम

खबरों में क्यों?

कर्नाटक राज्य सरकार ने बेलगावी (Belagavi) जिले में भीमगढ़ वन्यजीव अभयारण्य (Bhimgad Wildlife Sanctuary) के आसपास विकास गतिविधियों (development activities) को विनियमित (regulate) करने के लिए नियम जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देशों और वन भूमि सर्वेक्षणों (forest land surveys) के बाद, अधिकारियों को अब अभयारण्य के आसपास इको-सेंसिटिव ज़ोन (eco-sensitive zone - ESZ) के भीतर किसी भी निर्माण या व्यावसायिक परियोजना के लिए विशेष अनुमति (special permission) की आवश्यकता होती है।

पृष्ठभूमि

भीमगढ़ वन्यजीव अभयारण्य कर्नाटक-गोवा सीमा (Karnataka–Goa border) पर पश्चिमी घाट (Western Ghats) में स्थित है और लगभग 200 वर्ग किमी में फैला है। लुप्तप्राय (endangered) रॉटन फ्री-टेल्ड बैट (Wroughton’s free-tailed bat - Otomops wroughtoni) की रक्षा करने के लिए मुख्य रूप से 2011 में इस क्षेत्र को अभयारण्य (sanctuary) के रूप में अधिसूचित किया गया था, जो बारापेडे गुफाओं (Barapede caves) में रहता है। यह अभयारण्य कर्नाटक में दांडेली (Dandeli) और अंशी टाइगर रिजर्व (Anshi Tiger Reserves) को गोवा के भगवान महावीर (Bhagwan Mahaveer), मोल्लेम (Mollem) और नेत्रावली (Netravali) वन्यजीव अभयारण्यों से जोड़ने वाले एक बड़े वन गलियारे (forest corridor) का हिस्सा है। घास के मैदानों के साथ मिश्रित सदाबहार (Evergreen) और अर्ध-सदाबहार वन (semi-evergreen forests) बाघों, तेंदुओं, भालूओं (sloth bears) और स्थानिक पक्षियों (endemic birds) सहित प्रजातियों की एक समृद्ध श्रृंखला का समर्थन करते हैं। महादायी नदी (Mahadayi River), जिसे गोवा में मांडवी (Mandovi) कहा जाता है, यहीं से निकलती है।

नए नियम क्या निर्दिष्ट करते हैं?

  • अनिवार्य अनुमति (Mandatory permission): इको-सेंसिटिव ज़ोन (eco-sensitive zone) के भीतर गांवों में घर, सड़क या व्यावसायिक सुविधाएं बनाने जैसे विकास कार्यों के लिए अब क्षेत्रीय आयुक्त (Regional Commissioner) की अध्यक्षता वाली समिति (committee) से अनुमोदन (approval) की आवश्यकता है। चिखाले, गव्हासे, चापोली, आमगांव, गवली, पास्टोली, कबानाली, कांगला, नेरसा और शिरोली जैसे गांव इस क्षेत्र (zone) के अंतर्गत आते हैं।
  • मामले-दर-मामले मूल्यांकन (Case-by-case assessment): अनुमति देने से पहले सर्वेक्षण संख्या (survey numbers) और पारिस्थितिक प्रभाव (ecological impact) के आधार पर प्रत्येक प्रस्ताव की जांच की जाएगी। मंजूरी (clearance) के बिना कोई नई गतिविधि शुरू नहीं की जा सकती है।
  • पुनर्वास के प्रयास (Rehabilitation efforts): प्रशासन (administration) ने उल्लेख किया कि तालेवाड़ी (Talewadi) के कई परिवारों को स्थानांतरित (relocated) कर दिया गया है और जो लोग अभयारण्य क्षेत्र छोड़ना चाहते हैं उन्हें स्थानांतरित करने के लिए चर्चा जारी है। अधिकारी ग्रामीणों के लिए जाति प्रमाण पत्र (caste certificate) दस्तावेज़ीकरण जैसे मुद्दों का भी समाधान कर रहे हैं।
  • सामुदायिक चिंताएं (Community concerns): जबकि संरक्षणवादी (conservationists) नियमों का स्वागत करते हैं, स्थानीय निवासियों को चिंता है कि अनुमोदन (approvals) में देरी से आजीविका (livelihoods) प्रभावित हो सकती है। वे अपने समुदायों को प्रभावित करने वाले निर्णयों में ग्राम सभाओं (gram sabhas) की अधिक भागीदारी की मांग कर रहे हैं।

भीमगढ़ का पारिस्थितिक महत्व

  • लुप्तप्राय चमगादड़ (Endangered bats): भीमगढ़ के अंदर बारापेडे गुफाएं (Barapede caves) रॉटन फ्री-टेल्ड बैट (Wroughton’s free-tailed bat) का एकमात्र ज्ञात प्रजनन स्थल (breeding site) हैं। 1913 में खोजी गई, इस प्रजाति को लंबे समय तक इस गुफा तक ही सीमित माना जाता था जब तक कि मेघालय और कंबोडिया (Cambodia) में छोटी आबादी की सूचना नहीं मिली थी। कॉलोनियां (Colonies) कुछ से लेकर दर्जनों व्यक्तियों के समूहों में चट्टानों की दरारों (rock crevices) में बसती हैं।
  • पश्चिमी घाट की जैव विविधता (Western Ghats biodiversity): भीमगढ़ के नम सदाबहार और अर्ध-सदाबहार वन Diospyros nigrescens और Myristica malabarica जैसे कई स्थानिक पौधों को आश्रय देते हैं, और बाघों, तेंदुओं, भालूओं (sloth bears), माउस हिरण (mouse deer) और 180 से अधिक पक्षी प्रजातियों के लिए निवास स्थान प्रदान करते हैं। यह क्षेत्र कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र में संरक्षित क्षेत्रों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण गलियारा (corridor) बनाता है।
  • जल विज्ञान संबंधी भूमिका (Hydrological role): महादायी नदी (Mahadayi River) इन वनों से निकलती है और मांडवी (Mandovi) के रूप में पश्चिम की ओर बहती है, जो गोवा को पीने के पानी की आपूर्ति करती है। जलग्रहण क्षेत्र (catchment) की सुरक्षा लाखों लोगों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित करने में मदद करती है।

निष्कर्ष

भीमगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के आसपास नए नियमों का उद्देश्य पारिस्थितिक संरक्षण (ecological preservation) के साथ विकास संबंधी जरूरतों को संतुलित करना है। पारदर्शी अनुमोदन सुनिश्चित करना, स्थानीय समुदायों को शामिल करना और बारापेडे गुफाओं (Barapede caves) जैसे महत्वपूर्ण आवासों (critical habitats) की रक्षा करना इस जैव विविधता से भरपूर (biodiversity-rich) परिदृश्य को बनाए रखने की कुंजी होगी।

स्रोत

The Hindu

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