चर्चा में क्यों?
पूर्वोत्तर भारत (north-eastern India) के लिए शीर्ष क्षेत्रीय योजना निकाय (apex regional planning body), उत्तर पूर्वी परिषद (North Eastern Council - NEC) ने 4 जून 2026 को शिलांग (Shillong) में अपना 73वां पूर्ण सत्र (plenary session) आयोजित किया। बैठक में चल रही परियोजनाओं की समीक्षा की गई, नॉर्थ ईस्ट विजन प्लान 2047 (North East Vision Plan 2047) पर चर्चा की गई और क्षेत्र में पर्यटन, कृषि और बुनियादी ढांचे (infrastructure) के विकास में तेजी लाने के तरीकों का पता लगाया गया।
पृष्ठभूमि
NEC की स्थापना 1971 के उत्तर पूर्वी परिषद अधिनियम (North Eastern Council Act) द्वारा की गई थी और इसे औपचारिक रूप से 1972 में गठित किया गया था। 2002 में संशोधनों (amendments) के बाद, केंद्रीय गृह मंत्री (Union Home Minister) पदेन अध्यक्ष (ex-officio chairman) के रूप में कार्य करते हैं और पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्री (Minister of Development of North Eastern Region - DoNER) उपाध्यक्ष (vice-chairman) के रूप में कार्य करते हैं। आठ सदस्य राज्यों - अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh), असम (Assam), मणिपुर (Manipur), मेघालय (Meghalaya), मिजोरम (Mizoram), नागालैंड (Nagaland), सिक्किम (Sikkim) और त्रिपुरा (Tripura) के राज्यपाल (governors) और मुख्यमंत्री (chief ministers) भारत के राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत तीन सदस्यों के साथ परिषद में बैठते हैं। परिषद क्षेत्रीय परियोजनाओं की संयुक्त योजना (joint planning) और वित्त पोषण (funding) के लिए एक मंच प्रदान करती है।
NEC के कार्यों में आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए क्षेत्रीय योजनाएं (regional plans) तैयार करना, केंद्रीय सहायता (central assistance) के लिए प्राथमिकता वाली परियोजनाओं की सिफारिश करना, कार्यान्वयन की समीक्षा करना और अंतर-राज्य समन्वय (inter-state coordination) को बढ़ावा देना शामिल है। दशकों से इसने पूरे क्षेत्र में सड़कों, बिजली परियोजनाओं, जल आपूर्ति योजनाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे (health infrastructure) को वित्त पोषित (funded) किया है। परिषद विकास की बाधाओं (development bottlenecks) को दूर करने के लिए अध्ययन और क्षमता निर्माण का भी समर्थन करती है।
73वें पूर्ण सत्र की मुख्य विशेषताएं
- नेतृत्व और भागीदारी: सत्र की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री ने की। सभी आठ राज्यों के राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया, जो सहकारी संघवाद (cooperative federalism) की भावना को प्रदर्शित करता है।
- फोकस क्षेत्र: एजेंडे (agenda) में पर्यटन संवर्धन, कृषि विविधीकरण (agricultural diversification), निवेश सुविधा, कौशल विकास (skill development), सीमा व्यापार (border trade) और कनेक्टिविटी (connectivity) पर चर्चा शामिल थी। परिषद ने चल रही केंद्रीय योजनाओं के तहत प्रगति की समीक्षा की और नॉर्थ ईस्ट विजन प्लान 2047 के प्रस्तावों की जांच की।
- विज़न प्लान 2047 (Vision Plan 2047): नया विजन दस्तावेज़ 2047 तक इस क्षेत्र को हरित ऊर्जा (green energy), जैविक खेती (organic farming) और टिकाऊ पर्यटन (sustainable tourism) के केंद्र में बदलने का प्रयास करता है। यह उन्नत सड़क, रेल और डिजिटल कनेक्टिविटी, स्थानीय हस्तशिल्प (handicrafts) और सांस्कृतिक उद्योगों को बढ़ावा देने और बेहतर आपदा लचीलापन (disaster resilience) पर जोर देता है।
- बुनियादी ढांचा परियोजनाएं (Infrastructure projects): राष्ट्रीय राजमार्गों (national highways), पुलों और हवाई पट्टियों (airstrips) के उन्नयन और जलविद्युत (hydropower) तथा नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) के विकास सहित NEC द्वारा वित्त पोषित प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर अपडेट दिए गए।
निष्कर्ष
उत्तर पूर्वी परिषद पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को विकास परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें लागू करने के लिए एक साथ लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 73वें पूर्ण सत्र ने बुनियादी ढांचे, पर्यटन और स्थायी आजीविका (sustainable livelihoods) के प्रति नए सिरे से प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। 2047 तक इस क्षेत्र की विशाल क्षमता को साकार करने के लिए राज्यों और केंद्र सरकार के बीच निरंतर सहयोग (Continued collaboration) महत्वपूर्ण होगा।