चर्चा में क्यों? ईरान के विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि हाल ही में अमेरिकी सैन्य हमले (US military strike) ने फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में केश्म द्वीप (Qeshm Island) पर एक अलवणीकरण संयंत्र (desalination plant) को निशाना बनाया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, हमले ने लगभग 30 गांवों की जल आपूर्ति को बाधित कर दिया, जिससे निंदा और परिणामों की चेतावनी भड़क उठी।
पृष्ठभूमि
केश्म ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है, जो देश के दक्षिणी तट से दूर होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में स्थित है। यह लगभग 1 200 वर्ग किलोमीटर को कवर करता है और कई कस्बों और गांवों की मेजबानी करता है। बंदरगाहों और अलवणीकरण संयंत्रों सहित द्वीप का बुनियादी ढांचा, स्थानीय समुदायों और राष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियों दोनों का समर्थन करता है।
ईरान के आरोप
- ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने कहा कि अमेरिकी बलों ने केश्म द्वीप पर एक अलवणीकरण सुविधा (desalination facility) के खिलाफ हमला किया, जिसे उन्होंने "मानवता के खिलाफ अपराध" बताया।
- संयंत्र द्वीप पर लगभग 30 गांवों को पीने के पानी (drinking water) की आपूर्ति करता है। सुविधा को हुए नुकसान से कथित तौर पर निवासियों के पास स्वच्छ पानी की पहुंच नहीं बची है।
- ईरान ने चेतावनी दी कि हमले का जवाब दिया जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों ने विशिष्ट घटना पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन क्षेत्रीय संघर्षों (regional conflicts) को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव अधिक है।
- होर्मुज़ जलडमरूमध्य एक रणनीतिक जलमार्ग है जिसके माध्यम से दुनिया के तेल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गुजरता है। क्षेत्र में किसी भी सैन्य कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ जाती है।
यह घटना दर्शाती है कि भू-राजनीतिक संघर्षों (geopolitical conflicts) के दौरान महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा कैसे लक्ष्य बन सकता है। पीने के पानी की कमी तत्काल मानवीय जोखिम (humanitarian risks) पैदा करती है।
स्रोत: NDTV report on alleged attack on Qeshm island desalination plant