अर्थव्यवस्था

Operation Sankalp: भारतीय नौसेना, खाड़ी सुरक्षा और समुद्री डकैती विरोधी

Operation Sankalp: भारतीय नौसेना, खाड़ी सुरक्षा और समुद्री डकैती विरोधी

चर्चा में क्यों?

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और फरवरी 2026 के अंत में ईरान में हाल के हमलों के बाद, भारत सरकार ने खाड़ी क्षेत्र (Gulf region) में सुरक्षा की समीक्षा की। Operation Sankalp (ऑपरेशन संकल्प) के तहत तैनात भारतीय नौसेना (Indian Navy) के युद्धपोतों को भारत जाने वाले व्यापारिक जहाजों को एस्कॉर्ट करने, समुद्री डकैती विरोधी गश्त (anti-piracy patrols) करने और आवश्यकता पड़ने पर भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए तैयार रहने की सूचना मिली थी।

पृष्ठभूमि

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) के पास कई वाणिज्यिक टैंकरों पर हमले के बाद 19 जून 2019 को ऑपरेशन संकल्प शुरू किया गया था। भारत का ऊर्जा आयात और व्यापार मार्ग इस गलियारे पर काफी हद तक निर्भर करते हैं; इसके कच्चे तेल का लगभग 80 प्रतिशत इन जल से होकर गुजरता है। इस ऑपरेशन का उद्देश्य नौसैनिक उपस्थिति बनाए रखकर समुद्री डकैती (piracy), सशस्त्र हमलों और भू-राजनीतिक तनावों से भारतीय ध्वज वाले और भारत जाने वाले जहाजों की रक्षा करना है।

मिशन की मुख्य विशेषताएं

  • संचालन का क्षेत्र: भारतीय युद्धपोत और समुद्री गश्ती विमान होर्मुज जलडमरूमध्य, ओमान की खाड़ी, फारस की खाड़ी (Persian Gulf), अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) और अरब सागर के निकटवर्ती हिस्सों सहित उच्च जोखिम वाले मार्गों की निगरानी करते हैं।
  • एस्कॉर्ट और निगरानी: नौसेना के जहाज व्यापारिक जहाजों के काफिले को एस्कॉर्ट करते हैं, वास्तविक समय की खुफिया जानकारी प्रदान करते हैं और संकट कॉल (distress calls) का जवाब देते हैं। संभावित खतरों का पता लगाने और जहाजों को खतरे से दूर मार्गदर्शन करने के लिए विमान हवाई निगरानी (aerial surveillance) करते हैं।
  • समुद्री डकैती विरोधी प्रयास: अन्य नौसेनाओं के समन्वय में, भारतीय नौसेना सोमालिया के तट पर और अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती विरोधी गश्त करती है, संदिग्ध जहाजों पर चढ़कर अपहरण के प्रयासों को रोकती है।
  • निकासी (evacuation) के लिए तत्परता: क्षेत्र में तनाव बढ़ने के साथ, ऑपरेशन में संघर्ष क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों को निकालने की आकस्मिक योजनाएं (contingency plans) शामिल हैं। बड़े पैमाने पर निकासी आवश्यक होने पर उभयचर जहाज (Amphibious ships) और विमान स्टैंडबाय पर हैं।
  • क्षेत्रीय भागीदारों के साथ समन्वय: मिशन में जहाजों के सुरक्षित मार्ग को सुनिश्चित करने और भीड़भाड़ वाले जलमार्गों में गलतफहमी से बचने के लिए ईरान, ओमान और अन्य खाड़ी देशों के साथ संचार शामिल है।

महत्व

  • ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा करना: तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों को एस्कॉर्ट करके, यह ऑपरेशन भारत की कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति की रक्षा करता है, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
  • नाविकों (seafarers) को आश्वासन: भारतीय नौसेना सक्रिय रूप से अपने मार्गों की रक्षा कर रही है, यह जानकर मर्चेंट नाविकों का विश्वास बढ़ता है, जिससे अस्थिर क्षेत्र में चिंता कम होती है।
  • समुद्री क्षमता का प्रक्षेपण (Projection): युद्धपोतों की निरंतर तैनाती भारत की अपने समुद्री हितों को सुरक्षित करने और अंतरराष्ट्रीय जल में स्थिरता में योगदान करने की क्षमता को प्रदर्शित करती है।
  • मानवीय तैयारी: निकासी संपत्तियों (evacuation assets) को तैयार रखना खाड़ी में रहने वाले और काम करने वाले भारतीय प्रवासियों (expatriates) की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

निष्कर्ष

ऑपरेशन संकल्प क्षेत्रीय उथल-पुथल के बीच अपने समुद्री व्यापार और नागरिकों की रक्षा के लिए भारत के सक्रिय दृष्टिकोण (proactive approach) का उदाहरण है। निरंतर नौसैनिक उपस्थिति, क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ प्रभावी समन्वय और मानवीय मिशनों के लिए तत्परता यह सुनिश्चित करती है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग कॉरिडोर में से एक में भारतीय हित सुरक्षित रहें।

स्रोत: The Hindu BusinessLine

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