समाचार में क्यों?
तमिलनाडु में Noyyal Farmers’ Protection Association के सदस्यों ने तिरुपुर नगर निगम से नोय्याल नदी (Noyyal River) के किनारे कचरा डंप करने और जलाने को रोकने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि नदी के किनारे घरेलू, चिकित्सा और प्लास्टिक कचरा जमा किया जा रहा है और उसमें आग लगाई जा रही है, जिससे प्रदूषण बढ़ रहा है। अधिकारियों ने डंप किए गए कचरे को हटाने और एक नया ठोस-अपशिष्ट प्रबंधन पार्क शुरू करने का वादा किया है।
नदी की पृष्ठभूमि
नोय्याल नदी कावेरी नदी (Cauvery River) की एक सहायक नदी है। यह पश्चिमी घाट की Vellingiri Hills में छोटी जलधाराओं के रूप में शुरू होती है और कोयंबटूर, तिरुपुर, इरोड और करूर जिलों से होकर नोय्याल गांव में कावेरी में मिलने से पहले लगभग 158 किलोमीटर पूर्व की ओर बहती है। ऐतिहासिक रूप से, नदी और उसके टैंकों व नहरों का नेटवर्क इस क्षेत्र में सिंचाई की रीढ़ रहा है।
ऐतिहासिक सिंचाई प्रणाली
- चोल इंजीनियरिंग: 10वीं और 13वीं शताब्दी CE के बीच, चालुक्य चोलों ने नोय्याल के किनारे टैंकों, एनीकट (छोटे बांध) और फीडर चैनलों की एक परस्पर जुड़ी हुई प्रणाली का निर्माण किया। इन अर्थ-बंड जलाशयों ने मानसून के प्रवाह को पकड़ा, बाढ़ को नियंत्रित किया और कृषि के लिए पानी उपलब्ध कराया। कई मूल संरचनाएं आज भी उपयोग में हैं और 9,000 एकड़ से अधिक खेत की सिंचाई करती हैं।
- प्रमुख टैंक: उल्लेखनीय जलाशयों में पेरूर बिग टैंक, कोयंबटूर बिग टैंक और वलनकुलम शामिल हैं। टैंकों का पानी भूजल को रिचार्ज करता है, नगर पालिकाओं को आपूर्ति करता है और स्थानीय जैव विविधता का समर्थन करता है।
हाल की पर्यावरणीय चिंताएं
- कचरा डंप करना और जलाना: किसानों का कहना है कि नगरपालिका के कर्मचारी नदी के किनारे बिना छांटा गया कचरा डंप करते हैं और फिर उसमें आग लगा देते हैं, जिससे विषाक्त पदार्थ निकलते हैं और पहले से ही खराब हो चुकी नदी और प्रदूषित होती है।
- औद्योगिक प्रदूषण: पिछले कुछ दशकों में, तिरुपुर और कोयंबटूर में रंगाई और कपड़ा इकाइयों ने बिना उपचारित अपशिष्टों (effluents) को नोय्याल में छोड़ा है, जिससे नदी के कुछ हिस्से सीवेज और रसायनों के चैनल में बदल गए हैं। इससे पीने के पानी के स्रोत के रूप में इसकी भूमिका कम हो गई है।
- पुनरुद्धार की मांग: स्थानीय निवासी और पर्यावरण समूह प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन, औद्योगिक डिस्चार्ज के खिलाफ सख्त प्रवर्तन और नदी की टैंक प्रणाली के कायाकल्प की मांग कर रहे हैं।
महत्व
- कृषि जीवन रेखा: नोय्याल के टैंक हजारों एकड़ की सिंचाई करते हैं, जो एक अर्ध-शुष्क क्षेत्र में स्थिर फसल की पैदावार सुनिश्चित करते हैं। उनका निरंतर उपयोग प्राचीन स्थिरता प्रथाओं को दर्शाता है।
- सांस्कृतिक विरासत: यह नदी प्रणाली चोल जल विज्ञान इंजीनियरिंग का एक जीवंत उदाहरण है। इसे संरक्षित करना विरासत और जल सुरक्षा दोनों की रक्षा करता है।
- पर्यावरणीय अनिवार्यता: प्रदूषण को संबोधित करने से किसानों के लिए पानी की गुणवत्ता में सुधार होगा, भूजल रिचार्ज होगा और कावेरी बेसिन में डाउनस्ट्रीम पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा होगी।
स्रोत: The New Indian Express