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Prosopis juliflora: आक्रामक विदेशी प्रजातियां, विलायती बबूल और मरुस्थलीकरण

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चर्चा में क्यों?

पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन से प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा (Prosopis juliflora) के प्रसार में तेजी आने की संभावना है। यह एक कठोर झाड़ी (hardy shrub) है जिसे मरुस्थलीकरण (desertification) का मुकाबला करने के लिए 19वीं शताब्दी में भारत लाया गया था। यह पौधा देश की सबसे व्यापक आक्रामक प्रजातियों (pervasive invasive species) में से एक बन गया है।

पृष्ठभूमि

प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा, जिसे मेसक्वाइट (mesquite) या विलायती बबूल (vilayati babul) के रूप में भी जाना जाता है, मैक्सिको और दक्षिण अमेरिका का मूल निवासी है। ब्रिटिश प्रशासकों ने इसे बंजर भूमि (wastelands) को फिर से हरा-भरा करने और तमिलनाडु तथा गुजरात जैसे शुष्क क्षेत्रों में जलाऊ लकड़ी (firewood) उपलब्ध कराने के लिए 1857-1877 के आसपास भारत में पेश किया था। समय के साथ, अपनी गहरी जड़ों, जो भूमिगत जल को खींचती हैं, और मवेशियों तथा हवा द्वारा बिखरे बीजों के कारण, यह व्यापक रूप से प्राकृतिक रूप (naturalised) में फैल गया।

प्रभाव

  • पारिस्थितिक खतरा (Ecological threat): यह झाड़ी घनी झाड़ियाँ (dense thickets) बनाती है जो देशी घासों और पेड़ों को विस्थापित (displace) कर देती हैं। इसकी पत्तियां ऐसे रसायन छोड़ती हैं जो अन्य पौधों के विकास को रोकते हैं (एलेलोपैथी - allelopathy), जिससे जैव विविधता और पशुधन के लिए चारे की उपलब्धता कम हो जाती है।
  • आजीविका की दुविधा: कुछ क्षेत्रों में लोग जलाऊ लकड़ी, लकड़ी के कोयले (charcoal) और छोटी इमारती लकड़ी (small timber) के लिए प्रोसोपिस पर निर्भर हैं। सूखे के दौरान इसकी फली (pods) आपातकालीन चारे (emergency fodder) के रूप में काम आती है। संसाधन बनाम उपद्रव की यह दोहरी धारणा नियंत्रण उपायों को जटिल बनाती है।
  • स्वास्थ्य और पर्यावरण: इस पौधे में कांटे होते हैं जो जानवरों और इंसानों को घायल करते हैं। इसकी गहरी जड़ें भूजल स्तर (groundwater levels) को कम करती हैं, और सूखी झाड़ियाँ जंगल की आग (forest fires) के खतरे को बढ़ाती हैं।

प्रबंधन रणनीतियाँ

प्रोसोपिस को नियंत्रित करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है:

  • यांत्रिक निष्कासन (Mechanical removal): पूरे पौधों को काटना और उखाड़ना, उसके बाद पौधों की मैन्युअल निराई (manual weeding) करना प्रभावी है, लेकिन इसमें बहुत अधिक श्रम लगता है।
  • उपयोग (Utilisation): लकड़ी के कोयले और फर्नीचर के लिए इसके लकड़ी के व्यावसायिक उपयोग (commercial use) को प्रोत्साहित करने से घनत्व कम हो सकता है और आय उत्पन्न हो सकती है।
  • पुनर्स्थापना (Restoration): साफ किए गए क्षेत्रों में देशी घास और पेड़ लगाने से इसे फिर से फैलने से रोकने में मदद मिलती है। आजीविका और पारिस्थितिक बहाली (ecological restoration) को संतुलित करने के लिए सामुदायिक जागरूकता अभियान आवश्यक हैं।

निष्कर्ष

प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा की सफलता यह दर्शाती है कि पारिस्थितिक नियंत्रण के अभाव में बाहरी प्रजातियां कैसे आक्रामक हो सकती हैं। जलवायु परिवर्तन के इसके विस्तार के पक्ष में होने के कारण, भारत को चरागाहों (rangelands) और जल संसाधनों (water resources) की रक्षा के लिए एकीकृत प्रबंधन (integrated management) को प्राथमिकता देनी चाहिए।

स्रोत: The Hindu

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