अंतर्राष्ट्रीय संबंध

Punatsangchhu-I Hydroelectric Project: भूटान, भारत संबंध और फो चू नदी

Punatsangchhu-I Hydroelectric Project: भूटान, भारत संबंध और फो चू नदी

चर्चा में क्यों?

भूटान में पुनात्सांगछू-I जलविद्युत परियोजना (Punatsangchhu-I hydroelectric project) पर भूवैज्ञानिक समस्याओं के कारण सात साल के ठहराव के बाद निर्माण फिर से शुरू हो गया है। 10 अप्रैल 2026 को इंजीनियरों ने बांध के लिए कंक्रीट डालना शुरू किया, जो 1,200 मेगावाट के रन-ऑफ-द-रिवर प्लांट (run-of-the-river plant) के लिए एक नई शुरुआत का संकेत है। इस परियोजना से भूटान की उत्पादन क्षमता में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि होने और एक वित्तपोषण व्यवस्था के तहत भारत को अधिशेष बिजली का निर्यात करने की उम्मीद है जिसमें भारत 40 प्रतिशत अनुदान और 60 प्रतिशत ऋण प्रदान करता है।

पृष्ठभूमि

पुनात्सांगछू-I भूटान में निर्माणाधीन सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है। यह वांगदुए फोडरंग जोंगखाग (Wangduephodrang Dzongkhag) के पास पुनात्सांगछू नदी पर स्थित है और 200 मेगावाट के छह टर्बाइनों को चलाने के लिए दो पहाड़ी नदियों- फो चू (Pho Chu) और मो चू (Mo Chu)- के मिलने से बनने वाले हेड का उपयोग करती है। यह परियोजना 2008 में भारत-भूटान 10,000 मेगावाट पहल के हिस्से के रूप में शुरू हुई थी। लगभग 136 मीटर ऊंचे और 239 मीटर लंबे एक कंक्रीट बांध, 11 किलोमीटर लंबी हेडरस सुरंग (headrace tunnel) और एक विशाल भूमिगत पावरहाउस (underground powerhouse) की योजना बनाई गई थी। हालांकि, 2013 में दाहिने किनारे पर अस्थिरता के कारण काम को निलंबित करना पड़ा। व्यापक अध्ययन के बाद, भारत और भूटान जुलाई 2025 में ढलान स्थिरीकरण उपायों (slope stabilisation measures) के साथ निर्माण फिर से शुरू करने पर सहमत हुए।

डिजाइन और विशेषताएं

  • रन-ऑफ-द-रिवर योजना (Run-of-the-river scheme): संयंत्र एक बड़ा जलाशय बनाए बिना नदी के प्राकृतिक प्रवाह का उपयोग करेगा। एक छोटा पोंडेज (pondage) दैनिक उतार-चढ़ाव को सुचारू करेगा।
  • छह टर्बाइन (Six turbines): एक भूमिगत पावरहाउस में 200-200 मेगावाट के छह फ्रांसिस टर्बाइन (Francis turbines) होंगे। 10 मीटर व्यास वाली हेडरस सुरंग के माध्यम से मोड़ा गया पानी नदी में लौटने से पहले टर्बाइनों को मोड़ने के लिए 357 मीटर नीचे गिरेगा।
  • वार्षिक उत्पादन (Annual generation): एक बार चालू होने के बाद, पुनात्सांगछू-I हर साल लगभग 5,670 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन करेगा, जिससे भूटान के लिए विश्वसनीय स्वच्छ बिजली और भारत को निर्यात के लिए बिजली उपलब्ध होगी।
  • फंडिंग मॉडल (Funding model): भारत परियोजना लागत का 40 प्रतिशत अनुदान के रूप में और 60 प्रतिशत रियायती ब्याज पर ऋण के रूप में वित्तपोषित कर रहा है। फरवरी 2026 तक, परियोजना ने 87 प्रतिशत से अधिक भौतिक प्रगति और 93 प्रतिशत वित्तीय प्रगति हासिल कर ली थी।

नदी और स्थान

पुनात्सांगछू नदी प्रणाली (Punatsangchhu river system) दो ग्लेशियर-पोषित सहायक नदियों, फो चू और मो चू से निकलती है, जो भूटान की घाटियों और असम में दक्षिण की ओर बहने से पहले पुनाखा (Punakha) में मिलती हैं। वांगदुए फोडरंग में परियोजना स्थल संगम के नीचे की ओर स्थित है, जहां नदी घाटियों के माध्यम से तेजी से नीचे उतरती है। इस क्षेत्र में जलविद्युत की उच्च क्षमता है लेकिन यह भूस्खलन और भूकंपीय गतिविधि (seismic activity) के प्रति संवेदनशील है, जिसके लिए सावधानीपूर्वक इंजीनियरिंग की आवश्यकता होती है।

महत्व

  • ऊर्जा सहयोग (Energy cooperation): भूटान अपनी अधिकांश जलविद्युत भारत को निर्यात करता है, जिससे राजस्व की कमाई होती है और द्विपक्षीय संबंध मजबूत होते हैं। पुनात्सांगछू-I इस साझेदारी में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
  • आर्थिक लाभ (Economic benefits): यह परियोजना भूटान की जीडीपी को बढ़ावा देगी, स्थानीय रोजगार पैदा करेगी और सामाजिक कार्यक्रमों को वित्तपोषित करने में मदद करेगी।
  • इंजीनियरिंग सबक (Engineering lessons): ढलान की अस्थिरता को दूर करने से अन्य हिमालयी जलविद्युत परियोजनाओं के लिए मूल्यवान अनुभव मिलता है जहां भूविज्ञान चुनौतीपूर्ण है।

स्रोत: NDTV

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