समाचार में क्यों?
रूसी रक्षा अधिकारियों ने भारत को लंबी दूरी की R-37M हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल (air-to-air missile) की बिक्री को मंजूरी दे दी है। इस आदेश की कीमत कथित तौर पर लगभग $1.2 बिलियन है, जिसमें भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) के Su-30MKI लड़ाकू विमानों को लैस करने के लिए लगभग 300 मिसाइलें शामिल हैं। निर्यात अनुमोदन को चीन द्वारा PL-15 और PL-17 लंबी दूरी की मिसाइलों की तैनाती की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाता है और यह भारत की स्वदेशी एस्ट्रा एमके-II (Astra Mk-II) और एमके-III (Mk-III) मिसाइलों के तैयार होने तक क्षमता के अंतर को पाटेगा।
पृष्ठभूमि
R-37M (निर्यात पदनाम RVV-BD) एक रूसी हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल (air-to-air missile) है जिसे एयरबोर्न अर्ली-वार्निंग एयरक्राफ्ट (AWACS), टोही विमान और एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर जैसे उच्च-मूल्य वाले हवाई लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। पहले के R-33 से विकसित, यह असाधारण सीमा प्राप्त करने के लिए एक शक्तिशाली दोहरे-पल्स (dual-pulse) रॉकेट मोटर और एक लफ्टेड उड़ान पथ (lofted flight path) का उपयोग करता है। यह मिसाइल आमतौर पर MiG-31 और Su-35 लड़ाकू विमानों द्वारा ले जाई जाती है और हाल ही में Su-57 पर एकीकृत की गई है।
R-37M की मुख्य विशेषताएं
- अल्ट्रा-लॉन्ग रेंज: मिसाइल प्रक्षेपण की स्थिति के आधार पर 300-400 किमी तक की दूरी पर लक्ष्य को भेद सकती है। जब उच्च ऊंचाई से लॉन्च किया जाता है, तो यह विशाल हवाई क्षेत्र को कवर कर सकती है और दुश्मन के समर्थन विमानों को खतरा पैदा कर सकती है।
- उच्च गति: एक बड़े ठोस-ईंधन बूस्टर (solid-fuel booster) द्वारा संचालित, R-37M कथित तौर पर लगभग मैक 6 (Mach 6) की गति तक पहुंचती है, जिससे विरोधी को प्रतिक्रिया करने का कम समय मिलता है।
- मार्गदर्शन (Guidance): यह लॉन्च विमान से मिड-कोर्स अपडेट के साथ इनर्शियल नेविगेशन (inertial navigation) और अंतिम चरण में एक सक्रिय रडार सीकर (active radar seeker) का उपयोग करता है। मिसाइल प्रभाव पर ऊर्जा को अधिकतम करने के लिए लक्ष्य पर गोता लगाते हुए, एक उच्च, लफ्टेड प्रक्षेपवक्र (lofted trajectory) से उड़ान भरती है।
- वारहेड: 60 किलोग्राम के उच्च-विस्फोटक ब्लास्ट/विखंडन वारहेड से लैस, यह बड़े, कम पैंतरेबाज़ी वाले विमानों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- भारतीय विमानों के साथ एकीकरण: भारत मिसाइलों को अपने Su-30MKI बेड़े में एकीकृत करने की योजना बना रहा है। प्लेटफ़ॉर्म का शक्तिशाली रडार और कई R-37M ले जाने की क्षमता इसे लंबी दूरी की इंटरसेप्शन भूमिकाओं के लिए उपयुक्त बनाती है।
यह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
- क्षेत्रीय खतरों का मुकाबला: चीन ने अपने J-20 लड़ाकू विमानों और अन्य प्लेटफार्मों पर PL-15 और PL-17 मिसाइलें तैनात की हैं। R-37M का अधिग्रहण भारत को लंबी दूरी के हवाई युद्ध में प्रतिरोध (deterrence) बनाए रखने में मदद करता है।
- स्वदेशी मिसाइलों से पहले पुल: भारत की एस्ट्रा एमके-II (Astra Mk-II) और एमके-III (Mk-III), जिनकी सीमा 160-300 किमी होगी, अभी भी विकास में हैं। R-37M एक अंतरिम क्षमता प्रदान करता है।
- उच्च-मूल्य वाली संपत्तियों को लक्षित करना: मिसाइल एडब्ल्यूएसीएस (AWACS) और टैंकर विमानों को बेअसर कर सकती है, जो एक विरोधी की नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमताओं को कमजोर कर सकती है।
- तकनीकी लाभ: R-37M के साथ अनुभव भारत के अपने मिसाइल डिजाइन और एकीकरण प्रथाओं को सूचित कर सकता है।
स्रोत: Defence.IN