चर्चा में क्यों?
जनवरी 2026 की शुरुआत में, वन अधिकारियों ने भारत के सबसे बड़े बाघ अभयारण्य, नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व (NSTR) में अखिल भारतीय बाघ अनुमान 2026 (All India Tiger Estimation 2026) का तीसरा दौर शुरू किया। बाघों और अन्य वन्यजीवों की तस्वीरें लेने के लिए सैकड़ों स्थानों पर हाई-डेफिनिशन इन्फ्रारेड कैमरे (high-definition infrared cameras) लगाए गए थे। लगभग 40 दिनों तक चलने वाली यह जनगणना बाघों की संख्या को अपडेट करने और निवास स्थान के स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभ्यास का हिस्सा है।
पृष्ठभूमि
NSTR आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के नंद्याल (Nandyal), पलनाडु (Palnadu), प्रकाशम (Prakasam), नलगोंडा (Nalgonda) और महबूबनगर (Mahabubnagar) जिलों में लगभग 3,728 वर्ग किमी में फैला हुआ है। 1983 में एक टाइगर रिजर्व के रूप में नामित, इसमें कृष्णा नदी द्वारा उकेरी गई घाटियां (valleys) और गहरी खाइयां (deep gorges) शामिल हैं। रिजर्व का मुख्य क्षेत्र लगभग 1,200 वर्ग किमी को कवर करता है; बाकी एक बफर जोन है जो आदिवासी समुदायों (tribal communities) और विनियमित पर्यटन (regulated tourism) का समर्थन करता है।
NSTR में अखिल भारतीय बाघ अनुमान 2026
- बहु-चरणीय सर्वेक्षण (Multi-phase survey): दिसंबर 2025 में आयोजित पहले चरण में मांसाहारी (carnivores), शाकाहारी (herbivores) और आवास सुविधाओं (habitat features) की उपस्थिति दर्ज की गई। दूसरे चरण में जानवरों की गतिविधियों को मैप करने के लिए उपग्रह डेटा और साइन सर्वे का उपयोग किया गया। तीसरा चरण, 3 जनवरी 2026 से शुरू होकर, कैमरा ट्रैपिंग (camera trapping) पर केंद्रित है।
- कैमरा परिनियोजन (Camera deployment): मार्कापुर (Markapur) और आत्मकुर (Atmakur) जैसे प्रभागों (divisions) में, अधिकारियों ने 703 स्थानों पर लगभग 1,406 इन्फ्रारेड कैमरे स्थापित किए हैं। प्रत्येक बिंदु पर दो कैमरे जानवरों को दोनों दिशाओं से उनके अनूठे धारी पैटर्न (stripe patterns) से पहचानने के लिए कैद करते हैं।
- डेटा विश्लेषण (Data analysis): फरवरी के मध्य तक एकत्र की गई तस्वीरें विश्लेषण के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) को भेजी जाती हैं। NSTR के परिणाम 2026-27 में जारी होने वाले राष्ट्रव्यापी अनुमान में योगदान देंगे।
NSTR का महत्व
- सबसे बड़ा बाघ आवास: NSTR देश का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है। बाघों की संख्या 2014 में 48 से बढ़कर 2022 में 73 हो गई है। प्रारंभिक साक्ष्य बताते हैं कि संरक्षण प्रयासों और आवास कनेक्टिविटी के कारण आबादी अब 80 से अधिक हो गई है।
- समृद्ध जीव (Rich fauna): बाघों के अलावा, यह रिजर्व तेंदुओं (leopards), स्लॉथ भालू (sloth bears), भारतीय पैंगोलिन (Indian pangolins), ढोल (dholes), चीतल (chital), सांभर (sambar) और ब्लैकबक (blackbuck) का समर्थन करता है। मगरमच्छ (mugger crocodiles) और भारतीय अजगर (Indian pythons) जैसे सरीसृप इसकी नदियों और आर्द्रभूमियों में रहते हैं।
- कनेक्टिविटी गलियारे (Connectivity corridors): वन्यजीव फैलाव मार्ग (Wildlife dispersal routes) NSTR को नल्लामाला (Nallamala) और शेषाचलम (Seshachalam) पर्वतमाला से जोड़ते हैं। इन गलियारों को बनाए रखने से आनुवंशिक आदान-प्रदान (genetic exchange) सुनिश्चित होता है और मानव-वन्यजीव संघर्ष (human-wildlife conflicts) कम होता है।
महत्व
- वैज्ञानिक निगरानी: अखिल भारतीय बाघ अनुमान हर चार साल में मानकीकृत (standardised) तरीकों का उपयोग करता है। सटीक डेटा नीतिगत निर्णयों, संसाधन आवंटन और संरक्षण योजना का मार्गदर्शन करता है।
- सामुदायिक जुड़ाव: वन कर्मचारी स्थानीय आदिवासी समुदायों के साथ काम करते हैं, जिसमें चेंचू लोग (Chenchu people) शामिल हैं, जो मार्गदर्शक और अवैध शिकार विरोधी गश्त (anti-poaching patrols) के रूप में कार्य करते हैं। स्वदेशी युवाओं (indigenous youth) को शामिल करने से संरक्षण की भावना (stewardship) को बढ़ावा मिलता है और आजीविका के अवसर मिलते हैं।
- संरक्षण रणनीतियां: जनसंख्या के रुझानों को समझने से उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलती है जहां मजबूत सुरक्षा, आवास बहाली या संघर्ष शमन उपायों की आवश्यकता होती है।
निष्कर्ष
नागार्जुनसागर-श्रीशैलम में चल रही बाघ जनगणना भारत की अपने राष्ट्रीय पशु के संरक्षण की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक कठोरता (scientific rigour) और सामुदायिक भागीदारी के सम्मिश्रण से, इस अभ्यास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दक्कन के पठार (Deccan Plateau) के जंगलों में बाघ की दहाड़ गूंजती रहे।
स्रोत: New Indian Express