चर्चा में क्यों?
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) की हालिया विज्ञप्ति में घोषणा की गई है कि प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम ने 15वें वित्त आयोग चक्र (वित्तीय वर्ष 2021-22 से वित्तीय वर्ष 2025-26) के लिए अपने लक्ष्य को पार कर लिया है। इस योजना के तहत 4.03 लाख से अधिक नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित किए गए, जिससे पूरे भारत में 36 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए।
पृष्ठभूमि
PMEGP एक क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी कार्यक्रम है जिसे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सूक्ष्म-उद्योगों के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए 2008 में शुरू किया गया था। इसे राज्य और जिला एजेंसियों की साझेदारी में खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। यह योजना पहली बार के उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिसमें मार्जिन मनी सब्सिडी शामिल है, जो विनिर्माण (manufacturing) या सेवा इकाइयाँ (service units) स्थापित करते हैं। व्यवसाय नियोजन और बाजार से जुड़ाव का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है।
प्रमुख उपलब्धियां और विशेषताएं
- सृजित रोजगार: वर्तमान वित्त आयोग चक्र के दौरान, PMEGP ने 4.03 लाख सूक्ष्म-उद्यमों की स्थापना की सुविधा प्रदान की और लगभग 36.33 लाख रोजगार सृजित किए। कुल व्यय लगभग 13,554 करोड़ रुपये था।
- समावेशी विकास: लगभग 40% उद्यम महिलाओं द्वारा चलाए जाते हैं, और 45% सब्सिडी महिला उद्यमियों को गई है। लगभग 54% लाभार्थी SC/ST/OBC श्रेणियों के हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 80% से अधिक इकाइयाँ हैं।
- लक्षित क्षेत्र: लाभार्थी खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, चमड़े का सामान, मरम्मत सेवाओं और डिजिटल सेवाओं जैसे विविध व्यवसाय स्थापित करते हैं। यह योजना विनिर्माण के लिए परियोजना लागत 50 लाख रुपये और सेवा इकाइयों के लिए 20 लाख रुपये निर्धारित करती है।
- चल रहे सुधार: सरकार तेज अनुमोदन (approvals) के लिए PMEGP को ऑनलाइन पोर्टलों के साथ एकीकृत कर रही है और डिफ़ॉल्ट को कम करने के लिए नियमित निगरानी पर जोर दे रही है। बैंक और KVIC अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय निरीक्षण (field inspections) करते हैं कि इकाइयां चालू रहें।