समाचार में क्यों?
आंध्र प्रदेश में वन्यजीव प्रबंधन प्राधिकरण और Coringa Wildlife Sanctuary के अधिकारियों ने काकीनाडा खाड़ी (Kakinada Bay) में होप द्वीप (Hope Island) पर Olive Ridley समुद्री कछुए के लगभग 20,000 अंडों को संरक्षित किया है। अंडों को उनके मूल स्थान (in situ) पर सुरक्षित करके और घोंसले के शिकार वाले समुद्र तटों की निगरानी करके, अभयारण्य वर्तमान घोंसले के शिकार के मौसम के दौरान हैचलिंग (hatchling) के जीवित रहने की उच्च दर सुनिश्चित कर रहा है।
पृष्ठभूमि
Olive Ridley कछुआ (Lepidochelys olivacea) दुनिया का सबसे छोटा समुद्री कछुआ है, जिसे इसके दिल के आकार के जैतून (olive) या भूरे-हरे रंग के खोल द्वारा पहचाना जाता है। यह प्रशांत, हिंद और अटलांटिक महासागरों के उष्णकटिबंधीय (tropical) जल में निवास करता है और अपने समकालिक सामूहिक घोंसले (synchronized mass nesting) या arribada के लिए प्रसिद्ध है, जहां हजारों मादाएं एक ही बार में तट पर आती हैं। मुख्य तथ्यों में शामिल हैं:
- आहार और प्रवासन: Olive Ridleys सर्वाहारी (omnivorous) होते हैं, जो जेलिफ़िश, घोंघे (snails), केकड़े और शैवाल खाते हैं। वे प्रशांत से हिंद महासागर तक लंबी दूरी तय करते हैं और नवंबर और दिसंबर के बीच भारतीय तटों पर आते हैं, अप्रैल या मई तक रुकते हैं।
- घोंसला बनाने का व्यवहार: मादाएं मुहाने और खाड़ियों के पास रेतीले तटों पर खोदे गए गड्ढे में 100-140 अंडे देती हैं। लगभग 45 दिनों के बाद अंडे से बच्चे निकलते हैं, और बच्चे समुद्र की ओर दौड़ते हैं।
- कानूनी स्थिति: भारत में पाई जाने वाली सभी पांच समुद्री कछुओं की प्रजातियां, जिनमें Olive Ridleys भी शामिल हैं, Wildlife Protection Act 1972 की अनुसूची I और CITES के परिशिष्ट I में सूचीबद्ध हैं। IUCN ने Olive Ridley को सुभेद्य (Vulnerable) के रूप में वर्गीकृत किया है।
Coringa Wildlife Sanctuary का हिस्सा होप द्वीप (Hope Island), आंध्र तट पर एक महत्वपूर्ण घोंसला बनाने का मैदान है। वन कर्मचारी इन-सीटू (in-situ) संरक्षण विधियों को अपनाते हैं: वे घोंसले के स्थानों पर बाड़ लगाते हैं, केवल नितांत आवश्यक होने पर ही अंडों को स्थानांतरित करते हैं और समुद्र तटों को शिकारियों तथा मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त रखते हैं।
Coringa Wildlife Sanctuary के बारे में
Coringa Wildlife Sanctuary आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में, काकीनाडा बंदरगाह शहर से लगभग 20 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। 1978 में स्थापित, अभयारण्य लगभग 236 वर्ग किलोमीटर में फैला है और गोदावरी डेल्टा का हिस्सा है। विशेषताओं में शामिल हैं:
- भारत में दूसरा सबसे बड़ा मैंग्रोव वन: अभयारण्य 16 शुद्ध मैंग्रोव प्रजातियों और 19 सहयोगी प्रजातियों की मेजबानी करता है, जिनमें Avicennia, Rhizophora और Sonneratia शामिल हैं। नमक सहने वाले ये पेड़ तटरेखा (coastline) को स्थिर करते हैं और मछलियों तथा क्रस्टेशियंस के लिए प्रजनन स्थल प्रदान करते हैं।
- विविध जीव-जंतु: तालाब के बगुले और राजहंस से लेकर प्रवासी पक्षियों (migratory waders) तक, 245 से अधिक पक्षी प्रजातियां दर्ज की गई हैं। स्तनधारियों में लुप्तप्राय फिशिंग कैट (Prionailurus viverrinus), स्मूथ-कोटेड ऊदबिलाव (Lutrogale perspicillata), सुनहरा सियार (golden jackal) और भारतीय लोमड़ी (Indian fox) शामिल हैं। खारे पानी के मगरमच्छ और विभिन्न सांप जैसे सरीसृप भी मौजूद हैं।
- मुहाना पारिस्थितिकी तंत्र (Estuarine ecosystem): अभयारण्य गौतमी और गोदावरी नदियों की शाखाओं द्वारा प्रतिच्छेद (intersected) किया गया है, जिससे मडफ्लैट्स (mudflats) और खारे लैगून बनते हैं। मीठे पानी और समुद्री जल का मिश्रण समुद्री और स्थलीय दोनों तरह के वन्यजीवों को सहारा देता है।
- खतरे और संरक्षण: वनों की कटाई, जलाऊ लकड़ी का संग्रह, जलीय कृषि (aquaculture) और औद्योगिक विकास मैंग्रोव और वन्यजीवों के लिए खतरा हैं। संरक्षण कार्यक्रम वनीकरण, शिकार विरोधी उपायों और सामुदायिक शिक्षा पर केंद्रित हैं।
कछुओं के लिए संरक्षण उपाय
- Operation Olivia: Indian Coast Guard मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लागू करने और कछुओं को गलती से पकड़ने वाले ट्रॉलरों को रोकने के लिए घोंसले के शिकार के मौसम के दौरान गश्त (patrols) करता है।
- Turtle Excluder Devices (TEDs): कुछ राज्यों में मछली पकड़ने के जालों में TED लगाए जाते हैं जो मछलियों को पकड़ते समय कछुओं को बचने की अनुमति देते हैं।
- टैगिंग और निगरानी: शोधकर्ता प्रवासन (migration) मार्गों को ट्रैक करने और जीवित रहने की दर का अध्ययन करने के लिए कछुओं को टैग करते हैं। स्थानीय समुदाय घोंसलों की रक्षा करने और हैचलिंग (hatchlings) को समुद्र की ओर ले जाने में लगे हुए हैं।
महत्व
- जैव विविधता हॉटस्पॉट: Olive Ridley कछुओं की रक्षा करना समुद्री पारिस्थितिक तंत्र (marine ecosystems) के स्वास्थ्य में योगदान देता है और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के तहत भारत के दायित्वों का समर्थन करता है।
- तटीय सुरक्षा: स्वस्थ मैंग्रोव और कछुओं की आबादी तटरेखाओं को स्थिर करके तथा मत्स्य पालन का समर्थन करके तटीय लचीलेपन (coastal resilience) को बनाए रखने में मदद करती है।
- इकोटूरिज्म क्षमता: जिम्मेदार रूप से कछुओं को देखने से स्थानीय समुदायों के लिए आय उत्पन्न हो सकती है और संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ सकती है।
निष्कर्ष
होप द्वीप (Hope Island) पर लगभग 20,000 Olive Ridley कछुए के अंडों का संरक्षण वन अधिकारियों और स्थानीय स्वयंसेवकों के समर्पण का प्रमाण है। Coringa Wildlife Sanctuary के मैंग्रोव और मुहाना पारिस्थितिकी तंत्र (estuarine ecosystems) को संरक्षित करना न केवल इन सुभेद्य सरीसृपों की रक्षा करता है बल्कि तटीय समुदायों की आजीविका को भी बनाए रखता है।