पर्यावरण

Powai Lake Redevelopment Plan: BMC पहल और मुंबई की पारिस्थितिकी

Powai Lake Redevelopment Plan: BMC पहल और मुंबई की पारिस्थितिकी

चर्चा में क्यों?

बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने पवई झील (Powai Lake) के किनारे 1.8 किलोमीटर लंबे सैरगाह (promenade) के लिए विस्तृत पुनर्विकास योजना (redevelopment plan) तैयार करने के लिए परामर्श फर्म AECOM Asia को नियुक्त करने का निर्णय लिया है। मध्य जून 2026 में घोषित इस निर्णय में अध्ययन और डिजाइन के लिए लगभग ₹1.85 करोड़ आवंटित किए गए हैं। 2008 में बने इस सैरगाह को कटाव (erosion) और आस-पास के बुनियादी ढांचे के कार्यों से हुए नुकसान के कारण बहाली की आवश्यकता है।

पृष्ठभूमि

पवई झील उन्नीसवीं सदी के अंत में मुंबई को पीने के पानी की आपूर्ति के लिए बनाया गया एक कृत्रिम जलाशय (artificial reservoir) है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे (IIT Bombay) के पास स्थित यह झील लगभग 210 हेक्टेयर को कवर करती है और इसका जलग्रहण क्षेत्र (catchment) 6.61 वर्ग किलोमीटर है। तेजी से हो रहे शहरीकरण और बिना उपचारित सीवेज (untreated sewage) ने पानी की गुणवत्ता को खराब कर दिया है, जिससे जलकुंभी (water hyacinth) और शैवाल (algae) की मोटी परतें बन गई हैं। पिछले एक दशक में नागरिक समूहों और शोधकर्ताओं ने बेहतर प्रबंधन का आह्वान किया है। 2025 में बीएमसी ने नई पाइपलाइनों के माध्यम से प्रतिदिन 18 मिलियन लीटर सीवेज को मोड़ने और 8 एमएलडी का सीवेज-ट्रीटमेंट प्लांट (sewage-treatment plant) स्थापित करने की योजना की घोषणा की।

वर्तमान प्रस्ताव और पर्यावरणीय विचार

  • सैरगाह का पुनर्रचना (Promenade redesign): इंजीनियर संरचनात्मक स्थिरता (structural stability) का आकलन करेंगे और आदि शंकराचार्य मार्ग के साथ बाधा मुक्त रास्ते (barrier-free walkways), व्यूइंग डेक (viewing decks) और मनोरंजक स्थान बनाएंगे।
  • सीवेज डायवर्जन (Sewage diversion): नई पाइपलाइनें बिना उपचारित अपशिष्ट जल को भांडुप और कांजुरमार्ग में मौजूद ट्रीटमेंट प्लांट्स तक ले जाएंगी; सुवर्ण मंदिर के पास प्रस्तावित प्लांट 8 एमएलडी को ट्रीट करेगा।
  • आवास बहाली (Habitat restoration): जल की गुणवत्ता में सुधार करने और मार्श क्रोकोडाइल (marsh crocodiles) तथा पक्षियों का समर्थन करने के लिए आक्रामक जलकुंभी को हटाना, गाद निकालना (desilting) और देशी नरकट (native reeds) लगाना इस योजना में शामिल है।
  • सामुदायिक भागीदारी (Community input): निवासी, पर्यावरणविद और शोधकर्ताओं से परामर्श किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि डिजाइन पारिस्थितिकी और सांस्कृतिक विरासत के प्रति संवेदनशील है।
  • संभावित रामसर साइट (Potential Ramsar site): पर्यावरणविदों को उम्मीद है कि सीवेज का प्रवाह रुकने के बाद पवई झील को अंतर्राष्ट्रीय महत्व के आर्द्रभूमि (wetland) के रूप में नामांकित किया जा सकता है।

निष्कर्ष

पवई झील को बहाल करने के लिए मनोरंजन और संरक्षण के बीच संतुलन की मांग है। सीवेज डायवर्जन और आवास बहाली (habitat restoration) के साथ-साथ प्रस्तावित सैरगाह पुनर्विकास, झील को एक स्वस्थ शहरी आर्द्रभूमि में बदल सकता है। इस परियोजना की सफलता के लिए जन भागीदारी और पर्यावरण मानदंडों का सख्ती से पालन करना महत्वपूर्ण होगा।

स्रोत: TOI
Home Current Affairs 📰 Daily News 🎬 Watch Shorts 📊 Economic Survey 2025-26 Subjects 📚 All Subjects ⚖️ Indian Polity 💹 Economy 🌍 Geography 🌿 Environment 📜 History Exam Info 📋 Syllabus 2026 📝 Prelims Syllabus ✍️ Mains Syllabus ✅ Eligibility Resources 📖 Booklist 📊 Exam Pattern 📄 Previous Year Papers ▶️ YouTube Channel
Sign In / Open Web App