विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी Biology

Pushkarnema Curajae: Pushkar Lake में नया Cyanobacterium

Pushkarnema Curajae: Pushkar Lake में नया Cyanobacterium

समाचार में क्यों?

सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान (Central University of Rajasthan) के वैज्ञानिकों ने राजस्थान की पुष्कर झील (Pushkar Lake) से एकत्र किए गए पानी के नमूनों से एक नए cyanobacterium की खोज की घोषणा की। Pushkarnema curajae नाम का यह जीव न केवल एक नई प्रजाति है बल्कि एक पूरी तरह से नया जीनस (genus) है, जो अर्ध-शुष्क पुष्कर पारिस्थितिकी तंत्र की अनूठी सूक्ष्मजीवी विविधता को उजागर करता है।

पृष्ठभूमि

Cyanobacteria, जिन्हें अक्सर नीले-हरे शैवाल (blue-green algae) कहा जाता है, सूक्ष्म जीवाणु हैं जो प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) करते हैं। वे जलीय और स्थलीय वातावरण की एक विस्तृत श्रृंखला में होते हैं और उन्होंने पृथ्वी के शुरुआती वायुमंडल में ऑक्सीजन पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। चूंकि वे नाइट्रोजन को स्थिर कर सकते हैं और बायोएक्टिव यौगिकों (bioactive compounds) का उत्पादन कर सकते हैं, इसलिए साइनोबैक्टीरिया का अध्ययन जैव उर्वरक (biofertilisers), फार्मास्यूटिकल्स और न्यूट्रास्यूटिकल्स (nutraceuticals) के लिए किया जाता है।

खोज और विशेषताएं

  • नमूनाकरण: शोधकर्ताओं ने 2016 और 2021 में सर्वेक्षण के दौरान पुष्कर झील (Pushkar Sarovar) से पानी एकत्र किया। प्रयोगशाला में उन्होंने असामान्य आकृति विज्ञान और आनुवंशिक अनुक्रम के साथ एक फिलामेंटस साइनोबैक्टीरियम (filamentous cyanobacterium) को अलग किया।
  • नया जीनस: विस्तृत विश्लेषण से पता चला कि यह जीव किसी भी ज्ञात जीनस में फिट नहीं बैठता है। जीनस नाम Pushkarnema पुष्कर झील की याद दिलाता है, जबकि प्रजाति का नाम curajae सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान (Central University of Rajasthan) को सम्मानित करता है।
  • संभावित उपयोग: प्रारंभिक परीक्षण बताते हैं कि Pushkarnema curajae वर्णक (pigments) और मेटाबोलाइट्स (metabolites) का उत्पादन कर सकता है जिनमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह नए न्यूट्रास्यूटिकल्स, जैव उर्वरक और जलवायु-अनुकूल फसलों (climate-resilient crops) को जन्म दे सकता है।
  • पारिस्थितिक संदर्भ: पुष्कर थार मरुस्थल (Thar Desert) के अर्ध-शुष्क क्षेत्र में स्थित है। यह झील उच्च वाष्पीकरण और उतार-चढ़ाव वाली लवणता (salinity) का अनुभव करती है, जो चरम-प्रेमी (extremophile) रोगाणुओं का समर्थन करती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि कई और अनूठी प्रजातियाँ अभी तक खोजी नहीं गई हैं।

महत्व

एक नए साइनोबैक्टीरियल जीनस (cyanobacterial genus) की खोज दुर्लभ है और यह रेखांकित करती है कि भारतीय झीलों में सूक्ष्मजीवी विविधता के बारे में बहुत कम जानकारी है। ऐसे जीवों का दस्तावेजीकरण और खेती चिकित्सा और कृषि के लिए नए यौगिक (compounds) दे सकती है, साथ ही नाजुक आर्द्रभूमि पारिस्थितिक तंत्र (wetland ecosystems) के संरक्षण को भी सूचित कर सकती है।

स्रोत: The Times of India

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