चर्चा में क्यों?
एक गाँव से बचाए जाने के बाद पन्ना टाइगर रिज़र्व के बफर ज़ोन (buffer zone) में छोड़े गए दो साल के नर बाघ को 7 मई 2026 को मृत पाया गया। यह इस साल मध्य प्रदेश में रिपोर्ट की गई 28वीं बाघ की मौत थी और इसने रिजर्व के भीतर वन्यजीव प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर चिंताएँ पैदा कर दी हैं।
पृष्ठभूमि
पन्ना टाइगर रिजर्व उत्तरी मध्य प्रदेश की विंध्य पर्वतमाला (Vindhyan range) में स्थित है, जो पन्ना और छतरपुर जिलों में फैला है। रिज़र्व में सागौन (teak) और शुष्क पर्णपाती (dry deciduous) जंगल शामिल हैं, जिसके बीच-बीच में घास के मैदान और चट्टानी पठार (rocky plateaus) हैं। केन नदी (Ken River) इसके बीच से बहती है, जो वन्यजीवों की समृद्ध विविधता का समर्थन करती है और स्थानीय समुदायों के लिए जीवन रेखा (lifeline) बनाती है।
मुख्य बिंदु
- पन्ना राष्ट्रीय उद्यान 1981 में बनाया गया था और 1994 में यह भारत का 22वां बाघ अभयारण्य (tiger reserve) बन गया। 2009 में अवैध शिकार के कारण लगभग सभी बाघ गायब हो गए, लेकिन एक सावधानीपूर्वक पुनरुत्पादन कार्यक्रम (reintroduction programme) ने जंगल को फिर से आबाद करने में मदद की।
- आज रिजर्व बाघ, तेंदुआ, नीलगाय, चिंकारा, सांभर, चीतल, मगरमच्छ और पक्षियों की 300 से अधिक प्रजातियों का घर है। नदी और पठारी आवासों (plateau habitats) का मोज़ेक (mosaic) शिकारियों (predators) और शिकार (prey) दोनों का समर्थन करता है।
- संरक्षण चुनौतियों में अवैध शिकार, मानव-वन्यजीव संघर्ष (human-wildlife conflict), और सड़क और खनन जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शामिल हैं। बाघों की आबादी को बनाए रखने के लिए सतर्कता और सामुदायिक भागीदारी महत्वपूर्ण है।